बाल मन
| तारीख: 6/2/2012 3:09:19 PM |
|
बाल मन
बाल कहानी
संगठन ही शक्ति है
राजी सिंह
बच्चो!
कोई भी पापी, अपराधी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसकी शक्ति की एक सीमा होती है। यदि सज्जन व्यक्ति संगठित होकर दुष्टों का सामना करें, तो दुष्ट अवश्य पराजित होगा। इसी संदेश को स्वयं में समेटे पंचतंत्र की एक कथा है। घने वन में चटक पक्षी का एक जोड़ा रहता था। चटका ने अंडे दिए। दोनों प्रसन्न थे। इसी वन में दुष्ट हाथी भी रहता था। उसे तोड़-फोड़ करने, घोंसले उजाड़ने में बड़ा मजा आता था। अंडों से अभी बच्चे निकले भी नहीं थे। इसी दौरान वह दुष्ट हाथी उधर से गुजरा। आदत से मजबूर वह घोंसला तोड़ने वृक्ष की ओर बढ़ा। चटक पक्षियों ने विनम्रता से निवेदन किया, 'गजराज घोंसले में अंडे हैं। कृपया इसे न तोड़ें।' दुष्ट हाथी ने उनकी प्रार्थना न सुनी और घोसला तोड़ दिया। घोंसले के साथ अंडे भी टूट गए।
चटका बहुत व्यथित हुई। उन दोनों ने संकल्प लिया कि वे पापी हाथी से बदला अवश्य लेंगे। वे दोनों अपने मित्र कठफोड़वा से मिले। उनकी बात सुनकर कठफोड़वा उनकी मदद को तैयार हो गया। 'पापी से युद्ध करने पर धर्म लाभ होता है। मैं आपके साथ हूं।' लेकिन हाथी जैसे शक्तिशाली को परास्त करना सरल कार्य नहीं था। उन्होंने रणनीति बनाई कि संगठित होकर इसको दंड देंगे। योजनानुसार कठफोड़वा उन्हें वीणारखा नामक मक्खी के पास ले गया। वीणारखा ने उन सबको मेघनाद नामक मेंढक से मिलवाया। अब सब धर्मयुद्ध के लिए तैयार थे।
योजनानुसार वीणारखा मक्खी हाथी के कानों में वीणा की ध्वनि करने लगी। इससे मस्त होकर हाथी ने अपनी आंखें बन्द कर लीं। तभी कठफोड़वा ने अपनी नुकीली चोंच से उसकी आंखों पर हमला कर दिया। हाथी व्याकुल हो गया। उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। उसका कंठ सूख रहा था। उसी क्षण एक गहरे गड्ढे से मेंढक मेघनाद ने टर्र-टर्र की ध्वनि करनी शुरू कर दी। हाथी ने सोचा आगे पानी है। पानी के लिए वह आगे बढ़ा और गहरी खाई में गिर गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।
इस कथा से संदेश मिलता है कि अन्याय का विरोध करने के लिए संगठित होना कितना जरूरी है। हिंसक तत्वों का सामना सभी को मिलकर करना चाहिए तभी दुष्प्रवृत्ति समाप्त हो सकती है।
देवों का प्यारा पंछी मयूर
बनवारी लाल ऊमर वैश्य
जब नई दुनिया बनी तब प्रजापति दक्ष की बेटी इरा ने पर्यावरण लाने के लिए वृक्षों, वनों और पुष्पों की सृष्टि की जिनसे चारों ओर हरियाली छा गई। पर्वत-घाटी की शून्यता को मिटाने के लिए शुकी, भासी आदि ने पक्षियों को जन्म दिया। दिशाएं पक्षियों के कलरव से गूंज उठीं। जंगलों में मंगलगान होने लगा। मयूर थिरक उठे और बादल राग गा उठे। प्रेम के देवता काम ने तोते, लक्ष्मी ने उल्लू, विष्णु ने गरुड़ और सरस्वती ने हंस को अपना वाहन बनाया। यूनान की देवी जूनो ने मयूर को अपना प्यारा पक्षी घोषित किया जो वर्षा, हरियाली और वातावरण का प्रतीक बना। यह शिव की तरह नटराज है जो जंगल को मंगल करता है और मेघयन्तिका को रिझाता है।
जब दुनिया बनी तब ईर्ष्या, क्रोध और भय के शैतान घूम रहे थे जो हरे-भरे और काले रंग के थे। ईश्वर ने इन्हें दबोच कर मयूर के इन्द्रधनुषी पंखो में समेट रखा। आकाश की देवी और जुपितर की रानी हेरा मयूर पालती थी जिससे धरती पर वर्षा होती थी। मयूर कला और संस्कृति का वाहक बना। झोपड़ी से लेकर महलों तक मयूर की पूजा होने लगी। मयूर राजकुमारों और राजकुमारियों के साथ खेलता है।
एक बार आकाश यात्रा करते समय रावण को देखकर इन्द्र मयूर हो गए थे और इन्द्र पक्षी के रूप में मयूर चर्चित हुआ। इन्द्र वर्षा के देवता हैं और मयूर को वर्षा प्रिय है। वह पृथ्वी पर सावन बुलाता है जैसे ऋषि 'कस्मै देवाय हविषा विधेम्' कह कर इन्द्र का आवाहन करते हैं। मयूर को घन गर्जन बहुत प्रिय है इसलिए वह युद्ध पक्षी है। वह आतंक के प्रतीक सर्प को खा जाता है। आतंकी तारक को मारने के लिए देव सेनापति स्कन्द ने मयूर को अपना वाहन बनाया था। युद्ध क्षेत्र में मयूर ध्वज लहराते थे। मयूर सिंहासन पर युधिष्ठिर बैठ चुके हैं जिसे मुगलों ने 'तख्त ताउस' कहा। फारसी में ताउस का अर्थ मयूर है। यह मेघ श्री का प्रिय पक्षी है।
विष्णु पुराण के अनुसार देव बन्धु ने एक बार मयूर का जन्म पाया था। एक बार उन्हें पूर्व पत्नी काशिराज की बेटी पहचान गई थी और उनकी सेवा करने लगी। मयूर धरती के देवता का मित्र है जो खेत की रखवाली करता है। यह शची का दुलारा है। भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर ही है।
प्राचीन भारत में ऋषियों के आश्रम, मन्दिरों और मठों में मयूर विचरण करते थे। 'उत्तर राम चरित' के अनुसार सीता जी मयूरों को ताली पीट पीटकर नृत्य कला सिखाती थीं। श्री कृष्ण मोर मुकुट पहना करते और मयूर नृत्य दिखाते थे। जी हां, मयूर देवों का प्यारा पंछी है। हमें इनका संरक्षण करना चाहिए। यह बच्चों का लाड़ला है। मयूर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है।