१९ मे २०१३
           
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दृष्टिपात"

दृष्टिपात

तारीख: 9/15/2012 1:22:26 PM

दृष्टिपात

लीबिया में अमरीकी राजदूत

स्टीवेंस की हत्या

इस्लाम पर कथित टिप्पणियों को लेकर अमरीकी फिल्म से चिढ़े जिहादी

एक अमरीकी निर्देशक की बनाई फिल्म में इस्लाम पर कथित टिप्पणियों से चिढ़कर लीबिया के कट्टर इस्लामवादियों की भीड़ ने राकेट दागकर अमरीकी राजदूत क्रिस स्टीवेन्स और अमरीकी कोंसुलेट के तीन अन्य अधिकारियों की हत्या कर दी। 11 सितम्बर की शाम हथियारबंद जिहादियों की भीड़ ने बेनगाजी स्थित कोंसुलेट की इमारत पर धावा बोल दिया और कार में बैठे राजदूत स्टीवेंस पर राकेट दाग दिया। पूरा कोंसुलेट आग की भेंट चढ़ गया। उसी दिन न्यूयार्क में 9/11 की याद में सभा करके लौटे अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा और विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस घटना की खबर मिलते ही घोषणा की कि हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा। बेनगाजी वही शहर है जहां पिछले साल लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोह परवान चढ़ा था। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से, लीबिया हेराल्ड लिखता है कि अमरीकी कोंसुलेट पर हमला करने वालों में कट्टरवादी इस्लामी गुट अंसार अल-शरिया के सदस्य भी थे। उधर पड़ोसी इजिप्ट में भी प्रदर्शनकारियों ने अमरीकी दूतावास की दीवार पर चढ़कर अमरीकी झंडा उतारकर जला दिया। पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया करते हुए अमरीकी सरकार ने अपने दो युद्धपोत और सैनिकों की  एक टुकड़ी लीबिया की राजधानी त्रिपोली रवाना कर दी है।

'हैरी को पकड़ो या मार डालो'

अफगानिस्तानी तालिबानियों ने 10 सितम्बर को अपने जिहादियों को ताकीद की है कि अफगानिस्तान में अमरीकी फौजों की तरफ से मोर्चा संभाले ब्रिटेन ने 'युवराज हैरी को गिरफ्तार करो या मार डालो'। युवराज हैरी अपैची युद्धक हेलीकाप्टर के पायलट के नाते इसी हफ्ते अफगानिस्तान पहुंचे थे। अब से चार साल पहले भी हैरी तालिबानियों के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बनने के लिए यहां तैनात रह चुके हैं, लेकिन तब भी उनकी तैनाती ऐसी ही धमकियों के चलते समय से पहले ही खत्म कर दी गई थी।

27 साल के हैरी को अपनी इस दूसरी तैनाती में उस दक्षिणी सूबे हेलमंड में भेजा गया है जो दस साल से चल रहे इस खूनी संघर्ष के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में आता है। तालिबानियों की यह धमकी उनके प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद के हवाले से लंदन के एक टेलीविजन चैनल ने उद्धृत की है। धमकी में जबिउल्लाह कहता है, 'जो भी अमरीका के साथ मिलकर हमारे देश में लड़ रहा है, वह हमारा दुश्मन है और हम उस पर हमला करेंगे। युवराज हैरी अफगानिस्तान आए हैं और हमारे लिए बेशकीमती निशाना हैं। हम उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश करेंगे। अगर हम उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाए तो उन्हें निशाना बनाएंगे।'

जवाहिरी ने माना-लीबी मारा गया

जिहादी गुट अल कायदा के नेता ऐमन अल-जवाहिरी को आखिर मानना ही पड़ा कि उसके गुट का एक बड़ा जिहादी अबु याहया अल-लीबी पाकिस्तान में अमरीकी ड्रोन हमलों में मारा गया था। अमरीका ने तो जून 2012 में ही डंका पीट दिया था कि 'लीबी हलाक हुआ, हमने पाकिस्तान में ड्रोन से उस खत्म कर दिया।' पर अल कायदा के जिहादी उसे झुठलाते आ रहे थे। अब जवाहिरी ने एक वीडियो में यह कहते हुए लीबी के खात्मे को कबूल किया कि 'मैं बड़े फख्र से मुस्लिम उम्मा और मुजाहिदीनों के सामने लीबिया के शेर शेख हसन मोहम्मद कैद (यानी लीबी) की शहादत की खबर का ऐलान करता हूं।' दरअसल लीबी कायदा का बहुत बड़ा कमांडर माना जाता था और, विशेषज्ञों का कहना है कि कायदा के बड़े वाले जिहादी इसलिए इस खबर को 'बेबुनियाद' बताते आ रहे थे कि कहीं इससे उनके लड़ाकों के हौसले पस्त न हो जाएं।

'भगोड़े' उपराष्ट्रपति को सजाए-मौत

ईराक की एक अदालत ने देश के 'भगोड़े' उपराष्ट्रपति तारिक-अल-हाशिमी को सजाए-मौत दी है। उन पर हत्या का आरोप था। सुन्नी मत के हाशिमी इस साल के शुरू में ही देश छोड़कर तुर्की भाग गए थे। वहां के प्रशासन ने उन पर तब आरोप लगाया था कि वह हत्यारों का समूह संचालित कर रहे हैं। उनके इस मामले के चलते इराक में नस्लीय विद्वेष चरम पर पहुंच गया था और सत्ता में सुन्नी, शिया और कुर्द समूहों के बीच रस्साकशी बढ़ गई थी।

इराकी कायदों के तहत सजा की तामील फौरन की जाती है, लेकिन हाशिमी तो तुर्की में हैं, सो पसोपेश की स्थिति है। दिसम्बर 2011 में यहां से अमरीकी सैनिकों की रवानगी के बाद से ही प्रधानमंत्री नूरी अल मालीकी की शिया अगुआई वाली सरकार में शियाओं, सुन्नियों और कुर्दों ने राजीतिक स्थिति डावांडोल की हुई है। तुर्की से हाशिमी ने बयान दिया कि मालीकी विरोधी सुन्नियों के खिलाफ राजनीतिक दोषारोपण कर रहे हैं। ईराक में सुन्नी तानाशाह सद्दाम हुसैन के नेस्तोनाबूद होने के बाद और शिया बहुल सरकार के उभार के चलते सुन्नियों को लगता है उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया है।

ब्रूसेल्स में योग

पिछले रविवार (9 सितम्बर) को बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में भीनी-भीनी धूप में तीन हजार से ज्यादा नागरिकों ने सामूहिक योग प्रदर्शन में भाग लिया। एक के बाद एक योग व्यायाम करते हुए सब प्रसन्नचित्त दिख रहे थे। बेल्जियम में यूं भी भारतीय योग विद्या का बड़ा आदर देखने में आता है। जगह-जगह योग कक्षाएं चलती हैं और बड़ी संख्या में नौजवान लड़के-लड़कियां उनमें योग सीखते हैं। वहां लंबे समय से यह चलन रहा कि किसी तय रविवार के दिन सब सामूहिक योग-प्रदर्शन में भाग लेते हैं। इससे सेहत भी अच्छी रहती है और आपस में मिलना-मिलाना भी हो जाता है।   आलोक गोस्वामी


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