प्रक्षेपण के बाद भारत का मंगलयान कर रहा कमाल
   दिनांक 06-अक्तूबर-2018
दुनिया तकनीक पर चलती है. भारत ने अपनी तकनीक का लोहा पूरे विश्व में मनवाया है. 4 साल पहले भारत ने सबसे कम खर्च में जब मंगल ग्रह पर मंगल यान भेजा था तो पूरे विश्व में भारत का डंका बजा था. आज भी ऐसा ही है. मंगल यान में लगे उपकरणों की मियाद सिर्फ 6 महीने आंकी गई थी लेकिन 4 साल बाद भी मंगल यान पूरी तरह से काम कर रहा है. यही नहीं वहां से भेजी गई रिपोर्ट को नासा हमसे लेकर शोध कर रहा है. ये हमारे लिए गर्व की बात है.
5 नवम्बर 2013 को प्रक्षेपण और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के बाद आज लगभग 4 साल बाद भी भारत का ऐतिहासिक मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) यानी मंगलयान अच्छी तरह से काम कर रहा है और मिशन से जुडी हुई जरुरी तस्वीरें इसरो और नासा के साथ साझा कर रहा है । फिलहाल मंगलयान की कक्षा में कुछ सुधार किया जाएगा ताकि यह कई वर्षों तक काम करता रहे। इसरों से जुड़े सूत्रों के अनुसार मंगलयान की कक्षा में सुधार के जरिये उसकी बैटरी की जिंदगी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। यह इसलिए भी जरूरी है कि लंबे ग्रहण के दौरान भी मंगलयान को ऊर्जा मिलती रहे। कक्षा में सुधार नहीं किया गया तो यह निस्तेज हो सकता है क्योंकि लंबे ग्रहण के दौरान बैटरी इसका साथ छोड़ सकती है। कक्षा में सुधार होने से बैटरी पर ग्रहण का असर आधा रह जाएगा, जिससे सेटेलाइट कई वर्षों तक काम करता रह सकता है। इसकी वजह से हमें मंगल ग्रह से जुड़ी गतिविधियों का अध्ययन करने में और समय मिल जाएगा।
भारत का प्रथम मंगल अभियान
मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है और यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसऍलवी) सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इसके साथ ही भारत भी अब उन देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने मंगल पर अपने यान भेजे हैं। वैसे अब तक मंगल को जानने के लिये शुरू किये गये दो तिहाई अभियान असफल भी रहे हैं परन्तु 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुँचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश तथा सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया है। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है। भारत एशिया का भी ऐसा करने वाला प्रथम पहला देश बन गया। क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे। प्रतिष्ठित 'टाइम' पत्रिका ने मंगलयान को 2014 के सर्वश्रेष्ठ आविष्कारों में शामिल किया था . 19 अप्रैल 1975 में स्वदेश निर्मित उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ के प्रक्षेपण के साथ अपने अंतरिक्ष सफर की शुरूआत करने वाले इसरो की यह सफलता भारत की अंतरिक्ष में बढ़ते वर्चस्व की तरफ इशारा करती है । ये सफलता इसलिए खास है क्योंकि भारतीय प्रक्षेपण राकेटों की विकास लागत ऐसे ही विदेशी प्रक्षेपण राकेटों की विकास लागत का एक-तिहाई है ।
मंगल अभियान ,कब क्या हुआ
मिशन की शुरुआत हुई 5 नवंबर 2013 को जब श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रॉकेट ने उड़ान भरी और 44 मिनट बाद रॉकेट से अलग हो कर उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में आ गया.
7 नवंबर 2013 को मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की पहली कोशिश सफल रही.
8 नवंबर 2013 को मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की दूसरी कोशिश सफल रही.
9 नवंबर 2013 को मंगलयान की एक और कक्षा सफलतापूर्वक बढ़ाई गई.
11 नवंबर 2013मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की चौथी सफल कोशिश.
12 नवंबर 2013 मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की पांचवीं कोशिश सफल रही.
16 नवंबर 2013 मंगलयान को आखिरी बार कक्षा बढ़ाई गई.
1 दिसंबर 2013 को मंगलयान ने सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी और मंगल की तरफ बढ़ चला.
4 दिसंबर 2013 को मंगलयान पृथ्वी के 9.25 लाख किलोमीटर घेरे के प्रभावक्षेत्र से बाहर निकल गया.
11 दिसंबर 2013को अंतरिक्षयान में पहले सुधार किए गए.
22 सितंबर 2014 को मंगलयान अपने अंतिम चरण में पहुंच गया. मंगलयान ने मंगल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर लिया.
