पुलिस स्मारक के उद्घाटन पर शहीदों को याद कर भावुक हुए मोदी
   दिनांक 22-अक्तूबर-2018
पुलिस स्मारक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को स्वतंत्रता के बाद से पुलिस जवानों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में पुलिस जवानों के कार्य, शहादत और उनके त्याग को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस के जवानों की कर्तव्यनिष्ठा को देखकर प्रसन्न्ता होती है, मन में गर्व का भाव पैदा होता है
चाणक्यपुरी में 30 फीट ऊंचा यह एकल पाषाण-स्तंभ देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस बल और केंद्रीय पुलिस संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्मारक का निर्माण शांतिपथ के उत्तरी छोर पर चाणक्यपुरी में 6.12 एकड़ भूमि पर किया गया है। 1959 में चीनी सैनिकों द्वारा लद्धाख में हॉट स्प्रिंग्स में मारे गए पुलिस जवानों की याद में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस दिवस मनाया जाता है।
 इस मौके पर प्रधानमंत्री जवानों की शहादत याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, 'देश की सुरक्षा में समर्पित प्रत्येक व्यक्ति को, यहां उपस्थित शहीदों के परिवारों को मैं पुलिस स्मृति दिवस पर नमन करता हूं। आज का ये दिन आप सभी की सेवा के साथ-साथ, आपके शौर्य और उस सर्वोच्च बलिदान को याद करने का है, जो हमारी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की परिपाटी रही है। ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे राष्ट्र सेवा और समर्पण की अमर गाथा के प्रतीक, राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है।' मोदी ने कहा कि आज मुझे राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल पर गर्व है, लेकिन कुछ सवाल भी हैं। आखिर इस मेमोरियल को अस्तित्व में आने में आजादी के 70 वर्ष क्यों लग गए। मैं मानता हूं कि कानूनी वजहों से कुछ वर्ष काम रुका, लेकिन पहले की सरकार की इच्छा होती, उसने दिल से प्रयास किया होता, तो ये मेमोरियल कई वर्ष पहले ही बन गया होता। गृह मंत्री राजनाथ सिंह, गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू और वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।  
1947 से अभी तक 34,844 पुलिस जवान शहीद हो चुके हैं जिनमें 424 पुलिस जवानों ने इसी वर्ष अपनी शहादत दी है। इनमें से कई बहादुर जवानों ने कश्मीर, पंजाब, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए जान गवाई हैं। स्वतंत्रता के पश्चात् लगभग 34844 शहीद पुलिसकर्मियों को समर्पित यह स्मारक अलग शौर्य गाथा कहता है। इस स्मारक के वास्तुकार और निर्माता श्री अद्वैत गडनायक जी हैं। अद्वैत जी नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट के प्रमुख भी हैं। सामान्य दिखने वाला यह स्मारक वास्तव में साधारण बिल्कुल नहीं है। खम्माम, तेलंगाना में ग्रेनाइट के पहाड़ को काटकर इस स्मारक को दिल्ली लाया गया। 30×8×8 फुट के इस ग्रेनाइट को सिर्फ पहाड़ से काटने में 4 महीने लगे। बाकी समय इसे तराशने में लगा।अद्वैत बताते हैं कि इस स्मारक को उन्होंने पुलिसकर्मियों के शौर्य, तप और लगन के साथ साथ पंचतत्व और ईश्वर से भी बंधा है। इसका वजन 238 टन है। इसका वजन और गहरा रंग सर्वोच्च बलिदान की गंभीरता का प्रतीक है। यह एकल पाषाण-स्तंभ देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस बल और केंद्रीय पुलिस संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है।