०५ अगस्त २०१२
           
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साहित्यिकी"

साहित्यिकी

तारीख: 7/28/2012 5:30:16 PM

साहित्यिकी

योगेन्द्र वर्मा 'व्योम'

 

तुमको पत्र लिखूं

कई दिनों से सोच रहा हूं

तुमको पत्र लिखूं!

लिखूं कुशलता घर की

आंगन की दीवार लिखूं

खुशफहमी की फसलें,

मन के खरपतवार लिखूं

रिश्तों के पैबंद लगे

जर्जर से वस्त्र लिखूं

तुमको पत्र लिखूं!

कभी सोचता हूं

कटु अनुभव बांटू जीवन के

या फिर लिखूं याद आते दिन

गुजरे बचपन के

या आने वाले उजले पल

को भी सर्वत्र लिखूं

तुमको पत्र लिखू !

 

मोबाइल से बातें तो

काफी हो जाती हैं

लेकिन शब्दों की खुशबुएं

कहां मिल जाती हैं

थके-थके से खट्टे-मीठे

बीते सत्र लिखूं

कई दिनों से सोच रहा हूं

तुमको पत्र लिखूं !!


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