24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के साथ ही मंगलयान भारत के लिए ऐतिहासिक पल लेकर आया. इसके साथ ही भारत पहली ही बार में मंगल मिशन में सफलता हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया.
 
अब क्या कर रहा है मंगल यान
मंगल पर मीथेन गैस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए भेजा गया मंगलयान रिटायरमेंट के बाद भी कमाई कर रहा है। वैसे तो इसके छह माह ही काम करने की उम्मीद थी, लेकिन चार साल बाद भी इसकी भेजी तस्वीरों को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा खरीद रहा है। इनके जरिए नासा मंगल पर मीथेन की मौजूदगी को लेकर जल्द किसी नतीजे पर पहुंच सकता है। 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने बताया कि करार के तहत नासा मंगलयान की तस्वीरें ले रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी इन तस्वीरों एवं आंकड़ों का इस्तेमाल शोध कार्य में कर रही है। इसरो वैज्ञानिक भी इस कार्य में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि मंगलयान में लगे सभी पांच उपकरण अच्छी तरह काम कर रहे हैं। 
इसरो के वरिष्ठ अधिकारी आर. उमा महेश्वरन ने भी तस्वीरें साझा करने की पुष्टि की। हालांकि इससे होने वाली आय पर उन्होंने टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा, इसरो समेत कई महकमों के वैज्ञानिक मंगलयान के आंकड़ों पर शोध पत्र तैयार कर रहे हैं। नासा भी इसी आधार पर शोध पत्र तैयार कर सकता है। हाल में नासा ने चंद्रयान में लगे उपकरण की तस्वीरों के आधार पर चंद्रमा पर बर्फ होने का दावा किया था। चंद्रयान में नासा ने मून मिनरोलॉजी मैपर लगाया था जबकि मंगलयान में उसका कोई उपकरण नहीं है। मंगलयान में लगे सभी पांचों उपकरण इसरो के हैं जो सीधे हसन स्थित मुख्य नियंत्रण कक्ष से जुड़े हैं। इसरो के अनुसार, मंगलयान अभी अगले तीन-चार साल तक काम करता रहेगा। 
पिछले कई सालों से यह जानने की कोशिशें चलती रही हैं कि पृथ्वी के बाहर जीवन है या नहीं । इस दौरान कई खोजों से ये अंदेशा हुआ कि शायद मंगल ग्रह पर जीवन है । लाल ग्रह यानी मंगल पर जीवन की संभावनाओं को लेकर वैज्ञानिकों ही नहीं, आम आदमी की भी उत्सुकता लंबे अरसे से रही है । पृथ्वी से लाल रंग के दिखाई देने वाले ग्रह पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। आखिर मंगल की सच्चाई क्या है? ऐसे कई सारे सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशने के लिए दूसरे देशों के कई अभियान मंगल ग्रह पर भेजे भी गये । जिनमें लगभग एक तिहाई सफल रहें बाकी असफल रहें लेकिन इस बार लेकिन भारत का मार्स आर्बिटर मिशन अपने पहले ही मंगल अभियान पर सफल रहा . भारत के इस मिशन की लागत 450 करोड़ रुपए है जो कि अमेरिका के मंगल मिशन से 10 गुना कम है। 
यान के साथ 15 किलो का पेलोड भेजा गया है इनमें कैमरे और सेंसर जैसे उपकरण शामिल हैं, जो मंगल के वायुमंडल और उसकी दूसरी विशिष्टताओं का अध्ययन करके तस्वीरें भेजतें रहें हैं । मंगलयान का मुख्य फोकस संभावित जीवन, ग्रह की उत्पत्ति, भौगोलिक संरचनाओं और जलवायु आदि पर रहा । मंगल की कक्षा में स्थापित हो जाने के बाद मंगलयान ने इसके वायुमंडल, खनिजों और संरचना से जुडी तस्वीरें भेजीं है । मंगलयान में पांच अहम उपकरण मौजूद हैं जो मंगल ग्रह के बारे में अहम जानकारियां जुटाने का काम कर रहें हैं । इन उपकरणों में मंगल के वायुमंडल में जीवन की निशानी और मीथेन गैस का पता लगाने वाले सेंसर, एक रंगीन कैमरा और ग्रह की सतह और खनिज संपदा का पता लगाने वाला थर्मल इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर जैसे उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा मंगल के ऊपरी वायुमंडल में ड्यूटेरियम एवं हाइड्रोजन कणों की मौजूदगी, वायुमंडल की प्राकृतिक संरचना और खनिजों की जांच के लिए भी उपकरण भेजे गए थे। 
(लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डिप्टी डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं)