घर से पहले बनवाया अस्पताल
   दिनांक 05-नवंबर-2018

 
वे लगभग 50 साल से दिल्ली में रह रहे हैं, लेकिन आज तक उन्होंने अपने लिए मकान नहीं बनवाया। अभी भी वे किराए के घर में रहते हैं। उनका नाम है डॉ. कृष्ण सिंह चरक, जो डॉ. के.एस.चरक के नाम से ज्यादा जाने जाते हैं।
उन्होंने अपने गृह नगर जम्मू के पास नौग्रां में एक अस्पताल बनवाया है। इस अस्पताल में गरीब मरीजों का नि:शुल्क इलाज होता है। हालांकि अभी यह अस्पताल पूरी तरह काम नहीं कर रहा, पर आने वाले समय में यह पूरी तरह गरीब रोगियों की सेवा के लिए समर्पित हो जाएगा।
डॉ. चरक इन दिनों दिल्ली के वसंत कुंज स्थित स्पाइनल इंस्टीट्यूट में कार्यरत हैं। इससे पहले वे दिल्ली में ही ई.एस.आई. अस्पताल में कार्यरत थे। 2012 में वे सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे।
डॉ. चरक को पर्वतारोहण का शौक है। इसलिए उन्हें जब भी समय मिलता है तो वे पहाड़ की ओर चले जाते हैं। 1980 में वे पहली बार गढ़वाल गए। वहां उन्होंने देखा कि छोटी-सी बीमारी के कारण भी लोग परेशान हैं। ये लोग अपनी बीमारी का इलाज तक नहीं करा पा रहे थे। उनकी दशा देखकर ही उन्होंने ऐसे लोगों का नि:शुल्क इलाज शुरू किया। शुरू-शुरू में वे लोगों को केवल दवाइयां देते थे। ऐसा उन्होंने कई वर्ष किया। फिर उन्होंने अपने साथ कुछ मित्रों को जोड़ा और गांवोें में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाना शुरू किया। पहला शिविर उन्होंने जम्मू के पास एक गांव में लगाया। उसी शिविर में उन्होंने अनेक रोगियों का ऑपरेशन भी किया। इसके बाद तो उन्होंने उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिविर आयोजित किए। सन् 2000 में उन्होंने अपने पिताजी के नाम से श्री ओंकार सिंह मेमोरियल ट्रस्ट बनाया। इस ट्रस्ट के बैनर तले वे और उनके साथी जगह-जगह नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाते हैं। डॉ. चरक के अनुसार एक वर्ष में कम से कम दो शिविर आयोजित होते हैं। अब तक 52 शिविर आयोजित हो चुके हैं। एक पांच दिवसीय शिविर में 2,000 से ज्यादा मरीजों का इलाज होता है। एक शिविर पर लगभग 6,00,000 रु. खर्च होते हैं। यह पूरी राशि डॉ. चरक और उनके साथी समाज से इकट्ठा करते हैं। डॉ. चरक ने 1968 में दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से सर्जरी में स्नातकोत्तर करने के बाद ब्रिटेन से एफ.आर.सी.एस. की उपाधि ली है।