भाजपा का मजबूत गढ़ है राजस्थान का हाड़ौती
   दिनांक 06-नवंबर-2018
-डॉ. ईश्वर बैरागी, राजस्थान से                       
राजनीतिक रूप से हाड़ौती अंचल भाजपा का गढ़ रहा है। यहां कृष्ण कुमार गोयल, दाऊदयाल जोशी, डॉ. ललित किशोर चतुर्वेदी, हरिराम कुमार, रघुवीरसिंह कौशल जैसे कई कर्मठ नेता हुए हैं, जिन्होंने जनसंघ और भाजपा को हाड़ौती के गांव-गांव तक पहुंचाया। इनके बाद इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कर रही हैं। पिछले चुनावों में हाड़ौती से कांग्रेस का सूफड़ा साफ हो गया था। क्षेत्र की 17 सीटों में कांग्रेस को महज एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। तीन जिलों में तो कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई थी।
 राजस्थान गौरव यात्रा के दौरान एक समर्थक से गले मिलती मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
भाजपा विकास के दम पर मैदान में है, वहीं कांग्रेस यहां किसानों की आत्महत्या, फसलों का उचित मुवावजा नहीं मिलना, अफीम की खेती के लिए पट्टे, फसलों का बीमा नहीं मिलना, फसलों की समर्थन मूल्यों पर खरीद नहीं होने जैसे मुद्दे लेकर मैदान में उतर रही है। हाड़ौती की सबसे खास बात यह भी है कि कोई भी दल यहां जातिवाद की नाव पर सवार होकर सत्ता तक नहीं पहुंच सकता, क्योंकि किसी भी सीट पर जाति विशेष का प्रभाव नहीं है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण पूरी राजनीति किसानों के ईद-गिर्द ही घूमती है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अक्तूबर के अंत में स्वयं झालावाड़ और कोटा में 'रोड शो' कर चुके हैं। हालांकि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र झालावाड़ में कांग्रेस की आपसी गुटबाजी के चलते राहुल के 'रोड शो' में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को गरीब और किसानों की चिंता नहीं है। इस दौरान राहुल के निशाने पर अधिकांश समय केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही रहे।
राहुल के दौरे के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपने क्षेत्र का दौरा कर साफ कर दिया कि वह अगला चुनाव झालरापाटन से ही लड़ेंगी। राजे ने कहा कि झालावाड़ से मेरा 30 साल पुराना अटूट रिश्ता है। यह रिश्ता मुख्यमंत्री और कार्यकर्ताओं के बीच का नहीं, बल्कि मां-बेटे, मां-बेटी, बहन-भाई के बीच का है। यहां के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया। मैंने भी पूरे मन से झालावाड़-बारां के लिए जो भी मुझसे बन पड़ा, किया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हम पूर्ण बहुमत के साथ राजस्थान में ऐतिहासिक जीत दर्ज कराएंगे। हालांकि अभी चुनावी रंगत पूरी तरह आई नहीं है। टिकट वितरण के बाद ही स्थिति साफ होगी।
मुख्यमंत्री का जादू चलेगा?
मुख्यमंत्री का गृहक्षेत्र होने के कारण झालावाड़ हमेशा सुर्खियों रहता है। वहीं संभाग के अन्य जिलों की तुलना में यहां विकास ज्यादा हुआ है। झालरापाटन सीट से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे फिर से मैदान में होंगी, जिससे जिले की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को ताकत मिलेगी। उनके मुकाबले में कांग्रेस से शैलेंद्र यादव हो सकते हैं। जिले की खानपुर सीट पर भाजपा के अनिल जैन और कांग्रेस की नागेंद्र बाला व सज्जन पोसवाल के नाम अभी तक आगे हैं। डग सुरक्षित सीट पर भाजपा के विधायक रामचंद्र सुनेरीवाल को टिकट मिला तो सामने कांग्रेस के मदनलाल वर्मा ताल ठोक सकते हैं। मनोहर थाना सीट पर मीणा बहुल क्षेत्र होने से दोनों दल जातिगत आधार पर प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे। जिले में भाजपा को गिनाने के लिए विकास कार्यों की लंबी फेहरिस्त है। पंचायत स्तर के गांवों तक सीसी रोड, एनएच-12 एवं स्टेट हाईवे का विस्तार, सिंचाई के लिए बांध, एनीकट, प्रमुख नदियों पर पुल का निर्माण, सिंचाई परियोजनाएं, नए उद्योगों में निवेश, कालीसिंध थर्मल, कोलाना में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, झालावाड़ में मेडिकल कॉलेज व कैंसर हॉस्पिटल, भामाशाह योजना, मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व जैसी कई बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राजे ने झालावाड़ जिले में विकास की गंगा बहाकर पिछड़े जिले का तमगा हटा दिया है। दूसरी ओर, झालावाड़ जिले में कांग्रेस नेतृत्व शून्य दिखाई देती है।
