फुटपाथ पर मुफ्त इलाज
   दिनांक 05-नवंबर-2018

पैसा पैदा करने की अंधाधुंध होड़ में शामिल चिकित्सकों के लिए कानपुर के डॉ. अजीत मोहन चौधरी एक उदाहरण हैं, जो खुद का सौ बिस्तरों वाला अस्पताल होने के बावजूद फुटपाथ पर टेंट लगाकर शहर के गरीब मरीजों का रोजाना एक घंटा मुफ्त में इलाज करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों जब 'मन की बात' में उनके इस सेवाभाव की सराहना की तो लोग उनके बारे में जानने को उत्सुक हुए। प्रधानमंत्री ने मन की बात में कहा,''डॉ. अजीत मोहन चौधरी फुटपाथ पर बैठकर गरीबों को देखते हैं और उन्हें मुफ्त दवा भी देते हैं। इससे देश के बंधुभाव को महसूस करने का अवसर मिला।'' मूलत: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले डॉ. अजीत मोहन के परिवार के अधिकतर सदस्य चिकित्सक हैं। डॉ. चौधरी ने वर्ष 1977 में बिहार से एमबीबीएस और कानपुर से एमडी की पढ़ाई की। वर्ष 1980 में उन्होंने चिकित्सा कार्य शुरू किया और कानपुर शहर के डॉक बंगला क्षेत्र में एक नर्सिंग होम खोला। वर्षों कार्य करने के बाद उन्हें लगा कि बहुत से ऐसे मरीज हैं जो पैसों के अभाव में न तो उचित सलाह ले पाते हैं और न ही अस्पताल आ पाते हैं। ऐसे मरीजों का इलाज हो और उन्हें उचित सलाह मिले, इसके लिए कुछ करना चाहिए। डॉ. चौधरी ने अपना एक घंटे का समय गरीब मरीजों के लिए नियत किया और यह सिलसिला चल पड़ा। वह चेतना चौराहे पर रोज एक घंटा गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं। क्लिनिक के नाम पर छोटा- सा टेंट लगाए डॉ. चौधरी हर दिन दर्जनों मरीजों को इस दौरान देखते हैं। सुबह के 10 से 11 बजे के बीच फुटपाथ पर इलाज करते देख कर आने-जाने वाले लोग कुछ पल के लिए अनायास ठिठक जाते हैं। इस दौरान निशुल्क दवाएं देने के अलावा किसी मरीज की स्थिति अगर गंभीर होती है तो वे उसे उचित सलाह भी देते हैं।
खास बात यह है कि इस इलाज के पीछे शहीद सैनिकों का सम्मान है। डॉ. चौधरी कहते हैं कि यह समय मैं शहीद सैनिकों के सम्मान में देता हूं। मुझे लगता है कि गरीबों का मुफ्त इलाज करके मैं भी देश के लिए अपना कुछ योगदान कर पा रहा हूं। मैंने पूरी दुनिया घूमी है। हर तरह की पारिवारिक जिम्मेदारियां भी पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में खुद के लिए अब कोई इच्छा शेष नहीं रह गई है। बस यही इच्छा है कि एक जिम्मेदार चिकित्सक होने के नाते मैं देश, समाज, गरीबों और असहायों के लिए कुछ कर सकूं। डॉक्टर चौधरी उन चिकित्सकों के लिए सबक हैं, जो मरीजों से मोटी रकम लेने के बाद भी उनका समुचित इलाज नहीं करते।