हिन्दुओं से क्यों युद्धरत हैं सेकुलर क्या हिंदू अरब द्वीव में फंसे निरीह व निर्बल हैं ?
   दिनांक 06-नवंबर-2018

यह प्रश्न आस्था, विश्वास व श्रद्धा से अलग है। आज हिन्दुओं का हर त्योहार, दीवाली से होली तक सेकुलर सुधार की प्रयोगशाला में हमले का शिकार है। शबरीमला में विकृत, दूषित मानस से पुलिस संरक्षण में अहिन्दू शत्रु खुलकर चुनौती देते हैं और 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' उन्हें 'शबरीमला' के 'हीरो' घोषित करता है। करवा चौथ को पिछड़ेपन व महिलाओं पर दमन का प्रतीक बताया जाता है तो अयोध्या, मथुरा, काशी के मंदिरों को लेकर हिन्दू मन की मांग चुनावी शिगूफा व देश विभाजक कही जाती है। जैसे हिन्दू भारत नहीं, बल्कि अरब द्वीप में आ फंसे निरीह, निर्बल हैं, जो मंदिर में विधि-विधान से पूजा करने, मंदिरों को अपने धार्मिक मार्ग से संचालित करने, तीज-त्योहार मनाने के लिए सेकुलर सुल्तानों के आगे गिड़गिड़ा रहे हैं, आवेदन-पत्र भेज रहे हैं, उनसे प्रार्थना कर रहे हैं कि राष्ट्र जीवन को परिभाषित करने वाले मार्ग पर हमें कृपया चलने दीजिए। हिन्दुओं पर यह वही आक्रमण है जो कासिम, मलिक काफूर, अब्दाली व गजनी ने किए थे। शस्त्रों से आक्रमण, मन तोड़ना, मनोबल गिराना, राम, कृष्ण व शिव मंदिरों का ध्वंस, हतबल करने के लिए मतांतरण, स्त्रियों को अपमानित करना, मंदिरों के सरोवर गो-रक्त से भरना- ये काम कासिमों, अब्दालियों, गजनियों ने किए।
मंदिरों पर बनीं मस्जिदों को सेकुलर अभिमान तथा पर्यटन केंद्र बताना, मंदिरों के विधि-विधान को प्रदूषण, विकृति व अंधविश्वास के घृणित उदाहरण घोषित करना, धर्म को जीवित रखने वाली संस्कृत, भाषा को अहंकार के साथ 'मृत' भाषा बताना, हिन्दुओं को केवल तंत्र, ताजमहल व कामशास्त्र का समुच्चय मात्र निरूपित कर धर्म की पुस्तकें लिखना, सेकुलर मुल्लाओं द्वारा हिन्दू जीवन पद्धति समझाने वाले लेख व ग्रंथ लिखना। हिन्दू अस्मिता के गौरव के रक्षक को 'बिच्छू' बताकर पैशाचिक अट्टाहास करना सेकुलर आक्रमण के नए रूप हैं।
अफगानिस्तान का गजनी गांव प्राय: 1400 किमी दूर है। आना-जाना मानिए 2800 किमी। यह दूरी कुछ प्रतिरोध, रुकावटों के बावजूद कसाई, अनपढ़, असभ्य महमूद 2800 किमी हिन्दू राजाओं-महाराजाओं, सामंतों-जमींदारों, आमजन के बीच से तय कर गया। प्रतिरोध की कथाएं हजार लिख लीजिए, पर कटु यथार्थ यही है। केरल के शबरीमला मंदिर में जाने वाले भक्तों पर दमन करने वाला कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री उस गजनवी या कासिम से कैसे अलग है? सेकुलर, जो सोशल मीडिया पर हिन्दू पूजा-प्रतीकों का भद्दे ढंग से मजाक उड़ाकर खुश होते हैं, कांग्रेस, जो कैलास धाम यात्रा को इश्तहारबाजी व राजनीतिक तमाशे का हिस्सा बना देती है, वस्तुत: ये हिन्दू समाज के एकमात्र बचे भू-स्थल को हिन्दू विहीन करने के गजनवी, मिशनरी षड्यंत्र को सफल बनाने के उपक्रम ही हैं। हिन्दू के नाते, आग्रही हिन्दू के नाते जो भी सोचने वाला समाज है उसका मान-भंग करो- यह रणनीति है।
ईसाई कुटिल प्रचारक संत बन त्रिशूल, धर्म स्तंभ स्थापित करते हैं, वैसे ही कांग्रेसी व अन्य सेकुलर-पादरी स्वयं को बेहतर हिन्दू घोषित करने वाली पुस्तकें लिख आग्रही-हिन्दुओं को विदूषक तथा हिन्दू-मार्ग से च्युत पथविभ्रमित बताते हैं। 'आग्रही-हिन्दू' शब्द पूज्य रज्जू भैया का दिया हुआ है। आग्रही हिन्दू होना सेकुलर पादरियों द्वारा सार्वजनिक जीवन में स्वीकार्य शब्दकोश में अपराध बना दिया गया है। आपसी विद्वेष, घृणा व पहले भीतरी शत्रु को मारने की मानसिकता से ग्रस्त हिन्दू समझ नहीं पा रहा कि सत्ता, चुनाव, मीडिया में निखार उसको उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, हिमालयी क्षेत्र में हिन्दू-क्षरण के दृश्य देखने नहीं दे रहा है। सेकुलर-हिन्दू, 'काले-पहाड़' जैसे मतांतरित हिन्दू की सीमा रहित प्रतिशोधी आक्रामकता के समान हिन्दू आग्रही से युद्ध कर रहा है। मतांतरित हिन्दू, अहिन्दू शत्रु से ज्यादा प्रतिशोधी होता है। मोहम्मद इकबाल के पिता कश्मीरी हिन्दू थे। मतांतरित होकर वे पाकिस्तान के विचार को जन्मने वाले बने। जिन्ना, भुट्टो, शेख अब्दुल्ला, जन. बाजवा- ये कोई अरब से आए मुसलमान थे? मतांतरित करने वाले अब्राह्मिक संप्रदायों की तरह सेकुलरवाद भी प्रोसेलिटाइजिंग (कन्वर्ट करने वाला) मजहब है। पढ़े-लिखे आस्थावान हिन्दू सेकुलर होते ही हिन्दुओं के मन को कुचलने वाले उन्मादी बन जाते हैं। सेकुलर भीड़ जिस उन्माद, निर्ममता से हिन्दू मन पर हमला कर रही है, उसे यदि सही परिप्रेक्ष्य में नहीं समझा गया तो हिन्दुओं को सिर्फ और सिर्फ एक 'इवेन्ट मैनेजमेंट कंपनी' में तब्दील होते ही देखेंगे। हिन्दू पाकिस्तान से घटा, छंटा, मरा। बांग्लादेश में असुरक्षित, श्रीलंका के तमिलों में पूरा यूरोप धन-जन-बल से उन्हें ईसाई बना रहा है, नेपाल में भारत के इन्हीं सेकुलर-पादरियों ने 'हिन्दू राष्ट्र' का विधान हटवा, हजारों यूरोप-ब्रिटेन-अमेरिका पोषित संस्थाओं से वहां ईसाईयत का प्रचार किया है। कहां तो भारत को संपूर्ण विश्व में हिन्दुओं की रक्षा का शक्तिशाली कवच होना चाहिए था और कहां हम शबरीमला में भी संघर्ष कर रहे हैं। बाकी की रक्षा का तो प्रश्न ही नहीं उठता।
(लेखक पूर्व राज्यसभा सांसद हैं)