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भारतीय स्वाभिमान और शौर्य का उदघोष
१२ अगस्त २०१२
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यह कैसी सेवा?"
यह कैसी सेवा?
तारीख: 8/6/2012 12:56:24 PM
यह
कैसी
सेवा
?
मोहन
उपाध्याय
इक-दूजे को देते गाली
यह इनकी पहचान है;
देश हो गया दूर दलों से
जिसका इन्हें न ध्यान है।
ताल ठोककर ये कहते हैं-
हम अब जांच करायेंगे;
गड़े हुए मुर्दों को लाकर
फिर से तुम्हें दिखाएंगे।
वर्तमान की बात न करते
बस, भविष्य के सपने हैं;
काम नहीं पूरा होता है
सपने कभी न अपने हैं।
केवल कुरसी बची रहे नित
इसका ही बस ध्यान है;
यह कैसी जनता की सेवा?
यह उसका अपमान है।
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