भारतीय समाज कार्य दिवस’ के रूप में मनाया गया नानाजी देशमुख का जन्म दिवस
   दिनांक 12-अक्तूबर-2018
 
 कार्यक्रम को संबोधित करते एकात्म मानवदर्शन के अध्येता डॉ. महेश चन्द्र शर्मा, मंच पर विराजमान दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव अतुल जैन और डॉ. बिष्णुमोहन दास
समाज कार्य के शिक्षण, प्रशिक्षण और व्यवसाय से जुड़े लोगों ने प्रख्यात समाज सेवी नानाजी देशमुख के जन्म दिवस 11 अक्टूबर को ‘भारतीय समाज कार्य दिवस (Indian Social Work Day) के रूप में रूप में मनाया. दिल्ली सहित भारत के कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों जैसे बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, असम केंद्रीय विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, इंदौर स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क, भारतीय विद्यापीठ, पुणे, तुमकुर विश्वविद्यालय, कर्नाटक और पंजाबी विश्वविद्यालय आदि प्रमुख हैं। भारत में पहली बार ‘भारतीय समाज कार्य दिवस’ मनाया गया है जिसका प्रस्ताव महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में अप्रैल 2018 में समाज कार्य से जुड़े कई विश्वविद्यालयों के शिक्षकों (प्रोफेसर), कुलपतियों और व्यवसायियों द्वारा स्वीकार किया गया था।
इस अवसर पर दिल्ली के करोलबाग स्थित ‘दीनदयाल शोध संस्थान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली समाज कार्य संस्थान (Delhi School of Social Work), दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ. भीम राव अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, इग्नू (IGNOU) के समाज कार्य विभाग के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और व्यवसायी उपस्थित हुए। डॉ. भीम राव अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बिष्णु मोहन दास ने ‘भारतीय समाज कार्य दिवस’ के महत्व को रेखांकित किया. “नानाजी के नवीन और नवोन्मेषी विचारों और समाज कार्य के प्रयोगों को समाज कार्य के विद्यार्थियों के शिक्षण प्रशिक्षण में प्रतिमान के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। भारतीय समाज कार्य दिवस हमें समाज कार्य के क्षेत्र में नानाजी देशमुख के योगदान को याद दिलाता है साथ ही यह भी स्मरण करवाता है कि भारत में समाज कार्य का एक प्रोफेशनल दृष्टिकोण विकसित करने में उनकी बहुत बड़ी भूमिका है।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए एकात्म मानवदर्शन के अध्येता डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि समस्या तब शुरू होती है जब कुछ लोग भारतीय अवधारणाओं को अंग्रेजी में अनुवाद करके समझने और समझाने का प्रयास करते हैं – जैसे समाज की अवधारणा को सोसाइटी से नहीं समझा जा सकता. “जब आप सोसाइटी को समझते हैं तो पश्चिमी विद्वानों की परिभाषाओं से समझते हैं फिर उसका हिंदी अनुवाद करते हैं जो कि समाज के समतुल्य नहीं हो पाता श्री शर्मा वर्तमान में एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान प्रतिष्ठान के अध्यक्ष हैं. दीनदयाल शोध संस्थान के निदेशक श्री अतुल जैन ने युवा छात्रों का मौलिक शोध हेतु आह्वान किया। 
नानाजी देशमुख ने  शिक्षा, स्वास्थ्य, और आत्म निर्भरता परक ग्रामीण विकास पर विशेष कार्य किया, उन्होंने अपने ग्रामीण विकास के मॉडल से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 500 से ज्यादा गांवों का भाग्य बदल दिया। वो तकनीक के प्रयोग के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने बांस की सहायता से ईको फ्रेंडली टेक्नोलॉजी से 2700 से अधिक ट्यूब वेल बनवाए। उन्होंने अपने ग्रामीण विकास के मॉडल को एक वैज्ञानिक और अकादमिक आधार दिया और चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना की। सन 1999 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।