गरीबों को देते हैं मुफ्त दवा
   दिनांक 05-नवंबर-2018

ऊपने 27 साल पुराने डॉक्टरी पेशे में वे हजारों मरीजों का मुफ्त में उपचार कर चुके हैं। गरीब हो या अमीर, दोनों को वे पर्याप्त समय देते हैं। पूर्वी दिल्ली के साउथ अनारकली एक्स्टेंशन इलाके में एक पुराना-सा घर है। घर के नीचे ही क्लीनिक है। किसी से पूछो, डॉ. पंकज अग्रवाल का क्लीनिक कहां है तो कोई भी बता देगा। अंदर जाने पर देखा कि कुछ मरीज बाहर बैठे हैं तो कुछ डॉक्टर साहब के पास। वह मरीजों से बड़ी तसल्ली से बात करते हैं। पर्ची पर दवा लिखते हैं और बाहर अपने सहायक को बुलाकर पकड़ा देते हैं। पैसे हैं तो दो नहीं तो दवा लो और जाओ, कोई नहीं पूछेगा कि पैसे क्यों नहीं दिए। उनके पिता डॉ. एमएल अग्रवाल भी कुशल होम्योपैथ थे। डॉ. पंकज कहते हैं कि पिताजी ने कभी पैसे को तरजीह नहीं दी, न ही वे खुद पैसे को महत्व देते हैं। उनके पास जो लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं उससे उनकी पहली शर्त होती है कि समय लेकर आएं, उपचार से पहले वे मरीज के मनोविज्ञान को समझने से लेकर उसके परिवार के बारे में सब कुछ पूछते हैं।
परिवार की ‘मेडिकल हिस्ट्री’ से लेकर मरीज के बारे में छोटी से छोटी बात जानने के बाद ही वे दवा देते हैं। मूलत: दिल्ली के रहने वाले डॉ. अग्रवाल की स्कूली पढ़ाई दिल्ली में ही हुई। 1982 से लेकर 1986 तक उन्होंने चंडीगढ़ से डी.एच.एम.एस. (डिप्लोमा इन होम्योपैथी मेडीसिन एंड सर्जरी) किया। इसके बाद 1989 से 1991 तक उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ होम्योपैथी से आगे की दो साल की पढ़ाई की। फिर होम्योपैथी क्लीनिक शुरू किया। उन्होंने 2005 में होम्योपैथी में एम.डी. किया। अभी हाल ही में उन्होंने अपनी पी.एचडी. पूरी कर शोधपत्र जमा किया है। डॉ. अग्रवाल मरीज का पूरा चार्ट बनाकर रखते हैं। कोई व्यक्ति गरीब है और पैसे के अभाव में दवा लेने नहीं आ सकता तो वह उसका पता लेकर कुरियर से उसके यहां दवा भिजवाते हैं। वे कहते हैं ‘‘आधे से ज्यादा मरीज ऐसे होते हैं जिनसे मैं दवा के पैसे नहीं लेता। मैं मांगता भी नहीं, लेकिन जो देते हैं, उससे घर बड़े आराम से चलता है।’’