रोग संग कुरीतियों का इलाज
   दिनांक 05-नवंबर-2018

समाज में दो तरह के लोग होते हैं। एक वे जो जो सिर्फ अपनी चिंता करते हुए अपने परिवार के लिए जीते हैं। दूसरे वे जो समाज की पीड़ा को स्वयं की पीड़ा समझते हैं और दूसरों के दुख-दर्द को अपना मानकर उसे सुलझाने के लिए प्रयासरत नजर आते हैं। छत्तीसगढ़ स्थित रायपुर के डॉ. दिनेश मिश्र ऐसे ही चिकित्सक हैं। रायपुर से एम़ बी़ बी़ एस. एवं मुंबई से नेत्र चिकित्सा में विशेषज्ञता हासिल करने वाले डॉ. मिश्र वनवासी क्षेत्रों में जाकर न केवल असहाय एवं गरीबों का इलाज करते हैं बल्कि कुरीतियों और अंधविश्वासों में जकड़े समाज को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। दरसअल 1991 में डॉ. मिश्र जब मुंबई से रायपुर वापस आए तो यहां आकर उन्होंने सभी चिकित्सकों की तरह क्लिनिक खोला। इस दौरान उनके सम्पर्क में वनवासी इलाकों के वे मरीज आए जिन्हें शारीरिक बीमारियों के अलावा कुरीतियों और अंधविश्वासों ने मानसिक रूप से जकड़ रखा था। वे बताते हैं,'' वनवासी क्षेत्रों के लोगों का इलाज करने के दौरान जो सामने आ रहा था, वह चौंकाने वाला था। जादू-टोने के नाम पर इलाज करने का ढोंग कर ग्रामीणों का जीवन बर्बाद किया जा रहा था। यह सारी बातें मुझे एक चिकित्सक होने के नाते अखरती थीं। इसे देखकर मैंने यह तय किया कि इसके खिलाफ जन जागरण अभियान चलाएंगे और सप्ताह के अंत में आस-पास के गांवों में जाकर वहां बैठक आदि के माध्यम से लोगों को अंधविश्वासों से दूर रहने की सलाह देंगे।'' उन्होंने इसी कड़ी में 1995 में अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति का गठन किया और कुरीतियों और अंधविश्वासों का शिकार बन रहे ग्रामीणों को इस अभिशाप से मुक्त करने का बाकायदा अभियान छेड़ दिया। इस दौरान डॉ. मिश्र गांव-गांव जाकर लोगों को न केवल जागरूक करते बल्कि ग्रामीणों का निशुल्क इलाज भी करते। उनकी इस पहल का असर हुआ और सरकार ने भी अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति की सिफारिशों को आधार बनाकर एक समिति गठित कर टोनही प्रताड़ना के खिलाफ कानून बनाने का फैसला लिया। 2005 में 'छतीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम' बना जिसमें ऐसे मामलों पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया। उल्लेखनीय है कि डॉ ़मिश्र अब तक करीब 2000 सभाएं कर चुके हैं और ग्रामीण स्कूलों के छात्र- छात्राओं को अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ने और घर परिवार को इससे दूर रखने के लिए प्रशिक्षित भी करते हैं। वे राज्य की विभिन्न महिला जेलों में जाकर भ्रम निवारण और मार्गदर्शन शिविर चलाते हैं।