पुलिस के शौर्य, सम्मान और सेवा का प्रतीक है यह स्मारक
   दिनांक 29-अक्तूबर-2018
दिल्ली के चाणक्यपुरी में शांतिपथ के उत्तरी छोर पर 6.12 एकड़ में बने पुलिस स्मारक को जब देखते हैं तो गेट से ही गहरे काले रंग का एक शिलाखंड नजर आता है। इस स्मारक का गहरा रंग गंभीरता, दृढ़ता और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है
 दिल्ली के चाणक्य पुरी में बनाया गया है राष्ट्रीय पुलिस स्मारक
पत्थर कठोर होता है, ग्रेनाइट तो और भी कठोर होता है। ऐसे ही पुलिसकर्मी भी कठोर दिखता है। उस पर थोड़ा कड़क पुलिसकर्मी तो और भी कठोर दिखाई देता है। चेहरे पर कठोरता या कहें, दृढ़ता उसके व्यक्तित्व की पहचान है, लेकिन जब पत्थर को तराश कर एक स्वरूप दिया जाता है तो वह नरम हो जाता है। पत्थर सब कुछ सुनता है, सब कुछ देखता है। कब क्या हुआ, क्यों हुआ, यह पत्थर से बेहतर कोई नहीं जानता। राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी में शांतिपथ के उत्तरी छोर पर 6.12 एकड़ में बने पुलिस स्मारक को जब देखते हैं तो गेट से ही गहरे काले रंग का एक शिलाखंड नजर आता है। जैसे-जैसे नजदीक जाते हैं, शिलाखंड की आकृति स्पष्ट होती जाती है। शिलाखंड की एक तरफ बहता हुआ पानी दिखता है जो जीवन का प्रतीक है जबकि दूसरी तरफ गीता का श्लोक लिखा है-
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक:।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत:।।
अर्थात् आत्मा को न शस्त्र काट सकता है, न अग्नि जला सकती है, न वायु सुखा सकती है। इस श्लोक के ऊपर पुलिसकर्मी की बंदूक और उसकी टोपी की आकृति उकेरी गई है। सब कुछ बड़ा सामान्य सा लगता है लेकिन यह स्मारक कोई साधारण स्मारक नहीं है। इसके पीछे एक सोच है, भावना है, आधार है। स्मारक के वास्तुकार और निर्माता राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के महानिदेशक अद्वैत गणनायक बताते हैं, ''तेलंगाना में ग्रेनाइट के पहाड़ को काटकर एक शिलाखंड दिल्ली लाया। इस शिलाखंड को काटने में चार महीने लगे।'' वे आगे बताते हैं, ''इस स्मारक को पुलिसकर्मियों के शौर्य, तप और लगन के साथ-साथ पंचतत्व और ईश्वर से भी बांधा है। इसका वजन, गहरा रंग गंभीरता, दृढ़ता और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। यह एकल पाषाण-स्तंभ देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस बल और केंद्रीय पुलिस संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। निकट ही एक संग्रहालय भी बनाया गया है, जिसमें देश की पुलिस का इतिहास दर्ज है। 1600 वर्गमीटर में बने इस संग्रहालय में पांच दीर्घाएं हैं, जवानों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले हथियार संग्रहालय में रखे गए हैं। विभिन्न पुलिसबलों पर जारी हुए ऐतिहासिक डाक टिकटों को भी संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।
इसलिए मनाते हैं राष्ट्रीय पुलिस दिवस
पुलिस दिवस क्यों मनाया जाता है, इसके लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। भारत और तिब्बत के बीच करीब 2500 मील लंबी सीमा रेखा है। 20 अक्तूबर, 1959 की बात है। उत्तर पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग नाम की जगह पर केंद्रीय पुलिस बल की तीन टुकडि़यां सुरक्षा के लिए तैनात थीं। गश्त पर निकली पुलिसकर्मियों की दो टुकडि़यां तो 20 अक्तूूबर की दोपहर तक लौट आईं, लेकिन तीसरी टुकड़ी में शामिल दो जवान और एक कुली नहीं लौटे। तीनों की तलाश के लिए एक नई टुकड़ी बनाई गई। 21 अक्तूबर सुबह यह टुकड़ी उनकी तलाश में निकली। इस टुकड़ी में 20 जवान थे। टुकड़ी गश्त पर थी कि अचानक चीन के सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में पुलिस के 10 जवान शहीद हुए, जबकि सात जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद चीनी सैनिक शहीद जवानों को अपने साथ लेकर चले गए। बाद में 13 नवंबर, 1959 को शहीद जवानों के शवों को चीनी सैनिकों ने भारत को वापस लौटा दिया। इसके बाद इन सैनिकों का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद जनवरी, 1960 में जब पूरे देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों का सम्मेलन हुआ तो तय किया गया कि हर बरस 21 अक्तूबर को राष्ट्रीय पुलिस दिवस मनाया जाएगा। यह भी तय किया गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से पुलिस के जवान हॉट स्प्रग्सिं की यात्रा करेंगे और शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो प्रस्ताव पारित किया गया कि अपनी कर्तव्य वेदी पर बलिदान होने वाले सभी पुलिसकर्मियों को सम्मान देने के लिए एक पुलिस स्मारक बनाया जाएगा। 2002 में ही तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इसकी आधारशिला रखी लेकिन स्मारक का काम रुका रहा। अब गत 21 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मारक का उद्घाटन कर पुलिसकर्मियों के शौर्य, तप, उनकी कर्तव्यपरायणता और बलिदान को दर्शाता राष्ट्रीय पुलिस स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया।
 
 कर्तव्यवेदी पर बलिदान हुए पुलिस के वीर जवानों को नमन करते मोदी
राष्ट्र को समर्पित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक
21 अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरान मोदी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे राष्ट्र सेवा और समर्पण की अमर गाथा के प्रतीक,राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है।
देश के आजाद होने के बाद से आज तक अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए कुल 34,844 पुलिस जवान शहीद हो चुके हैं। ये जवान कश्मीर, पंजाब, असम, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम जैसे क्षेत्रों के नक्सलियों और आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हुए। 21 अक्तूबर को राष्ट्रीय पुलिस दिवस मनाया जाता है। दरअसल 21 अक्तूबर, 1959 को चीन से सटी सीमा की सुरक्षा करते हुए 10 पुलिसवाले शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में हर साल 21 अक्तूबर को राष्ट्रीय पुलिस दिवस मनाया जाता है। इसलिए स्मारक का उद्घाटन करने के लिए 21 अक्तूबर का दिन तय किया गया।
क्या है खास
*   आजादी के बाद से अभी तक शहीद हुए 34,844 पुलिसकर्मियों के नाम स्मारक पर उकेरे गए हैं
*   250 टन वजनी शिलाखंड को तराशकर बनाया गया है स्मारक
*   चार महीने लगे इस शिलाखंड को ग्रेनाइट के पहाड़ से काटने में
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पंचतत्वों को ध्यान में रखकर किया गया है स्मारक का निर्माण