सारी बात मर्म की
   दिनांक 05-नवंबर-2018
 
हरिद्वार में रहने वाले डॉ़ सुनील कुमार जोशी प्रतिदिन शाम को उन मरीजों का नि:शुल्क इलाज करते हैं, जो असाध्य बीमारियों से पीडि़त हैं। पिछले लगभग 30 वर्ष में वे अपनी टोली के माध्यम से कई हजार मरीजों को ठीक कर चुके हैं। इनमें गठिया, साइटिका, कमर और घुटने के दर्द से परेशान रहने वाले मरीज शामिल हैं। सेवा का यह काम वे 'मृत्युंजय मिशन' के अंतर्गत करते हैं। वे इस मिशन के अध्यक्ष भी हैं।
डॉ़ सुनील जोशी इन दिनों ऋषिकुल राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय, हरिद्वार में संकायाध्यक्ष और निदेशक हैं। सुबह से दोपहर दो बजे तक वे यहीं अपनी सेवाएं देते हैं। इसके बाद वे अपने घर पर मरीजों का इलाज करते हैं। इसके साथ ही वे दूसरी पद्धति के चिकित्सकों को भी मर्म चिकित्सा का प्रशिक्षण देते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। मर्म चिकित्सा को विश्व में फैलाने के लिए डॉ. जोशी बैंकॉक, बेल्जियम, जापान, हॉलैंड, जापान, मॉरीशस, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड सहित अनेक देशों में कार्यशाला और संगोष्ठी आयोजित कर चुके हैं। फलत: अब विदेशों में भी कई जगह मर्म चिकित्सा होने लगी है।
डॉ. जोशी बताते हैं, ''आयुर्वेद शल्य तंत्र का सबसे प्राचीन ग्रंथ है सुश्रुत संहिता। इसी में मर्म बिन्दुओं से संबंधित जानकारी दी गई है। पढ़ाई के दौरान बताया जाता था कि शल्य चिकित्सा करते समय इन मर्म बिन्दुओं को बचाएं नहीं तो रोगी का निधन हो सकता है, लेकिन यह नहीं बताया जाता था कि जो मर्म स्थान बिगड़ गए हैं, उन्हें कैसे ठीक किया जाए। बाद में मैंने इस पर शोध किया, जिसका बहुत अच्छा परिणाम मिला। इसके बाद इस चिकित्सा को बढ़ाने का काम शुरू किया। आज बहुत सारे लोग यह चिकित्सा कर रहे हैं।'' वे यह भी कहते हैं कि मर्म चिकित्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष्मान भारत की योजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। डॉ. जोशी ने ऋषिकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय, हरिद्वार से बी़ ए़ एम़ एस़ और चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एम़ डी. की उपाधि ली है। मर्म चिकित्सा में शोध करने के लिए डॉ़ सुनील जोशी को अनेक पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। क्या है मर्म चिकित्सा : यह बहुत ही प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसका मूल वेद है। इसमें बिना किसी दवाई और चीर-फाड़ के लगभग सभी रोगों का इलाज किया जाता है। मानव शरीर में 107 मर्म स्थान हैं। इस चिकित्सा में उन्हीं स्थानों को उत्प्रेरित करके शरीर और मस्तिष्क की क्रियाओं को नियंत्रित किया जाता है। इससे अनेक बीमारियां ठीक हो जाती हैं।