‘‘वेद में निहित ज्ञान ही है हमारी असली धरोहर’’
   दिनांक 16-अक्तूबर-2018
 
डॉ़ चन्द्रकांत राजू को सम्मानित करते डॉ. सत्यपाल सिंह एवं पद्मश्री ब्रह्मदेव शर्मा ‘भाईजी’। मंच पर (बाएं से) श्री सुमित अवस्थी, पद्मश्री जवाहरलाल कौल एवं अन्य विशिष्टजन  
‘‘प्राचीन ज्ञान-विज्ञान ही भारत की असली धरोहर है। मैकाले की शिक्षा और स्वाधीनता के बाद उसकी अंधी नकल ने हमसे हमारे वेदों को दूर कर दिया है। इसलिए कभी विश्वगुरु रहने वाला हमारा देश आज केवल पश्चिमी देशों की नकल ही करता है।’’ उक्त बात केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ़ सत्यपाल सिंह ने कही। वे गत 7 अक्तूबर को नई दिल्ली के सीरी फोर्ट सभागार में आयोजित भारतीय धरोहर के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि भारतीय धरोहर ने इस वर्ष से प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित व्यक्ति अथवा संस्था को भारतीय धरोहर सम्मान देना प्रारम्भ किया है। इसके तहत व्यक्ति अथवा संस्था को एक मानपत्र और एक लाख रुपये की राशि भेंट की जाती है। इस वर्ष यह सम्मान प्रसिद्घ गणितज्ञ एवं विज्ञानी डॉ़ चन्द्रकांत राजू को दिया गया। डॉ़ राजू ने भारतीय गणित की दो विधाओं, शूल्ब सूत्रों पर आधारित रज्जू गणित और आर्यभट के कैल्कुलस को विकसित किया है और उसका पाठ्यक्रम तथा पुस्तक दोनों ही तैयार की हैं। वे इन दोनों विषयों को देश-विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों में पढ़ाते भी हैं। भारतीय धरोहर के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए भारतीय धरोहर के महामंत्री विजय शंकर तिवारी ने कहा कि देश और दुनिया की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो सकता है यदि समाज और शासन भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान पर शोध और विमर्श हेतु समुचित निवेश करे। उन्होंने शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में प्रति परामर्श और श्रेष्ठ संतान जैसे विषयों पर ओपीडी आरम्भ किए जाने की मांग की।