नेह की बूटी: डॉ. अजयदत्त मजदूर बस्ती में करते हैं गरीबों की सेवा
   दिनांक 05-नवंबर-2018
- पूनम नेगी                     
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अजय दत्त शर्मा बीते तीन दशक से भी अधिक समय से निर्धन और साधनविहीन रोगियों की सेवा में जुटे हैं। 70 साल की उम्र में भी वे अपने पेशे को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। लखनऊ के प्राग नारायण रोड स्थित बालू अड्डा क्षेत्र की मजदूर बस्ती में वे गरीबों की नि:शुल्क चिकित्सा कर रहे हैं। लखनऊ नगर निगम की स्वास्थ्य समिति का अध्यक्ष रहने के दौरान उन्हें जन सामान्य की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजदीक से मानने का मौका मिला। गरीबों की हालत ने उन्हें इस दिशा में कुछ सार्थक करने को प्रेरित किया। इसके बाद 1984 में बालू अड्डा क्षेत्र की मजदूर बस्ती में उन्होंने एक औषधालय खोला।
वे आज भी यहां प्रतिदिन 30-40 निर्धन रोगियों का मुफ्त उपचार करते हैं। चरक, झंडू, डाबर, वैद्यनाथ आदि दवा कंपनियों के सहयोग से वे इन मरीजों को मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराते हैं। यही नहीं, वे लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर आदि राजधानी के निकटवर्ती शहरों में गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दर्जनों चिकित्सा शिविर लगा चुके हैं। खास बात यह है कि इन शिविरों में वे रोगियों को इलाज के साथ घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे बताते हैं और पथ्य-अपथ्य तथा मौसम के अनुकूल उचित आहार-विहार की भी जानकारियां देते हैं।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ में डॉक्टर की लोकप्रियता आयुर्वेदिक कैंसर विशेषज्ञ के रूप में है। दर्जनभर से अधिक कैंसर रोगी डॉ़ शर्मा की चिकित्सा से सामान्य जीवन जी रहे हैं। पूरी निष्ठा से दरिद्र नारायण की सेवा में लगे डा़ॅ शर्मा बताते हैं, ह्यह्यकरीब साढेÞ पांच साल पहले एक पुराने लखनऊ के निवासी गोरे नवाब नाम के एक 70 वर्षीय वृद्ध इलाज कराने मेरे पास आए थे। विभिन्न तरह की जांच में पैंक्रियास का कैंसर निकला, वह भी अंतिम अवस्था का। मैंने उनका इलाज किया।
उन्होंने चार महीने बाद गोरे नवाब से सीटी स्कैन और जांच कराने को कहा। सारी रपटें सामान्य थीं। यह बात उनके लिए किसी करिश्मे से कम नहीं थी। एलोपैथी में कैंसर का इलाज बड़ा महंगा होता है। इस कारण आम आदमी मुश्किल में पड़ जाता है। डॉ. शर्मा ऐसे रोगियों को न्यूनतम दर पर दवाई देते हैं। डा़ॅ शर्मा के इलाज से ठीक होकर दर्जनों कैसर रोगी सामान्य जीवन जी रहे हैं।