१९ मे २०१३
           
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हसीन सपने"

हसीन सपने

तारीख: 9/22/2012 3:17:41 PM

    

हसीन सपने

  नेताजी के हसीन सपने अंगड़ाई लेने लगे हैं। अब आप कहेंगे कि सत्ता के हसीन सपने देखना ही तो राजनेताओं का जीवन है, पर यहां बात एक खास नेताजी की हो रही है। देशवासी भले ही न जानते हों, पर उनके समर्थक उन्हें 'नेताजी' के संबोधन से ही जानते-बुलाते हैं। जी हां, बात समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की हो रही है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में, मायावती के जंगलराज से आजिज मतदाताओं ने विधानसभा चुनावों में सपा को साफ-साफ बहुमत क्या दे दिया, नेताजी दिन में भी सपने देखने लगे हैं। कभी कांग्रेस के वंशवाद और भ्रष्टाचार के विरोध की राजनीति करते थे, पर आजकल उस मामले में प्रतिस्पर्धा करते नजर आते हैं। अकेलेदम बहुमत मिला तो बेटे को उत्तर प्रदेश की बागडोर सौंप दिल्ली में संभावनाएं तलाशने लगे। उनका प्रधानमंत्री बनने का सपना पुराना है। उनका मानना है कि जब 16 सांसदों वाले जनता दल के देवगौड़ा प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो फिर वह क्यों नहीं? वैसे पिछली लोकसभा में सपा के 39 सांसद थे, जबकि इस बार 21 ही रह गये हैं। मुलायम का आकलन है कि अगले लोकसभा चुनाव में सपा की सीटें 40 के पार जा सकती हैं और त्रिशंकु संसद की स्थिति में वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं। इसीलिए कभी तृणमूल कांग्रेस से दोस्ती की कोशिश करते हैं तो कभी उसके धुर विरोधी वाम मोर्चा के साथ संसद में धरना देते हैं। मजे की बात यह है कि इन दोनों को ही वह दगा भी दे चुके हैं। अभी कोलकाता में सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के मौके पर उन्होंने अपने बेटे अखिलेश के जरिये ममता से गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश की। यह कोशिश कितनी कामयाब होगी, यह तो समय ही बतायेगा, लेकिन मुलायम की मुश्किल यह है कि छवि तो उनकी पहले से ही दागी है, अब विश्वसनीय भी नहीं रहे, ऐसे में अन्य दलों से समर्थन कैसे जुटायें, जबकि बिना अन्य दलों के समर्थन के बात बनेगी नहीं, पर हसीन सपने तो देखे ही जा      सकते हैं।

शिंदे का सच

बिजली संकट के अभूतपूर्व रिकॉर्ड के लिए ऊर्जा मंत्री से प्रोन्नति कर गृह मंत्री बनाये गये सुशील कुमार शिंदे अपनी नयी भूमिका में भी पुरानी आदतों से बाज नहीं आ रहे। सपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री जया बच्चन पर टिप्पणी के लिए संसद में माफी मांगने को मजबूर हुए शिंदे ने एक के बाद एक घोटाले से शर्मसार कांग्रेसियों की हौसला अफजाई करते हुए कह दिया कि जब लोग बोफर्स को भूल गये तो कोयला घोटाले को भी भूल जायेंगे। अब देश का गृह मंत्री आजादी के बाद के सबसे बड़े घोटाले पर ऐसा गैर जिम्मेदाराना बयान दे तो हंगामा तो मचेगा ही, मचा भी। सबने शिंदे की जम कर आलोचना की, लेकिन इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि अनजाने ही सही, वह कांग्रेस की मानसिकता को उजागर कर गये। कटु सत्य यही है कि कांग्रेस ने मान लिया है कि जनता की याद्दाश्त अल्पकालीन होती है, जैसे बोफर्स को भूल कर उसे फिर सत्ता सौंप दी, वैसे ही टू जी, राष्ट्रमंडल, आदर्श हाउसिंग और अब कोयला घोटाले को भी कभी-न-कभी भूल कर फिर कांग्रेस की बारी आ ही जायेगी। वैसे विपक्षी आलोचना पर टिप्पणी से मुकरते हुए भी शिंदे एक और कड़वा सच बयान कर गये। इस बार बोले, उन्होंने तो मजाक किया था। सच ही तो है, कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के साथ मजाक ही तो कर रही है लगातार। 

  मोदी की मार

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस की आंख की सबसे बड़ी किरकिरी बने हुए हैं। कांग्रेस जितना उनके बारे में दुष्प्रचार करती है, गुजरात के मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता उतनी ही बढ़ती जाती है। हर मोर्चे पर मात खाने के बावजूद कांग्रेस है कि सुधरने को तैयार नहीं। अब जबकि मोदी के प्रशाासनिक कौशल और राजनीतिक करिश्मे का लोहा अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी मानने लगा है, कांग्रेस की बौखलाहट बढ़ती ही जा रही है। इसी बौखलाहट में कांग्रेस बोल गयी कि मोदी तो एक राज्य के ही नेता हैं, जबकि उसके 'युवराज' राष्ट्रीय नेता हैं। मोदी ने जवाब में अपने गुजरात का नेता होने पर तो गर्व जताया ही, परिहासपूर्ण टिप्पणी में उन्होंने कांग्रेस को ऐसा जवाब भी दे दिया कि कांग्रेस बगलें झांकती नजर आ रही है।


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