केंद्र सरकार कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे’
   दिनांक 13-दिसंबर-2018

विराट धर्मसभा को संबोधित करते श्री दत्तात्रेय होसबाले
‘‘न्यायालय के निर्णय से स्पष्ट हो चुका है कि श्री रामजन्मभूमि पर जहां विवादित ढांचा खड़ा किया गया था, उस जगह उत्खनन में राम मंदिर के पुरातात्विक अवशेष के रूप में साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इसके पश्चात् भी यह जमीन मंदिर निर्माण के लिये उपलब्ध नहीं हुई। भगवान विष्णु ने वामनावतार में केवल तीन चरणों में तीनों लोकों को नाप लिया था, उन्हीं भगवान विष्णु के अगले अवतार को अपने भव्य मंदिर के लिये जमीन न मिलना यह अतिशय निराशाजनक है।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कही। वे गत 2 दिसंबर को मुंबई के बीकेसी मैदान में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित विराट धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के लिये भूमि प्रदान करे। क्योंकि उस भूमि पर मंदिर था, यह उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है। लेकिन दुख की बात है कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा यह विषय सर्वोच्च न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है। ऐसे में सरकार कानून द्वारा मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। इस मौके पर स्वामी नरेंद्राचार्य महाराजा ने अपने उद्बोधन में कहा कि धर्म मानव का अधिष्ठान है। भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए यदि हमें प्राणों की आहुति भी देनी पड़े तो हम भाग्यशाली होंगे। श्री राममंदिर हिन्दुओं की अस्मिता का प्रश्न है। इसलिए हिन्दुओं का अपनी अस्मिता के लिये जागृत होना आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित गोविंदगिरी जी महाराज ने कहा कि भगवान राम हिन्दुत्व की पहचान हैं। मानवता का सर्वोच्च आदर्श हैं। इस आदर्श को पुनर्स्थापित करने के लिये तत्काल मंदिर निर्माण होना आवश्यक है। सोमनाथ मंदिर की तरह श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जाए।
विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री ड़ॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि युवा पीढ़ी राममंदिर निर्माण लिये एकत्र आई है। मुसलमानों के तुष्टीकरण की राजनीति में कांग्रेस ने रामंदिर का निर्माण नहीं कराया। मैं मुसलमान बंधुओं को बताना चाहता हूं कि बाबर, गजनी तथा अकबर उनके पूर्वज नहीं थे। उनके पूर्वज श्रीराम के वंशज थे। जब कोई देश गुलामी से मुक्त होता है,तब देश से आक्रांताओं की सभी यादें मिटाई जाती हैं। सोमनाथ का मंदिर भी इसी प्रेरणा से खड़ा किया गया। आज सरदार पटेल होते तो राममंदिर के लिये इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता। धर्मसभा में प़पू. जगद्गुरू रामानंदाचार्य, महामंडलेश्वर स्वामी आनंदगिरी महाराज, नयपद्मसागर महाराज सहित अनेक संतजन उपस्थित रहे।