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भारतीय स्वाभिमान और शौर्य का उदघोष
१९ मे २०१३
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पाञ्चजन्य
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नक्सली-आईएसआई गठजोड़"
नक्सली-आईएसआई गठजोड़
तारीख: 10/22/2012 11:22:58 AM
संप्रग
सरकार
राष्ट्रीय
व
आंतरिक
सुरक्षा
को
लेकर
कितनी
गफलत
में
है
और
संबंधित
खतरों
का
कैसा
गलत
आकलन
करती
रही
है
जिससे
उसकी
कार्रवाई
की
दिशा
भी
प्रभावित
हुई
,
नौ
नक्सल
प्रभावित
राज्यों
के
पुलिस
प्रमुखों
की
बैठक
में
यह
तथ्य
खुलकर
सामने
आ
गया।
सरकार
की
इसी
दिशाहीनता
और
उदासीनता
के
कारण
एक
ओर
तो
माओवादी
नक्सली
हिंसा
खतरनाक
रूप
से
बढ़ती
गई
और
देश
के
करीब
200
जिलों
तक
उनका
प्रसार
हो
गया
,
वहीं
दूसरी
ओर
पाकिस्तान
प्रेरित
और
उसकी
कुख्यात
खुफिया
एजेंसी
आईएसआई
द्वारा
प्रशिक्षित
जिहादी
आतंकवाद
जम्मू
-
कश्मीर
से
निकलकर
पूरे
देश
में
फैलकर
भारत
की
संप्रभुता
व
एकता
-
अखंडता
के
लिए
गंभीर
चुनौती
बन
गया।
इनसे
निपटने
के
लिए
न
तो
सरकार
ने
कोई
सख्ती
अपनाई
और
न
कोई
राजनीतिक
इच्छाशक्ति
दिखाई
,
बल्कि
जिहादी
आतंकवाद
से
निपटने
में
तो
कांग्रेस
की
सत्ताकांक्षा
और
उसको
पूरा
करने
वाला
मुस्लिम
तुष्टीकरण
आड़े
आते
रहे।
कई
मौकों
पर
तो
कांग्रेस
के
कई
बड़े
नेता
आतंकवादियों
की
पैरवी
करते
और
उनके
विरुद्ध
लड़
रहे
जांबाजों
पर
उंगली
उठाते
भी
देखे
गए।
इस
मामले
में
उसके
साथ
वह
सेकुलर
जमात
भी
शामिल
हो
गई
जो
मुस्लिम
वोटों
के
सहारे
सत्ता
का
समीकरण
साधने
के
प्रयास
में
लगी
रहती
है।
बैठक
में
प
.
बंगाल
के
पुलिस
महानिदेशक
के
द्वारा
यह
तथ्य
सामने
लाया
गया
है
कि
वहां
पाकिस्तानी
खुफिया
एजेंसी
आईएसआई
व
नक्सलियों
के
बीच
गठजोड़
के
पक्के
सबूत
मिलने
लगे
हैं।
प्रतिबंधित
राष्ट्र
विरोधी
आतंकवादी
संगठन
'
सिमी
'
इन
दोनों
के
बीच
सामंजस्य
बिठाने
का
काम
कर
रहा
है।
प
.
बंगाल
पुलिस
के
पास
ऐसी
पुख्ता
सूचनाएं
हैं
कि
नक्सलियों
के
कई
समूहों
ने
सिमी
के
जरिये
आईएसआई
से
गठजोड़
कर
लिया
है।
वस्तुत
:
ये
कोई
नए
तथ्य
नहीं
हैं
,
लेकिन
केन्द्र
सरकार
इन्हें
नकारती
रही
है।
नक्सलियों
का
गठजोड़
तो
चर्च
के
साथ
भी
दिखा
,
जब
उड़ीसा
के
कंधमाल
में
4
वर्ष
पहले
प्रख्यात
संत
लक्ष्मणानंद
सरस्वती
की
उनके
7
साथियों
समेत
नृशंस
हत्या
कर
दी
गई
,
क्योंकि
कंध
वनवासियों
के
बीच
स्वामी
जी
के
सेवाकार्यों
से
चर्च
का
मतांतरण
अभियान
प्रभावित
हो
रहा
था
,
जिससे
चर्च
बौखला
गया
और
स्वामी
जी
को
रास्ते
से
हटाने
के
लिए
माओवादी
नक्सलियों
का
इस्तेमाल
किया
गया।
उधर, चीनी सहयोग से नेपाल के रास्ते भारत में खून-खराबा करने व अराजकता फैलाने में जुटे माओवादी नक्सलियों को आईएसआई न केवल हथियार मुहैया करा रही है, बल्कि उन्हें प्रशिक्षित भी कर रही है, क्योंकि भारत की किसी भी तरह से तबाही पाकिस्तान और आईएसआई का खुला एजेंडा है। नेपाल में चीन-आईएसआई गठजोड़ का अड्डा भारत के लिए कितना बड़ा खतरा बनता जा रहा है, इसकी परवाह शायद भारत सरकार को नहीं है। अन्यथा उसकी नेपाल नीति में इसकी चिंता व झलक दिखाई देती। इस सत्य को समझना होगा कि सत्ताभिमुख रहकर कोई भी शासन देश की सुरक्षा व एकता-अखंडता के लिए खड़े होने वाले खतरों से सख्ती से नहीं निपट सकता। उसके लिए राष्ट्राभिमुख नीतियां और सोच चाहिए जिसका कांग्रेस व सेकुलरी सोच में सर्वथा अभाव दिखता है। प.बंगाल में कम्युनिस्टों का शासन तो नक्सलियों को अनुकूल लगता ही था, लेकिन सत्ता में आने के लिए ममता बनर्जी ने जिस प्रकार मुस्लिम तुष्टीकरण व नक्सलियों के प्रति नरम रवैया दिखाया है, वह आज राज्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है, जिसके प्रति वहां के पुलिस महानिदेशक केन्द्रीय गृहमंत्रालय द्वारा आहूत बैठक में चिंता जता रहे हैं।
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