बालकों को राष्ट्रभक्त,धर्मनिष्ठ बनाना विद्या भारती का लक्ष्य
   दिनांक 10-अक्तूबर-2018
  
 मंच पर उपस्थित श्री रंगाहरि (बाएं) एवं अन्य विशिष्टजन
गत दिनों चैन्नै में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की तीन दिवसीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में देशभर से 173 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की प्रस्तावना में अ.भा.संगठन मंत्री श्री जे.एम.काशीपति ने आगामी तीन वर्ष की योजना की निर्मिति एवं संगठनात्मक रचना के विस्तार और सुदृढ़ता के लिए नए-नए कार्यकर्ताओं के विकास पर बल दिया। इसी प्रकार बदलते राष्ट्रीय परिदृश्य व वनवासी क्षेत्रों की बदलती स्थिति, वनवासी आन्दोलन, पृथकतावाद, राजनीतिक परिदृश्य, विघटनकारी नक्सलवाद, शहरी माओवाद, चर्च की गतिविधियां, सांस्कृतिक क्षेत्र में क्षरण से भोगवाद, जल संरक्षण आदि विभिन्न मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा हुई। बैठक में विद्या भारती के विभिन्न आयामों-शिशु वाटिका, जनजाति क्षेत्र की शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, बालिका शिक्षा आदि पर विभिन्न सत्रों में विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर डॉ. गोविंद प्रसाद ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। उन्होंने विद्या भारती के उत्तम परीक्षा परिणाम, शिक्षणेत्तर गतिविधि, खेल आदि में लंबी छलांग और शिक्षा नीति की निर्मिति में विद्या भारतीय के योगदान की चर्चा की। कार्यकारिणी में रा.स्व.संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री रंगाहरि भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विद्या भारती संपूर्ण भारत ही नहीं, संसार का सबसे बड़ा शिक्षा का आन्दोलन है। यहां मूल ढांचागत सुविधाएं उत्तम श्रेणी की हों, यह आवश्यक है। लेकिन संस्कार भी उतने ही आवश्यक है। इसके लिए आचार्य और आचार्या, माता-पिता का प्रबोधन उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती का लक्ष्य है बालकों को राष्ट्रभक्त, धर्मनिष्ठ, समाजनिष्ठ बनाना और यह कार्य पूरी निष्ठा के साथ किया जा रहा है।