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भारतीय स्वाभिमान और शौर्य का उदघोष
२४ जून २०१२
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साहित्यिकी"
साहित्यिकी
तारीख: 6/16/2012 2:21:32 PM
साहित्यिकी
गांव
में
बचा
क्या
है
राकेश
भ्रमर
कौन
गुलशन
से
बहारों
को
चुरा
लेता
है
,
अपने
साए
से
उजालों
को
डरा
देता
है
,
आग
वो
दिल
में
नहीं
,
मुख
में
लिए
फिरता
है
,
अपनी
बातों
से
हवाओं
को
जला
देता
है
,
पेड़
सहमे
हैं
,
सांस
पत्तियां
नहीं
लेतीं
,
कौन
वादी
में
नज़ारों
को
जला
देता
है
,
मौज
साहिल
की
तरफ
आजकल
नहीं
आती
,
लहर
को
देख
,
किनारों
को
गिरा
देता
है
,
साथ
जुगनू
के
उड़ा
है
तो
भटक
जाएगा
,
चांद
के
साथ
सितारों
को
मिटा
देता
है
,
खेत
-
खलिहान
जले
,
गांव
में
बचा
क्या
है
,
अज़ाब
सबको
दियारों
सा
ढहा
देता
है
,
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