आवरण पृष्ठ
हमारे बारे मे
प्रसार
संपर्क
विज्ञापन
लेखक
पुराने अंक
भारतीय स्वाभिमान और शौर्य का उदघोष
१९ मे २०१३
Go
पाञ्चजन्य
Like Minded
» विशेष
» संपादकीय
» दृष्टिपात
» स्वास्थ्य
» विविध
» भविष्यफल
» प्रथम पृष्ठ
» पाठकीय
Advertisment
गर्भस्थ बेटी की गुहार"
गर्भस्थ बेटी की गुहार
तारीख: 10/29/2012 11:42:24 AM
गर्भस्थ
बेटी
की
गुहार
बताओ
!
कहां
दोष
मेरा
बताओ
!
नहीं
मुझको
खिलने
से
पहले
मिटाओ
!
सुनो
सारी
मांओ
,
सुनो
सब
पिताओ
!
रचा
बीज
खुद
ही
,
बने
खुद
ही
बैरी
,
ये
कैसा
सितम
आज
ढाने
चले
हो
?
मैं
बेटी
हूं
,
कोई
मुसीबत
नहीं
हूं
,
मुझे
गर्भ
में
ही
मिटाने
चले
हो।
हटाओ
!
ये
मन
का
अंधेरा
हटाओ
!
बताओ
!
कहां
दोष
मेरा
बताओ
!
नहीं
फूल
होंगे
,
न
होंगी
बहारें
,
इधर
होंगे
कांटे
,
उधर
होंगे
पत्थर
,
अगर
बेटियां
मिट
गईं
इस
जहां
से
-
तो
कुछ
भी
नहीं
फिर
रहेगा
धरा
पर।
रहम
कुछ
तो
मासूम
जीवन
पे
खाओ
!
बताओ
!
कहां
दोष
मेरा
बताओ
!
किसी
क्षेत्र
में
अब
नहीं
कम
हैं
बेटी
,
कि
खुशियों
भरा
पाक
मौसम
हैं
बेटी
,
सभी
चोटियों
पर
फहरता
हो
फर
-
फर
बनीं
आज
कुछ
ऐसा
परचम
हैं
बेटी।
भरोसा
करो
!
यूं
नहीं
डगमगाओ
!
बताओ
!
कहां
दोष
मेरा
बताओ
!
मुझे
हक
है
दुनिया
का
देखूं
उजाला
,
मुझे
हक
है
आंगन
में
खेलूं
तुम्हारे
,
जनम
लेके
मैं
भी
रचूं
एक
दुनिया
भरूं
मुट्ठियों
में
गगन
के
सितारे
मगर
पहले
मुझको
ये
दुनिया
दिखाओ
!
बताओ
!
कहां
दोष
मेरा
बताओ
!
सुनो सारी मांओ, सुनो सब पिताओ!
प्रथम ५०० खबरे
Terms of use
Privacy Policy
Copyright
© by Panchjanya All Right Reserved.
Image Gallery