त्रिपुरा में बदलेगा स्कूली पाठयक्रम
   दिनांक १३-अप्रैल-२०१८
 
 स्थानीय संस्कृति और महापुरुषों के बारे में पाठयक्रम में जोड़ा जाएगा
त्रिपुरा के छात्र अब स्कूल में कार्ल मार्क्स, लेनिन और हिटलर के बारे में नहीं बल्कि भारतीय महापुरुषों के बारे में पढ़ाया जाएगा। सरकार सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करवाएगी। सूबे के मुख्यमंत्री बिप्लव देव ने एक इंटरव्यू के दौरान यह घोषणा की है। इसके एक कमेटी बनाई गई है जो इस मामले पर पूरा अध्ययन कर रही है। शिक्षा में सुधार के लिए और गुणवत्ता के लिहाज से ऐसा करने की बात की जा रही है। साथ ही किताबों में 10 फीसदी स्टेट बोर्ड का पाठ्यक्रम भी होगा।
देब कहते हैं कि पिछली सरकार त्रिपुरा बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के सहारे अपनी सोच छात्रों पर मढ़ रही थी। वह वामपंथी प्रोपोगेंडा फैला रही थी। पिछली सरकार चाहती थी कि उसके राज्य के बच्चे सिर्फ माओ के बारे में पढ़ें और अपने महापुरुषों के बारे में भूल जाएं। इस संबंध मे पाञ्चजन्य से बात करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि सरकार का फैसला ठीक है लेकिन एनसीआरटी के पाठ्यक्रम में भी बदलाव की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि वह अपने राज्य के महापुरुषों और वहां की संस्कृति के बारे में भी कुछ चीजें पाठ्यक्रम में शामिल करें। कोठारी कहते हैं कि एनसीआरटी के पाठयक्रम में भी पहले कई गलतियां थीं। उस पाठयक्रम में इतिहास से छेड़छाड़ की गई थी। हमने इसके लिए आंदोलन भी किया। पाठ्यक्रम में बदलाव हुआ कांग्रेस शासित राज्यों ने भी अपने यहां पाठ्यक्रम में बदलाव किया लेकिन त्रिपुरा की वामपंथी सरकार ने ऐसा नहीं किया। वह कहते हैं कि त्रिपुरा के स्कूली पाठ्यक्रम में किताबों में रूस-फ्रांस की क्रांति, इंग्लैंड में क्रिकेट का जन्म, हिटलर आदि के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में नहीं पढ़ाया जाता है। किताबों में रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस आदि के बारे में जानकारी नहीं है।
भाषा शिक्षा विभाग हिंदी एनसीआरटी के एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोद दुबे कहते हैं कि एनसीआरटी का पाठयक्रम जब बनाया जाता है तो देशभर को ध्यान में रखकर विशेषज्ञों की देखरेख में तैयार होता है। त्रिपुरा में इसे अभी तक लागू नहीं किया था अब यदि राज्य सरकार ऐसा करना चाहती है तो वह प्रशंसनीय है।