श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए रास्ता तलाशे सरकार
   दिनांक 16-अक्तूबर-2018
 
  बैठक को संबोधित करते श्री रामविलास वेदांती। मंच पर उपस्थित (दाएं से) स्वामी श्री वासुदेवानंद सरस्वती, महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज एवं अन्य संतजन
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर जारी चर्चाओं के बीच गत दिनों नई दिल्ली स्थिति विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय कार्यालय,आर.के. पुरम में संतों की उच्चाधिकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संतों ने सरकार को 31 जनवरी तक राम मंदिर निर्माण के लिए रास्ता तलाशने का समय दिया है। साथ ही यह भी तय किया गया कि अगर सरकार तय समय तक कोई निर्णय नहीं लेती तो नवंबर माह में सभी सांसदों से मिलकर राममंदिर निर्माण के मुद्दे को संसद में उठाने के लिए भी दबाव बनाएंगे। बैठक के दौरान विश्व हिन्दू परिषद ने मंदिर पर एक प्रस्ताव भी पास किया, जिसमें बहु-प्रतीक्षित राम मंदिर के निर्माण के लिए एक बिल लाने की मांग की गई। इस अवसर पर स्वामी परमानंद महाराज ने कहा कि बिल आने पर ही मालूम चलेगा कि असली राम भक्त कौन है। डॉ़ राम विलास वेदांती, चिदानंद पुरी (केरल), स्वामी चिन्मयानंद व स्वामी अखिलेश्वरानन्द सहित देशभर से आए गुरुओं, महामंडलेश्वरों व अन्य धर्माचार्यों ने भी कानून बनाने की मांग का समर्थन किया है। सन्तों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें मन्दिर निर्माण के लिए कानून की मांग के अतिरिक्त एक विशाल जन जागरण अभियान की भी घोषणा की गई। इस अभियान के तहत अक्टूबर माह में राज्यश: स्थानीय राम भक्तों का प्रतिनिधिमंडल सभी राज्यों के राज्यपालों से मिल कर यह अनुरोध करेगा कि वे राम जन्मभूमि पर मंदिर के लिए संसदीय कानून बनाने की उनकी मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाएं। नवम्बर माह में सभी संसदीय क्षेत्रों में विशाल जन सभाएं होंगी। वहां की जनता संतों के नेतृत्व में अपने सांसदों से मिलेगी और उनसे संसद में कानून बनाकर राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह करेगी। इसके अलावा 18 दिसंबर (गीता जयंती) से 26 दिसम्बर तक भारत के प्रत्येक पूजा स्थान, मठ मंदिर, गुरुद्वारा व घरों में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के लिए स्थानीय परम्परा के अनुसार अनुष्ठान होंगे।