हैवानियत का नाम पाकिस्तान
   दिनांक 10-अक्तूबर-2018
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में विश्व को पाकिस्तान की असलियत से परिचित कराया है। दुनिया के सामने उसके दोहरे चेहरे को बेनकाब किया है। भारतीय विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में संयुक्त राष्ट्र को आगाह किया कि अगर समय के साथ बदलाव को अंगीकार नहीं किया गया तो इसका हश्र भी लीग ऑफ नेशंस जैसा ही होगा
 
कहते हैं आक्रामक मुद्रा कई बार प्रासंगिक होती है और वातावरण में व्याप्त अर्द्ध-सत्य और झूठ के गुबार को न केवल नष्ट करने में सहायक सिद्ध होती है, बल्कि झूठ की खाद पर पल्लवित हो रहे देश और समाज को आईना भी दिखलाती है। पाकिस्तान के साथ अपने आरंभिक शांति प्रयासों की दुर्गति देख भारत सरकार ने इस पड़ोसी देश के प्रति अपने सिद्धान्त में आमूल-चूल बदलाव किया है। 'शठे शाठ्यम समाचरेत्' यानी शठ के साथ शठ जैसा ही व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि उसे सज्जनता की भाषा आती ही नहीं। पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में पिछले साल की तरह इस साल भी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सशक्त संबोधन से यह स्पष्ट होता है।
जिन्ना के पाकिस्तान के द्वि-राष्ट्र सिद्धान्त का मूल ही यह है कि हिन्दू-मुस्लिम एक साथ नहीं रह सकते। ऐसे में पाकिस्तान हिंदुस्थान के साथ कभी भी शांति स्थापित नहीं होने दे सकता ऐसा पाकिस्तान की सेना का भी मानना है। विदेशी मामलों और रक्षा से जुड़ी सामान्य सूचना की जानकारी रखने वाले व्यक्ति को भी यह बात पता थी कि जिस प्रकार पाकिस्तानी सेना ने न्यायाधीशों पर शिकंजा कस कर रिकॉर्ड समय में नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल कर जेल भेज दिया और आम चुनावों में इमरान खान को अपना मुखौटा बनाया, उससे पहली बार सेना को ऐसा कठपुतली प्रधानमंत्री मिला है, जिसका खास जनाधार नहीं है। इतना ही नहीं, वह कभी सेना के खिलाफ जाने की बात सोच भी नहीं सकता है। यही कारण है कि भारत सरकार इमरान खान को गंभीरतापूर्वक नहीं ले रही थी। चूंकि इमरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के नाते उनके वक्तव्यों पर शिष्टाचार प्रकट करने की मजबूरी भी भारत सरकार को निभानी थी। इसलिए न चाहते हुए भी भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने की उनकी मांग पर सहमति जतानी पड़ी। ऐसा हमेशा से होता आया है और इसके प्रमाण भी हैं। जब भी पाकिस्तान की नागरिक सरकार (सेना के इशारे पर चलने वाली) भारत के साथ बातचीत की पहल करती है, पाकिस्तानी सेना अवश्य ही भारत में किसी न किसी आतंकी घटना को अंजाम दिलवाती है, जिससे शांति-वार्ता का औचित्य ही समाप्त हो जाता है। इसके बाद वार्ता या तो भंग कर दी जाती है या पाकिस्तान द्वारा परिणामों का संज्ञान नहीं लिया जाता। वार्ता की विफलता का ठीकरा भी भारत के सिर फोड़ दिया जाता है। इस बार भी ठीक ऐसा ही हुआ। वार्ता पर भारतीय सहमति आते ही भारत-पाकिस्तान सीमा पर तीन भारतीय सैनिकों का अपहरण कर उनमें से एक को मार कर उसका शव क्षत-विक्षत कर दिया गया, जिसके चलते भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी शांति वार्ता में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया और बातचीत को स्थगित कर दिया गया।
किन्तु इस बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के दोगलेपन को उजागर करने का भी फैसला लिया। परिणाम यह रहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने न केवल आतंक को लेकर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को सभी राष्ट्रों के बीच रखा, बल्कि विश्व में आतंकवाद को न रोक पाने पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को भी सवालों के कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आतंकवाद के विषय में मूलभूत सुधारों के अभाव में संयुक्त राष्ट्र के अप्रासंगिक हो जाने का खतरा है। अगर यह विश्व निकाय अप्रभावी रहा तो बहुपक्षवाद खत्म हो जाएगा।
भारतीय विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में तत्काल सुधार की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा, ''मैं संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट और सकारात्मक भूमिका को रेखांकित करते हुए अपनी बात शुरू करती हूं, लेकिन मुझे यह अवश्य कहना होगा कि कदम दर कदम इस संस्था के महत्व, प्रभाव, सम्मान और मूल्यों में अवनति शुरू हो रही है।''
 
 संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र को संबोधित करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
इसके अलावा, सुषमा स्वराज ने आतंकियों के साथ पाकिस्तान के संबंधों पर भी जोरदार हमला किया और पाकिस्तान को भारत में जारी आतंकवाद के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराते हुए दुनिया के देशों को सावधान किया कि अगर उसकी आतंकी हरकतों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो पूरी दुनिया इसकी जकड़ में आ सकती है। उन्होंने भारत सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री इमरान खान के वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार करने और बाद में इससे इनकार करने की वजह भी बताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकियों का गुणगान करने वालों के साथ बातचीत नहीं की जा सकती। भारत हमेशा से पाकिस्तान से बातचीत करने के लिए तैयार रहता है। पूर्व की सरकारों ने भी उसके साथ बात की है। इस बार भी इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्यूयॉर्क में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत का प्रस्ताव रखा था। भारत ने इसे स्वीकार भी किया था। लेकिन उसके अगले दिन ही कश्मीर में आतंकियों ने तीन पुलिसकर्मियों को अगवा कर हत्या कर दी। ऐसे में बातचीत कैसे हो सकती है?
इससे पूर्व न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आरोप लगाया था कि घरेलू चुनाव और राजनीतिक वजहों से भारत बातचीत से इनकार कर रहा है। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद फैलाने के साथ आरोपों को नकारने में भी महारत हासिल कर चुका है। इस संदर्भ में 11 सितंबर, 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने लादेन को पाकिस्तान में ही पाकिस्तानी सैनिक छावनी में मार गिराया।
आतंक की परिभाषा तय करे संयुक्त राष्ट्र
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे आतंक की परिभाषा तय करने संबंधी प्रस्ताव को पारित करवाने में मदद करंे। भारत पिछले पांच वर्षों से यह आग्रह कर रहा है कि केवल आतंकियों के नाम की सूची जारी करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों को जिम्मेदार ठहराने संबंधी कठोर नियम भी बनाने होंगे। भारत ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में दिया हुआ है। उन्होंने कहा, ''एक तरफ हम आतंकवाद से लड़ना चाहते हैं, लेकिन दूसरी तरफ उसकी परिभाषा भी तय नहीं कर पा रहे हैं।''
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि (सीसीआईटी) के संबंध में एक मसौदा दस्तावेज का प्रस्ताव दिया था। लेकिन वह मसौदा आज तक मसौदा ही बना हुआ है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य इस मुद्दे पर एक साझा भाषा पर सहमत नहीं हो सके हैं। एक ओर हम आतंकवाद से लड़ना चाहते हैं, दूसरी ओर, हम इसे परिभाषित नहीं कर सकते। यही कारण है कि जिनके सिर पर इनाम घोषित है, उन्हें संयुक्त राष्ट्र के एक सदस्य देश द्वारा आजादी के नायक के रूप में पेश किया जाता है। उनका वित्त पोषण किया जाता है और सशस्त्र बनाया जाता है। विदेश मंत्री मुंबई आतंकवादी हमले के सरगना हाफिज सईद का जिक्र कर रही थीं जिसके बारे में ठोस सूचना पर अमेरिका ने एक करोड़ अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सिर पर इनाम और संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के बावजूद हाफिज सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है। रैलियों को संबोधित करता है और 2018 के आम चुनावों में हिस्सा लेता है। (दृष्टव्य