पाकिस्तान में बेघर हो रहे हिंदू उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर रहे मुसलमान
   दिनांक 07-नवंबर-2018
 मलिक असगर हाशमी                   
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। पहले उनका जबरन कन्वर्जन और अब संपत्तियां छीन कर उन्हें बेघर किया जा रहा है। हिन्दू धर्म स्थलों के नामोनिशान मिटाए जा रहे हैं। हिन्दू उत्पीड़न पर चार कड़ियों की एक शृंखला शुरू की जा रही है। प्रस्तुत है इसकी पहली कड़ी
पाकिस्तान में हिन्दुओं के जबरन कन्वर्जन के खिलाफ सिंध प्रांत में एक सम्मेलन किया गया  
मैं भगवान देवी। पैदाइश-लरकाना। आपसे पुरजोर अपील कर रही हूं। एहसास- ए- महरूमी, लाकानूनियत और बद-इंतजामी ने इलाके में अपनी जड़ें मजबूती से गाड़ ली हैं। मैं चीफ जस्टिस साहब और दुनिया के तमाम मुल्कों से मदद की अपील करती हंू। एंटी लैंड माफिया से आज 14 दिन मुसलसल एहतेजाज करते हो गए। लरकाना प्रेस क्लब के सामने मैं और मेरे शौहर डॉ. भगवान प्रसाद, जो सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं, दुनिया की सबसे बड़ी एहसास-ए-महरूमी, दुनिया की सबसे बड़ी कानूनी नाकामी व दुनिया की सबसे बड़ी बद-इंतजामी के बारे में बताना चाहते हैं। यहां कब्जाखोरी इंतहाई उरूज (चरम) पर है। लैंड माफिया फर्जी पावर आॅफ अटॉर्नी बनाकर हिन्दुओं की संपत्ति छीन रहे हैं और हथियारों के बल पर उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। उन्हें चुप रहने की धमकी दी जा रही है।
लरकाना के अधिकांश हिन्दू संपत्ति बेचकर या इसे छोड़कर दूसरे मुल्कों में जा रहे हैं। सिंधी हिन्दुओं की जमीन तंग कर दी गई है, लेकिन सिंधी कौमपरस्त खामोश हैं और अखबारों के जरिये उनसे सिंध छोड़कर नहीं जाने की अपील कर रहे हैं। कह रहे हैं यहीं रहो, झगड़ा करो। हम इन कौम-परस्तों से पूछना चाहते हैं कि आप क्यों खामोश हैं? मुकामी सिंधियों व हिन्दू सिंधियों के लिए रेड इंडियन जैसे हालात पैदा कर दिए गए हैं। फर्जी पावर आॅफ अटॉर्नी बनाकर हमारी चार एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया और अब उसे प्लॉट की सूरत में बेचा जा रहा है।’’
यह दास्तान है पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना के प्रोफेसर दंपती भगवान देवी व डॉ. भगवान दास की, जो भू-माफिया की ज्यादतियों के शिकार हैं। फर्जी दस्तावेज के जरिये उन्हें संपत्ति से बेदखल कर दिया गया। उनकी चार एकड़ जमीन पर हथियारों के बूते कब्जा कर प्लॉट काट कर बेचे जा रहे हैं। इंसाफ पाने के लिए बुजुर्ग दंपती लगातार सरकारी महकमों के चक्कर काट रहे हैंं और अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। जब चारों ओर से मायूस हो गए तो सवा दो मिनट का वीडियो बनाया व पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश व दुनिया के समक्ष अपनी समस्या रखी। इस वीडियो को उन्होंने ट्विटर पर अपलोड किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार ने संज्ञान लिया और स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट तलब कर 18 अक्तूबर को मामले की पहली सुनवाई भी की। इसके बावजूद प्रोफेसर दंपती को किसी तरह की राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही।
दरअसल, पाकिस्तान में प्रोफेसर दंपती इकलौता ऐसा उदाहरण नहीं हैं। वहां इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। मशहूर अखबार ‘द डॉन’ लगातार ऐसे मामलों को उजागर करता रहा है। पाकिस्तान में कुल आबादी में दो प्रतिशत हिन्दू हैं। 2017 की जनगणना के मुताबिक, देश की कुल 21 करोड़ की आबादी में 36 लाख हिन्दू हैं। इस साल जुलाई में आम चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने मतदाताओं का ब्योरा जारी किया था। इसके मुताबिक, बीते पांच वर्ष में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। 