विधानसभा चुनाव/छत्तीसगढ़: भाजपा राज में नक्सलियों का खौफ नहीं, खूब हुआ मतदान
   दिनांक 20-नवंबर-2018
नक्सलियों की धमकी के बावजूद मतदाताओं की लंबी कतार और बढ़ा मत प्रतिशत तो कम से कम यही दर्शा रहा है कि वनवासियों के मन में अब नक्सलियों का खौफ नहीं रहा
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में इस बार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान अलग ही दृश्य दिखा। वास्तव में यह बदलाव की बानगी है, जो आने वाले समय की ओर इशारा करती है। नक्सलियों के विरुद्ध उनके गढ़ में ही वनवासियों ने शंखनाद कर दिया है।
नक्सलियों की धमकी के बावजूद मतदाताओं की लंबी कतार और बढ़ा मत प्रतिशत तो कम से कम यही दर्शा रहा है कि वनवासियों के मन में अब नक्सलियों का खौफ नहीं रहा। हमेशा की तरह इस बार भी नक्सलियों ने घोषणा की थी कि जो भी मतदान करेगा, उसकी अंगुलियां काट दी जाएंगी। लेकिन नक्सलियों की धमकी के इतर बड़ी संख्या में लोग पांच से दस किलोमीटर तक चल कर आए और मतदान किया।
पहले चरण में 76 प्रतिशत मतदान
पहले चरण में 18 सीटों के लिए हुए मतदान में 76 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दूसरे और अंतिम चरण में 78 सीटों के लिए मतदान होना है। पहले चरण में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उनके दो मंत्री केदार कश्यप और महेश गागड़ा, पूर्व मंत्री लता उसेंडी समेत कुछ बड़े नाम चुनाव मैदान में थे, जबकि दूसरे चरण में विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, अन्य मंत्री, संसदीय सचिव, नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सहित प्रमुख नेता मैदान में हैं। भाजपा की ओर से स्टार प्रचारकों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सभी दिग्गज अपने प्रत्याशियों के पक्ष में एक के बाद एक जन सभाएं कर रहे हैं। उधर, कांग्रेस भी अपना दमखम दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कमान संभाले हुए हैं। वैसे तो कांग्रेस ने भी अपने स्टार प्रचारकों को उतार रखा है, लेकिन राजबब्बर के अलावा, चुनावी समर में एक-दो नेता ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, शेष बस प्रेस वार्ता करके लौट जाते हैं।
कांग्रेस के पास नहीं हैं मुद्दे
भाजपा के नेताओं के पास जहां केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किए गए कार्यों सहित राज्य में 15 वर्षों के दौरान किए गए कार्यों का ब्योरा होता है, वहीं कांग्रेस के नेता कथित राफेल घोटाला जैसे मुद्दे उठाकर ही चुनावी वैतरणी पार करना चाह रहे हैं। कांग्रेस के पास आमजन से जुड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास जैसे मुद्दों का अभाव है। कांग्रेस जिन मुद्दों को उठा रही है, उनका स्थानीय लोगों से कोई लेना-देना नहीं है। हकीकत तो यह है कि कांग्रेस अपनी सीटें बचाने के लिए ही जद्दोजहद कर रही है। ऊपर से नेताओं को अपने स्टार प्रचारकों की आधी-अधूरी जानकारियों के कारण भी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। जैसे- चुनावी सभा में राहुल गांधी धान की कीमत 1100 रुपये करने की बात कह बैठे, जबकि राज्य में बोनस सहित धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले से ही 2070 रुपये प्रति कुंतल है। इसी तरह, कभी भेल में मोबाइल बनाने तो कभी एचएएल में लड़ाकू विमान बनाने की उनकी बात पर प्रत्याशियों को हास्यास्पद परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है। इन सब वजहों के कारण माहौल फिलहाल एकतरफा सा दिख रहा है।
निचले स्तर पर उतरे कांग्रेसी
जैसे-जैसे दूसरे चरण के मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, कांग्रेस नेता अभद्र टीका-टिप्पणी पर उतर आए हैं और
सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश का वातावरण दूषित कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला द्वारा रायपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी आपत्तिजनक थी। ऐसे ओछे बयानों की उम्मीद न तो कभी छत्तीसगढ़ की जनता करती है और न ही छत्तीसगढ़ की तासीर ऐसी है।
निगाहें दूसरे चरण पर
दूसरे दौर के मतदान में बिलासपुर जिले की बिल्हा सीट महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक मैदान में हैं। पूर्व विधानसभाध्यक्ष कौशिक के खिलाफ विजय हासिल करने वाले सियाराम कौशिक इस बार जोगी कांग्रेस से किस्मत आजमा रहे हैं। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के कारण धरम लाल की राह आसान होती दिख रही है। इसी तरह विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कसडोल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल पाटन, नेता प्रतिपक्ष (कांग्रेस) टी.एस. सिंहदेव अम्बिकापुर, जबकि रायपुर के दो विधानसभा क्षेत्र से कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल व राजेश मूणत चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा, आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल बिलासपुर, मंत्री अजय चंद्राकर कुरूद और भिलाई से मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय मैदान में हैं। ये ऐसी सीटें हैं, जिन पर प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
पहले चरण के मतदान के बाद शुरुआती रुझानों में भाजपा का पलड़ा भारी होने का दावा किया जा रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि पिछले चुनाव में भाजपा को कम सीटें मिली थीं। भाजपा के खाते में बस्तर जिले की 12 सीटों में से केवल चार सीट और राजनांदगांव की छह में से केवल दो सीटें आई थीं। इस लिहाज से भाजपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। पिछली बार झीरम में नक्सलियों के हमले में प्रदेश कांग्रेस को काफी बड़ा झटका लगा था। इस हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की मौत हो गई थी। हालांकि चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा मिला था। लेकिन इस बार चूंकि सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए पार्टी चुनाव में अच्छी सीटें मिलने की उम्मीद कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी पहले चरण की 18 में से 14 सीटें भाजपा की झोली में आने का दावा कर चुके हैं।
लोक-लुभावन वादे
दावों-प्रतिदावों के बीच प्राय: सभी दलों ने अपने घोषणा-पत्र में किसानों की कर्ज माफी सहित कई लोक-लुभावन वादे किए हैं। कांग्रेस ने 24 जिलों में अलग-अलग वर्ग के लोगों से मिले सुझावों के आधार पर घोषण-पत्र तैयार किया है। इसमें विकास के 36 लक्ष्यों को शामिल किया गया है। साथ ही, दावा किया गया है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के 10 दिन के भीतर किसानों को कर्ज में छूट देने और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की जाएगी। किसानों को दो साल का बोनस देने का भी वादा किया गया है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी, रोजगार, चिकित्सा, बिजली बिल आधा माफ करने जैसी घोषणाएं भी शामिल हैं। बता दें कि कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव में भी इसी तर्ज पर घोषणा-पत्र तैयार किया था।
भाजपा का संकल्प पत्र
भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र को ‘नवा छत्तीसगढ़ संकल्प पत्र’ नाम दिया है। इसमें भाजपा ने असंभव लोक-लुभावन योजनाओं से परहेज करते हुए खास कर अगले पांच वर्ष पर ध्यान केंद्रित रखा कि वह प्रदेश को कैसा बनाना चाहती है। 2025 का छत्तीसगढ़ कैसा होगा, इसका एक दृष्टि पत्र भी प्रस्तुत किया गया है। संकल्प पत्र जारी करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ को शिक्षा, खासकर मेडिकल हब बनाने में सफल रहे हैं। अब छत्तीसगढ़ को डिजिटल हब बनाएंगे।’’ इसके अलावा, अपने घोषणा-पत्र में भाजपा ने नवाचारों को प्राथमिकता दी है। जैसे राज्य में हिन्दी-छत्तीसगढ़ी विश्वविद्यालय की स्थापना, छात्रों के लिए अंग्रेजी बोलना सीखने के लिए कै्रश कोर्स शुरू करने के साथ किसान आयोग के गठन की भी घोषणा की गई है।
इसके अलावा, घोषणा-पत्र में मनरेगा को खेती से जोड़ना, दुनिया भर में मौजूद छत्तीसगढ़ के निवासियों को एक मंच पर लाने के लिए फेसबुक जैसा एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने जैसी घोषणाएं की गई हैं। कुल मिलाकर भविष्य का छत्तीसगढ़ बनाने, पलायन के लिए जाने जाने वाले प्रदेश को अवसरों का प्रदेश बनाने, पिछड़ेपन का पर्याय बने प्रदेश को ‘डिजिटल प्रदेश’ बनाने का भाजपा का वादा फिलहाल भले थोड़ा साहसी दिखे, लेकिन बीमारू से विकासशील, विकासशील से विकसित छत्तीसगढ़ की तरफ बढ़ने के बाद नए छत्तीसगढ़ की तरफ बढ़ने के उसके दावे और वादे पर प्रदेश की जनता को कुछ हद तक विश्वास तो है ही।
बहरहाल, नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान रुझानों को देखकर लगता है कि दूसरे दौर में भी मतदान का आंकड़ा अच्छा रहेगा।
यह है नवा छत्तीसगढ़ संकल्प पत्र
  • 60 वर्ष से अधिक आयु के लघु एवं सीमांत किसानों और भूमिहीन कृषि मजदूरों को 1,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन
  • अगले 5 वर्षों में किसानों को 2 लाख नए ट्यूबवेल कनेक्शन
  • छोटे बांधों का निर्माण और मौजूदा चेक डैम की गहराई बढ़ाकर प्रदेश में सिंचित रकबा 50 प्रतिशत बढ़ाना
  • दलहन और तिलहन किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद
  • लघु वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़कर होगा 1.5 गुना
  • छत्तीसगढ़ को जैविक खेती के प्रदेश के रूप में विकसित करने हेतु तेजी से प्रयास
  • छत्तीसगढ़ बनेगा नक्सलवाद से मुक्त प्रदेश
  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों हेतु ‘गुरु घासीदास’ एवं ‘अमर शहीद गुंडाधुर’ छात्रवृत्ति योजना
  • वनोपज खरीद-बिक्री के लिए सर्व सुविधा-युक्त हाट बाजारों की स्थापना
  • निराश्रित पेंशन राशि में वृद्धि
  • ग्रामीण एवं शहरी गरीब परिवारों हेतु पक्का आवास
  • नोनी सुरक्षा योजना में दी जाने वाली राशि को दोगुना कर 2 लाख रुपये
  • कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाले समस्त छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल
  • 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को निशुल्क गणवेश एवं पाठ्य पुस्तकें
  • मेधावी छात्राओं को यातायात में सुविधा देने हेतु नि:शुल्क स्कूटी
  • महिलाओं को व्यापार हेतु 2 लाख एवं स्व-सहायता समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण
  • जिला अस्पताल बनेंगे मल्टी स्पेशलिटी; अंबिकापुर एवं जगदलपुर में सुपर-स्पेशिएलिटी अस्पताल
  • युवाओं को रोजगार सुनिश्चित करने ‘कौशल उन्नयन’ भत्ता (बेरोजगारी भत्ता)
  • 200 करोड़ रुपये के ‘उद्यमिता मास्टर फंड’ की स्थापना
  • हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए प्रदेश में नया विश्वविद्यालय
  • पेंशनभोगियों को 1,000 रुपए प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता
  • गरीब परिवारों के लिए 5 लाख एवं अन्य परिवारों के लिए 1 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा
  • पत्रकार और फोटो पत्रकार कल्याण बोर्ड का गठन