है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के निर्देश पर एक मंत्री ने हाफिज सईद की सार्वजनिक रैली में भी हिस्सा लिया था।) सुषमा स्वराज ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र को यह अनिवार्य रूप से स्वीकार करना चाहिए कि उसे मूलभूत सुधार की जरूरत है। ऐसे समय जब बहुपक्षवाद को लेकर व्यापक बहस हो रही है, जिसके बारे में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने कहा था कि वह सबसे ज्यादा निशाने पर है जब उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत कभी भी बहुपक्षवाद के तंत्र को कमजोर नहीं होने देगा। उन्होंने आगे कहा कि यह बदलाव अभी से शुरू होने चाहिए नहीं तो बहुत देर हो जाएगी
विदेश मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की महत्ता और छवि धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है। लीग ऑफ नेशंस भी इसीलिए खत्म होने के कगार पर पहुंच गया था, क्योंकि उन्होंने समय के साथ बदलावों को नहीं अपनाया, हमें वहीं गलती नहीं दोहरानी है। पिछले पांच साल से हम लगातार इस मंच से इस बात पर बहस कर रहे हैं कि केवल आतंकी और उनके संरक्षकों को पहचानना काफी नहीं है बल्कि हमें अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनकी जवाबदेही भी तय करनी होगी।
पाक में आतंकियों का महिमामंडन
विदेश मंत्री ने पाकिस्तान सरकार की तरफ से बुरहान वानी जैसे कश्मीर के आतंकियों का महिमामंडन करने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकियों को 'स्वतंत्रता सेनानी' कहा जाता है और उन पर डाक टिकट जारी किए जाते हैं। भारत कई दशकों से आतंकवाद से पीडि़त है। दुर्भाग्य से आतंकवाद सीमा पार एक पड़ोसी देश से किया जा रहा है। पाकिस्तान में खुले घूम रहे 26/11 हमले के मास्टरमाइंड का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका पर हुए हमले का मास्टरमाइंड (लादेन) तो मारा गया लेकिन सईद अब तक खुला घूम रहा है और भारत को धमकियां भी देता है। सुषमा ने कहा कि आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं होने से 'क्रूरता और बर्बरता' को वीरता के रूप में विज्ञापित किया जाता है। उन्होंने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद को दुनिया के लिए सबसे बड़ी परेशानी बताया।
वसुधैव कुटुंबकम् बुनियाद है
उन्होंने भारतीय सिद्धांत वसुधैव कुटुंबकम् को रेखांकित करते हुए कहा कि इसकी बुनियाद है परिवार। परिवार प्यार से चलता है, व्यापार से नहीं। परिवार मोह से चलता है, लोभ से नहीं। परिवार संवेदना से चलता है, ईर्ष्या से नहीं। परिवार सुलह से चलता है, कलह से नहीं। इसीलिए हमें संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत पर चलाना होगा। सुषमा स्वराज ने कहा कि आतंकी मानवाधिकार का हनन करने वाले कौन हो सकते हैं। ये लोग मासूमों की जान लेते हैं और पाकिस्तान ऐसे आतंकवादियों पर डाक टिकटें जारी कर उन्हें महिमामंडित करता है जिनके सिर पर इनाम घोषित है।
पाकिस्तान के हास्यास्पद आरोप
उधर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हमले से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत की विपक्षी पार्टियों की तर्ज पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उसने मोदी सरकार की निंदा करने की कोशिश की।
भारत के विरोधी दलों और नक्सल समूहों, जिनमें अल्ट्रा-वाम दल शामिल हैं, का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में पाकिस्तानी राजनयिक साद वरिच ने यह भी कहा कि 'भारत में ईसाई-मुस्लिम अल्पसंख्यक असुरक्षित' हैं। साद ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी उछाला। पाकिस्तान ने कहा कि एक हिंदू अतिवादी भारत के सबसे बड़े राज्य में मुख्यमंत्री है और खुलेआम हिंदू श्रेष्ठता की बात करता है। इसके पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आरोप लगाया कि भारत इस्लामाबाद में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। और साल 2014 में पेशावर में हुए स्कूली हमले में भारत का हाथ था।
(लेखक विदेशी मामलों के विश्लेषक हैं)