'मालवीय जैसे व्यक्तित्वों के कारण ही आज तक बची है भारतीय सभ्यता'
   दिनांक 04-अक्तूबर-2018

 
मदन मोहन मालवीय एक दूरदृष्टा थे। जब देश स्वतंत्र हो रहा था तब उनके मन में भावी भारत का स्पष्ट चित्र था, जिसमें भारत की पहचान और राष्ट्रीयता प्रमुख थी। उनका हर कदम भावी भारत के बारे में एक दृष्टिकोण रखकर चलने वाला होता था। उन्होंने न केवल राजनीति और पत्रकारिता बल्कि सामाजिक सुधारों में भी अपनी छाप छोड़ी। वह एक गाइड और दर्शानिक थे। उनके अपने विचार थे लेकिन उन्होंने अपने विचार किसी पर थोपे नहीं। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने राष्ट्रीय संग्रहालय में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सचिव बाल मुकुंद पांडेय की ओर से लिखित 'महामना मदन मोहन मालवीयः व्यक्तित्व एवं विचार' पुस्तक के लोकार्पण अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि जन्म से कोई ब्राह्मण या शूद्र नहीं होता है, बल्कि वह अपने कर्मों से होता है। महाभारत में इसका तीन जगह उल्लेख है कि कर्म और गुणों से रहित ब्राह्माण को शूद्र से भी कम माना गया है, जबकि कर्म और गुण से युक्त शूद्र भी ब्राह्मण जैसा है। श्री भागवत ने महामना को राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि हजारों साल गुलामी के बाद भी आज भारत, हिंदू और हिंदुस्थान है तो इन जैसे संतों के कारण है जिन्होंने अपने जीवन और कृतित्व से लोगों को प्रेरणा देते हुए निःस्वार्थ भाव से अपना कर्म किया। ऐसे प्रेरणादायी जीवन को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।
हमारे राष्ट्र के निर्माण में जैसा विवेकानंद व आंबेडकर जैसे राष्ट्र निर्माताओं का स्थान है, वही स्थान मालवीय जी का भी है। उनकी सक्रियता में शिक्षा, समाज सुधार, राजनीतिक व धर्म नीति के साथ सभी आयाम थे। संघ संस्थापक सर संघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से महामना के मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार वह नागपुर की शाखा में आए और हेडगेवार से कहा कि आप का काम अच्छा है, कितना धन चाहिए। तब हेडगेवार ने कहा कि धन नहीं, बल्कि आप चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र ऐसी सभ्यता है जो विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों के बावजूद बचा रहा है जबकि अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में सब कुछ नष्ट हो गया। सनातन धर्म शाश्वत है और कुछ अगर शाश्वत है तो वह हिन्दुत्व है। मालवीय जैसे व्यक्तित्वों की वजह से ही भारतीय सभ्यता विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों के बावजूद बची रही है। देश को अब भी मालवीय जैसे व्यक्तित्व की जरूरत है। विमोचन कार्यक्रम में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. सतीश चंद्र मित्तल, राष्ट्रीय पुस्तक न्याय के अध्यक्ष डॉ. बलदेव भाई शर्मा व राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. बी आर मणि समेत अन्य विशिष्ट लोग उपस्थित रहे।