सेवामय जीवन: नौकरी से रिटायर हुए पर काम से नहीं
   दिनांक 05-नवंबर-2018

जिस दौर में लाशों को भी वेंटिलेटर पर रखकर बड़े-बड़े अस्पतालों के डॉक्टर बिल बसूलने से नहीं चूकते, उस दौर में बीएचयू के देवतुल्य चिकित्सक डॉ. तपन लहरी की कहानी न केवल दिल को छूती है बल्कि देश के चिकित्सकों को यह संदेश देती है कि समाज अच्छे चिकित्सकों को आज भी भगवान का ही दर्जा देता है। ख्यातिप्राप्त कार्डियोलॉजिस्ट प्रो़ तपन लहरी सेवानिवृत्ति के बाद भी बीएचयू में अपनी चिकित्सा सेवाएं निशुल्क रूप से देते आ रहे हैं। उनके सेवाभाव की बदौलत आज सैकड़ों गरीब मरीजों का दिल धड़क रहा है, जो पैसे के अभाव में महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे। इन सभी लोगों के लिए डॉ़ लहरी किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। 1974 से प्रवक्ता के रूप में बीएचयू से अपना करियर शुरू करने वाले डॉ. लहरी साल 2003 में यहां से सेवानिवृत्त तो जरूर हुए लेकिन उनका नाता नहीं टूटा। वे सेवानिविृृत्त के बाद आज भी उसी तरह से बीएचयू में गरीबों का इलाज करते आ रहे हैं। जिस ख्वाब को संजोकर पंडित मदन मोहन मालवीय ने काशी हिन्दू विवि. की स्थापना की, उसे अपने सेवाभाव से डॉ लहरी आज भी जिन्दा रखे हुए हैं। खास बात यह है कि वर्ष 1997 से उन्होंने वेतन लेना बंद कर दिया और तनख्वाह गरीबों की सेवा में दान करने लगे। 2003 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें जो पेंशन मिलती है, डॉ. लहरी उसमें से सिर्फ उतने ही रुपए लेते हैं, जिससे वे दो समय के भोजन का इंतजाम हो सके। बाकी राशि बीएचयू कोष में इसलिए छोड़ देते हैं उससे गरीबों का भला हो सके। अमेरिका से पढ़े डॉ. लहरी की उम्र 75 साल हो चुकी है लेकिन उनका जोश और जुनून किसी को भी हतप्रभ कर देता है। वह प्रतिदिन सुबह छह बजे बीएचयू पहुंच जाते हैं और तीन घंटे चिकित्सा कार्य करने के बाद वापस घर लौट आते हैं। इसी तरह हर शाम को तय समय पर अस्पताल पहुंच जाते हैं। डॉ लहरी जितने अपने पेशे के साथ प्रतिबद्घ हैं, उतने ही समय के पाबंद भी। समय पर अस्पताल पहुंचना और समय पर घर वापस आना, उनकी जीवनचर्या का अहम हिस्सा है। उनके सेवा भाव को देखकर विवि. ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद मानद प्रोफेसर का दर्जा दिया। डॉ़ लहरी बताते हैं,''सेवानिवृत्ति के बाद अमेरिका के अस्पतालों से उन्हें बुलावा मिला, लेेकिन मेरा मन अपने ही देश के मरीजों की जीवन भर सेवा करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है।'' डॉ. लहरी के सेवाभाव को देखकर केन्द्र की मोदी सरकार ने 2016 में उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया है।