सेवा पथ के अनथक पथिक डॉ. डावर मात्र 10 रुपए लेते हैं फीस
   दिनांक 05-नवंबर-2018

जबलपुर में डॉ. एम.सी. डावर को हर कोई जानता है। इन दिनों भी मात्र 10 रु. शुल्क में इलाज करने वाले डॉ. डावर ने जब सेना से लौटने के बाद 1972 में यहां सेवा शुरू की थी तब वे केवल दो रु. लेते थे। आज 46 साल बाद उसमें मात्र आठ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वे कहते हैं, ‘‘चिल्लर की समस्या आती है, इसलिए बढ़ाना पड़ा। शुरुआत दो रुपए प्रति मरीज के साथ हुई। 1986 मेें तीन रु., 1997 में पांच रु. और अब 10 रुपए फीस कर दी है।’’
अपने सम्पूर्ण जीवन को मानवता की सेवा में लगाने वाले डॉ एम. सी. डावर का जन्म मोंट-गुमरी (वर्तमान में पाकिस्तान) में हुआ था। बचपन से मेधावी होने के कारण उनका दाखिला एम.बी.बी.एस. में हो गया। एम.बी.बी.एस. पूर्ण करने के पश्चात् वे सेना में चले गए। नवंबर, 1972 में सेना छोड़ने के पश्चात् चिकित्सा के क्षेत्र में निजी तौर पर सेवा शुरू की। अपना कार्य क्षेत्र जबलपुर, मध्य प्रदेश को बनाया। मानवता की सेवा की प्रेरणा उन्हें अपने शिक्षक तुलसीराम जी से मिली, जो कहते थे, ‘‘प्रैक्टिस करना पर किसी को निचोड़ना नहीं।’’
उम्र के इस पड़ाव पर भी डॉ. डावर की ऊर्जा क्षीण नहीं हुई है। नित्य कार्यों से निवृत्त होकर वे प्रात: 9 बजे ही क्लीनिक पहुंच जाते हैं। दोपहर में भोजनावकाश के बाद कुछ देर विश्राम करते हैं। संध्या में फिर क्लीनिक पहुंचते हैं, फिर देर रात्रि तक मरीजों को देखते हैं। यही उनकी जीवनचर्या है। इसके अलावा उन्हें और कोई काम नहीं है।
युवाओं के लिए उनका सन्देश है, ‘‘एक लक्ष्य निर्धारित करो। उसकी ओर बढ़ते रहो। जब तक सफलता न मिले बढ़ते चलो। बीच में लक्ष्य से भटकाने के लिए कई चुनौतियां आएंगी, पर चलते रहना।’’ सेवा मार्ग से भटकाव के अपने अनुभव के बारे में वे कहते हैं, ‘‘जब लगभग नि:शुल्क मरीजों की सेवा प्रारंभ की, और काफी मरीज आने लगे तो कई लोगों ने संपर्क किया और व्यावसायिक रूप से जुड़ने को कहा। परन्तु मैंने सेवा को व्यवसाय नहीं बनाना है, यह तय कर लिया था।’’
अपने सामाजिक योगदान के बारे में वे कहते हैं,‘‘अगर हर व्यक्ति अपने समय में से थोड़ा समय समाज की सेवा के लिए दे, तो भारतवर्ष की उन्नति में कोई बाधा नहीं रहेगी।’’ वास्तव में उनका जीवन एक आदर्श है। उनकी सेवा यात्रा अनथक जारी है।