‘‘राम जन्मभूमि का दिव्य स्थान बदला नहीं जा सकता’’
   दिनांक 13-दिसंबर-2018
 
सेमिनार में अपने विचार रखते श्री आलोक कुमार
गत दिनों नई दिल्ली में श्रीराम जन्मभूमि राष्ट्रीय धरोहर की पुनर्स्थापना विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्व हिन्दू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री आलोक कुमार उपस्थित थे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश की आजादी के समय कांग्रेस ने जिस प्रकार इंडिया गेट से जार्ज पंचम की प्रतिमा, ब्रिटिश वायसरायों की प्रतिमाएं नई दिल्ली से हटा दीं, अनेक मार्ग जो ब्रिटिश दासता का बोध कराते थे उनको बदला गया, उसी प्रकार अयोध्या में गिराया गया बाबरी ढांचा भी विदेशी दासता का बोध करवाता था और देश के स्वाभिमान पर धब्बा था। जिस प्रकार शरीर आत्मा निकलने पर मृत हो जाता है और उसे एक दिन भी घर में नहीं रखा जाता, उसी प्रकार भगवान राम के बिना यह भारत भूमि आत्मा विहीन है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर अध्यादेश लाकर बनना चाहिए। जिस स्थान पर श्रीराम का जन्म हुआ वह स्थान दिव्य है और पूज्य है। इसलिए यह बदला नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में भव्य राम मंदिर निर्माण देश की साम्प्रदायिक और सांस्कृतिक एकता को अक्षुण्ण बनाने का बहुत बड़ा सुअवसर है। उन्होंने संगठन की योजना बताते हुए कहा कि हम अलग-अलग स्थानों पर धर्म सभाएं कर रहे हैं। ऐसी 543 धर्म सभाएं देश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में एक साथ करेंगे। उसके उपरान्त सभी सांसदों के पास मतदाता के नाते राममंदिर निर्माण के लिए संसद में अध्यादेश लाने की मांग करेंगे।
जनता के इतने बड़े दबाव को जब वे देखेंगे तो वह संसद में इस बिल के विरोध का साहस नहीं कर सकेंगे। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद प्रो़ राकेश सिन्हा ने भी अपने विचार रखे।