''श्रद्धालुओं की भावनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती''
   दिनांक 10-अक्तूबर-2018

गत 3 अक्तूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के सबरीमला देवस्थानम पर हाल में आए निर्णय ने पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। यद्यपि हम भारत में ऐसे अनेक स्थानीय मंदिरों और परंपराओं का आदर करते हैं, जिनका अनुसरण सभी श्रद्धालु करते हैं। वहीं हमें इस निर्णय का भी सम्मान करना होगा। सबरीमला देवस्थानम का विषय स्थानीय मंदिर की परंपरा और आस्था से जुड़ा है, जिसके साथ महिलाओं सहित लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं संलग्न हैं। इस निर्णय पर विचार करते हुए श्रद्धालुओं की भावनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। दुर्भाग्य से, केरल सरकार ने न्यायालय के निर्णय को क्रियान्वित करते हुए श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखे बिना, तुरंत प्रभाव से कदम उठाए हैं। इस पर श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं में प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक ही है, जो कि इन परंपराओं का बलपूर्वक उल्लंघन किए जाने के विरुद्ध प्रदर्शन कर रही हैं। जहां सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सभी धार्मिक और सामाजिक नेताओं सहित समस्त पक्षकारों का आह्वान करता है कि वे सामूहिक रूप से इस विषय का गहन विश्लेषण कर, न्यायिक विकल्पों सहित सभी संभव प्रयास करें। इसके साथ ही उन्हें अपनी आस्था एवं परंपरा के अनुरूप उपासना के अधिकार को लेकर अपनी चिंता संबंधित अधिकारियों के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त करनी चाहिए।