2013 में हिन्दू मतदाता करीब 14 लाख थे, जो अब 17.70 लाख हो गए हैं। पाकिस्तान में सर्वाधिक 40 प्रतिशत हिन्दू मतदाता सिंध प्रांत के 12 जिलों में रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध प्रांत के उमर कोट जिले में 47.6 प्रतिशत थारपरकर में 40.5, मीरपुर खास में 32.7, संघार में 20, बदिन में 19.9, हैदराबाद में 12, घोटकी में 6.7, सक्कर में 3, खैरपुर में 2.9, नवाब शाह में 2.8, थट्टा में 2.8, डाडू में 2 प्रतिशत और पंजाब के रहीम यार खान में 2.3 प्रतिशत हिन्दू हैं। विडंबना है कि हिन्दुओं की तादाद अधिक होने के बावजूद उनका हर तरह से शोषण हो रहा है। पाकिस्तान में गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ापन आम समस्या है। मगर हिन्दुओं में यह समस्या कुछ ज्यादा ही है। मुल्क में उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। बदहाली का आलम यह है कि हिन्दू मंदिर, उनके रिहाइशी इलाके, श्मशान और घर-मकान सब जर्जर हो चुके हैं। इसकी वजह से हाल में पाकिस्तान अल्पसंख्यक गठबंधन ने केंद्र सरकार से हिन्दुओं की स्थिति सुधारने के लिए विशेष बजट जारी करने की अपील की थी। गठबंधन समिति के अरशद मसीह ने सरकार को एक पत्र भी लिखा है। फिलहाल इस पर सुनवाई के आसार कम ही लग रहे हैं।
पाकिस्तान में कट्टरपंथी जमायतों ने भी हिन्दुओं का जीना दुश्वार कर रखा है। उन्हें जबरन कन्वर्ट कराया जा रहा है। हिन्दू बच्चियों की शादी मुसलमानों से कराई जा रही है। स्थिति यह है कि हिन्दू लड़का हो या लड़की, दोनों को कन्वर्जन का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, अब उनकी संपत्ति पर भी कब्जे शुरू हो गए हैं। हिन्दुओं की जमीन, मकान, दुकान व मंदिरों पर अवैध कब्जे कर उस पर बाजार और रिहाइशी इलाके बनाए जा रहे हैं। पाकिस्तान हिन्दू परिषद के नेता मंगल शर्मा कहते हैं कि वे अपनी समस्या के समाधान के लिए चाह कर भी वैश्विक समर्थन हासिल नहीं कर सकते। इस बारे में भारत से कोई मदद लेना भी चाहें तो पाकिस्तान से खराब रिश्ते के कारण यह संभव नहीं है। बीबीसी उर्दू के रियाज सोहले की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी ही समस्याओं से परेशान होकर कराची शहर से सटे एक गांव के बागड़ी जाति के 40 परिवारों ने सिख पंथ अपना लिया था। इसी गांव के कृष्ण सिंह, जो कभी हिन्दू थे, कहते हैं, ‘‘पाकिस्तान में हिन्दुओं के मुकाबले सिखों को अधिक सम्मान से देखा जाता है। लोग उन्हें ‘सरदार जी’ कहते हैं।’’ इस गांव में 500 लोगों की क्षमता वाला एक बड़ा गुरुद्वारे और दो छोटे मंदिर हैं। गुरुद्वारे के संरक्षक दुरू सिंह कहते हैं, ‘‘पहले गांव में मंदिरों पर पथराव होता था। एक बार तो मूर्तियां भी खंडित कर दी गई थीं। मगर मेरी सख्ती के बाद अब कुछ समय से यह बंद हुआ है, अब तो गुरुद्वारे में होने वाले आयोजन के लिए सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जाते हैं।’’
पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ ज्यादती खास तौर से उन इलाकों में हो रही है, जहां तेजी से शहरीकरण हुआ है। इन इलाकों में धड़ल्ले से ऊंची-ऊंची इमारतें बन रही हैं। सिंध प्रांत का लरकाना शहर इन्हीं में से एक है। यह इलाका आम, फूल, गन्ना, गेहूं, अमरूद की खेती के लिए पूरे पाकिस्तान में प्रसिद्ध है। यहां कई पर्यटन केंद्र तो हैं ही, ऐतिहासिक सिंधु नदी भी इसके करीब से गुजरती है। इसके अलावा, लरकाना में खूबसूरत वादियां, मेडिकल कॉलेज और हवाईअड्डा होने के साथ ही बड़ा व्यापारिक केंद्र भी है। इसलिए यहां रियल एस्टेट का कारोबार काफी फल-फूल रहा है। मुनाफा अधिक होने के कारण हिन्दू भू-माफिया के निशाने पर हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वाह के एक शिव मंदिर पर एक गैर सामाजिक संगठन का लंबे समय से कब्जा था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ही यह कब्जा हटाया जा सका। इसी तरह कराची के बीचोंबीच बने अराम बाग गुरुद्वारे पर भी अवैध कब्जा था। इस शहर में आधा दर्जन गुरुद्वारे और थे, जिन पर भू-माफिया ने बाजार बनाकर बेच दिए।
कराची के वकील सरदार हीरा सिंह बताते हैं कि उन्होंने एक साल में 1100 हिन्दुओं को सिख बनाया, ताकि उन्हें कट्टरपंथियों और भू-माफिया से बचाया जा सके। हां, यह बात अलग है कि सिख भी मुल्क में आजादी से जिंदगी नहीं बिता सकते, लेकिन कमोबेश उनकी स्थिति हिन्दुओं से कहीं बेहतर है।
(लेखक हिन्दी पायनियर के हरियाणा संस्करण के संपादक हैं।)