कोटा जिले पर सबका ध्यान
कोटा शहर सदा नीरा चंबल नदी के तट पर बसा है। कोटा की ख्याति देशभर में एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए देशभर से यहां छात्र आते हैं। शहर में औद्योगिकीकरण भी बड़े पैमाने पर हुआ है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर बसा होने के कारण कोटा में कई बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं। हाल ही में जारी 'वर्ल्ड ट्रेड फोरम' की सूची में कोटा दुनिया का सातवां सबसे ज्यादा भीड़- भाड़ वाला शहर बना है।
कोटा दक्षिण : परंपरागत गढ़ होने से यह सीट भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है। 1998 के चुनाव को छोड़ दें तो इस सीट पर पिछले 35 साल से भाजपा का ही कब्जा रहा है। 1998 में यहां से कांग्रेस के शांति धारीवाल चुनाव जीते थे। वहीं परिसीमन के बाद एक उपचुनाव समेत हुए तीन चुनावों में यहां से भाजपा का कमल खिला। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के ओम बिरला ने कांग्रेस के रामकिशन को 24,252 मतों से हराया। इसके बाद 2013 में फिर ओम बिरला यहां से चुनाव जीते। इसके बाद यहां हुए उपचुनाव में भाजपा के संदीप शर्मा ने कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पंकज मेहता को सीधे मुकाबले में हराया था। इस बार कांग्रेस से युवा नेता शिवकांत नंदवाना दावेदारी में हैं। भाजपा से कौन मैदान में उतरेगा, यह चौंकाने वाला होगा।
कोटा उत्तर : कोटा उत्तर सीट पर राज्य के सभी नेताओं की नजरें रहेंगी। यहां कांग्रेस के शांति धारीवाल और भाजपा के मौजूदा विधायक प्रहलाद गुंजल के बीच कांटे का मुकाबला हो सकता है। प्रहलाद गुंजल ने पांच वर्ष में क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में बिजली, पानी व सड़कों की समस्या को हल किया। चंबल नदी पर दो समानांतर पुल की सौगात देकर जनता में पैठ बनाई। भाजपा कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव उनकी जड़ों को मजबूत करता है। इस सीट पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सेंध लगाने के लिए आम आदमी पार्टी के मोहम्मद हुसैन मैदान में उतर सकते हैं। वे भाजपा और कांग्रेस की हार-जीत के अंतर को प्रभावित कर सकते हैं।
लाड़पुरा :- लाड़पुरा सीट भाजपा की परंपरागत सीट रही है। करीब 25 साल से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के भवानीसिंह राजावत अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के नियामुद्दीन से 16,206 मतों से जीते थे। इस बार भाजपा से यहां कई युवा चेहरे अपनी दावेदारी जता रहे हैं।
बारां जिले में बदल सकते हैं समीकरण
बारां जिला सहरिया जनजातीय बहुल है। अंता, बारां-अटरू (अनुसूचित जाति), छबड़ा और किशनगंज (अनुसूचित जन जाति) चारों सीटों पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। लेकिन इस बार कड़ा मुकाबला दिख रहा है।
बारां-अटरू आरक्षित सीट पर कांग्रेस के पानाचंद मेघवाल के सामने भाजपा से पूर्व मंत्री मदन दिलावर मजबूत दावेदार हैं। लेकिन बांरा शहर में प्रमोद भाया का वर्चस्व होने से भाजपा के सामने बड़ी चुनौती होगी।
अंता में भाजपा और कांग्रेस से कैबिनेट मंत्री स्तर के प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हो सकते हैं। वर्तमान कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी और कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया प्रबल दावेदार हैं। उनकी पत्नी उर्मिला जैन भाया ने बारां-झालावाड़ सीट से लोकसभ चुनाव लड़ा था।
बूंदी जिले की तीन सीटों (बूंदी, केशवरायपाटन व हिंडौली) पर भाजपा और कांग्रेस के नेता पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बूंदी से वर्तमान विधायक अशोक डोगरा को भाजपा टिकट देती है तो कांग्रेस भी उनके सामने सशक्त उम्मीदवार को उतार सकती है। केशवरायपाटन में राज्य के मंत्री बाबूलाल वर्मा का मुकाबला पुराने प्रतिद्वंद्वी सी.एल. प्रेमी से हो सकता है। दोनों राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। हिंडौली में भी भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे को पटकनी देने की तैयारी कर रहे हैं। इस क्षेत्र के नेता भले ही दौड़-भाग कर रह हों, पर मतदाता अपने में ही मगन हैं। जनता किसको चुनती है, यह वक्त ही बताएगा।