२९ जुलाई २०१२
           
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जीवनशाला"

जीवनशाला

तारीख: 7/21/2012 5:38:33 PM


जीवन अमूल्य है। दुर्गुण और कुसंस्कार या गलत आदतें जीवन में ऐसी दुर्गंध  उत्पन्न कर देती हैं कि हर कोई उस व्यक्ति से बचना चाहता है। जीवन को लगातार गुणों और संस्कारों से संवारना पड़ता है, तभी वह सबका प्रिय और प्रेरक बनता है। यहां हम इस स्तंभ में शिष्टाचार की कुछ छोटी-छोटी बातें बताएंगे जो आपके दैनिक जीवन में सुगंध बिखेर सकती हैं-

कभी भी किसी के पीठ पीछे उसकी बुराई करें या उसके लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल करें, क्योंकि तब वह अपना पक्ष रखने वहां नहीं सकता।

अगर कुछ लोग अपनी निजी बातचीत कर रहे हैं तो उसमें दखलंदाजी असभ्यता मानी जाती है।

कभी भी जोश में आकर किसी ऐसे काम को पूरा करने की समय सीमा का ऐसा दावा करें, जिसमें वह काम होना संभव ही हो। झूठा आश्वासन दोनों ही पक्षों को नीचा दिखवाता है। बहरहाल, एक बार अगर आपने वादा कर लिया है तो अपने हाथ में लिया हुआ काम पूरा करके ही दम लीजिए।

कभी भी किसी के विरुद्ध अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए और ही कभी किसी को कोसना चाहिए और ही उसका मजाक उड़ाना चाहिए।

कभी भी दूसरों की अपेक्षा तेज नहीं बोलना चाहिए। तेज या जोर से बोलने का यह मतलब नहीं कि लोग आपकी बात ध्यान से सुनेंगे, बल्कि यह आपकी अभद्रता मानी जाएगी।


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