डाटा पर डाका : खतरा तो है!
   दिनांक १३-अप्रैल-२०१८
वर्ष 2014 में हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी डाटा चोरी की घटना, रूस के हैकर ने दिया था इस घटना को अंजाम
 
 
 
आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती है कि हम इंटरनेट का इस्तेमाल किए बिना रह नहीं सकते। सोशल साइटें और तमाम अन्य प्लेटफार्म हमारे दिन प्रतिदिन के जीवन के अंग बन गए हैं। हमारा डाटा यानी हमारे बारे में तमाम निजी और महत्वपूर्ण जानकारी की चोरी अब आम बात हो गई है। ताजा खुलासा फेसबुक का है जिसने कुछ दिन पहले दुनिया के सामने स्वीकार किया कि उसके 08 करोड़ 70 लाख उपयोगकर्ताओं का डाटा चोरी हो गया है। इनमें पांच लाख साठ हजार भारतीय यूजर भी शामिल हैं। वर्ष 2014 में भी डाटा चोरी की एक घटना हुई थी जिसे दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी डाटा चोरी माना जाता है। अमेरिकी इंटरनेट सुरक्षा कंपनी होल्ड सिक्यूरिटी के इस दावे ने दुनिया में हड़कंप मचा दिया था कि एक रूसी हैकर समूह ने पचास करोड़ ईमेल पतों के लगभग सवा अरब यूजरनेम और पासवर्ड हैक कर दिए हैं। बताया गया कि यह डाटा करीब चार लाख बीस हजार वेबसाइटों से चुराया गया था जिनमें इंटरनेट जगत की कई बड़ी कंपनियां और हर बड़ी वेबसाइट शामिल थी।

डाटा चोरी की छोटी बड़ी घटनाएं निरंतर हो रही हैं जिससे पता चलता है कि इंटरनेट पर व्यक्ति की निजता और जानकारी को खतरा अब सब जगह है। जाने माने तकनीकविद बालेन्दु शर्मा दाधीच की इस बात में बड़ा दम है, ' सोशल मीडिया पर इस या उसके हाथों नाहक प्रभावित या इस्तेमाल हो जाना बहुत आसान है। समझिए कि अगर कोई सेवा मुफ्त मिल रही है तो आप ही उसका उत्पाद हैं।'

हम अपने ईमेल एकाउंट के जरिये ही इंटरनेट से जुड़ी तमाम गतिविधियों और सेवाओं से जुड़ते हैं। प्राय: हर हाथ में मोबाइल फोन है। तमाम उपयोगी एप हम डाउनलोड करते हैं। ऊंची रेटिंग हमें कोई एप डाउनलाड करने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन क्या ऊंची रेटिंग हमारी व्यक्तिगत जानकारी के सुरक्षित होने की गारंटी हो सकती है। बालेन्दु दाधीच के अनुसार, ' वह ऊंची रेटिंग फर्जी भी हो सकती है। गूगल सर्च में किसी वेबसाइट का सबसे ऊपर आना तकनीकी चातुर्य का खेल हो सकता है।' उनका कहना है कि सोशल मीडिया साइटों और ईमेल पर भले ही आप कितने भी मजबूत पासवर्ड लगा दें, आपका अधिकांश डाटा किसी विभाग, कंपनी, दल या एजेंसी की पहुंच में हो सकता है।'

संकट कई दिशाओं से

दरअसल निजता की सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को लेकर आज दुनिया के हर देश में चिंता है। कोई भी उपाय सुरक्षा की शत प्रतिशत गारंटी नहीं दे सकता। डाटा चोरी की घटनाओं और इसे लेकर किए गए उपायों की बात करते हुए बालेन्दु दाधीच बताते हैं, 'व्यक्ति की निजता तमाम दिशाओं से संकट में है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां, साइबर अपराधी, राजनीतिक दल, एप बनाने वाले लोग हों, विभिन्न प्रकार के सर्वे करने वाली एजेंसियां हों या फिर खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने वाले संस्थान- यह सूची बहुत लंबी है। ऐसा नहीं कि बचाव के उपाय नहीं किए जा रहे। काफी उपाय किए गए, कदम उठाए गए- तकनीकी भी और कानूनी भी। इसके बावजूद आज बहुत बड़ी चुनौती है सोशल मीडिया पर अपने आपको, अपने विचारों को, अपनी सूचनाओं को और अपनी निजता को सुरक्षित रखना। '