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भारतीय स्वाभिमान और शौर्य का उदघोष
०१ जुलाई २०१२
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पीड़ा की गूंजी शहनाई"
पीड़ा की गूंजी शहनाई
तारीख: 6/23/2012 1:51:54 PM
पीड़ा
की
गूंजी
शहनाई
घमंडीलाल
अग्रवाल
भ्रष्टाचार
करवट
बदले
काला
धन
लेता
अंगड़ाई
,
आम
आदमी
के
जीवन
में
पीड़ा
की
गूंजी
शहनाई।
राजनीति
से
नीति
नदारद
न्यायालय
से
न्याय
उठा
है
,
नैतिकता
की
माला
बिखरी
सच्चाई
का
कोष
लुटा
है
,
पूरब
,
पश्चिम
,
उत्तर
,
दक्षिण
दिशा
-
दिशा
आफत
गहराई।
पीड़ा
की
गूंजी
शहनाई।।
चाटुकारिता
खुलकर
हंसती
मूंछों
को
पैनाते
चमचे
,
चोरी
,
डाका
,
हत्या
,
दंगे
गली
-
गली
हों
इनके
चर्चे
,
सपने
तक
हो
गए
विखण्डित
और
प्रदूषित
सी
पुरवाई।
पीड़ा
की
गूंजी
शहनाई।।
दोनों
गाल
बजें
ज्यों
ढोलक
पेट
पीठ
से
मिल
इतराए
,
पुत्र
-
पित्रा
को
धोखे
देता
बंधु
-
बंधु
को
मार
गिराए
,
डर
के
सायों
बीच
जिंदगी
डसती
अपनी
ही
परछाई।
पीड़ा
की
गूंजी
शहनाई।।
खुशबू
के
प्रतिमान
बिराने
मन
का
आंगन
सूना
-
सूना
,
आशाओं
की
बगिया
उजड़ी
तन
पतझर
का
एक
नमूना
,
नयनों
से
आंसू
झरते
हैं
सुख
की
ब्रह्मपुत्र
शरमाई।
पीड़ा की गूंजी शहनाई।।
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