खबरों में बेईमानी का खेल कब तक?
   दिनांक १९-अप्रैल-२०१८
केरल के मुस्लिम बहुल जिलों में अल्पसंख्यक हिंदू लड़कियों के साथ बलात्कार पर मीडिया चुप



बीते दिनों असम के 9 मुस्लिम बहुल जिलों में बलात्कार की कई घटनाएं हुईं। अधिकांश में आरोपी मुसलमान और पीडि़त अल्पसंख्यक हिंदू लड़कियां हैं। अगर आप दूसरे राज्य में रहते हैं तो शायद ही इन घटनाओं के बारे में सुना होगा, क्योंकि तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया इन घटनाओं की 'सेंसरशिप' करता है। जम्मू के कठुआ में ऐसी ही एक अप्रिय घटना पर उसी मीडिया ने इसे 'बहुसंख्यक हिंदुओं के मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर हमले' के तौर पर दिखाया। कहना न होगा कि खबरों में बेईमानी इस बात का सबूत है कि मुख्यधारा मीडिया महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में संवेदनशीलता का सिर्फ दिखावा करता है।
बंगाल में पंचायत चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने जा रहे भाजपा उम्मीदवारों से मारपीट के कई वीडियो बीते हफ्ते सामने आए। भाजपा के एक उम्मीदवार पर जानलेवा हमला किया गया। इसे ममता बनर्जी का डर कहें या मीडिया का पक्षपाती रवैया कि कुछ चैनलों को छोड़ ज्यादातर पर इससे जुड़ी खबरें गायब रहीं। जिन चैनलों व अखबारों ने इस पर रिपोर्ट दी, उन्होंने इसका पूरा ध्यान रखा कि ममता पर कोई आंच न आए। अधिकांश ने इस गुंडागर्दी को तृणमूल और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच 'झड़प' का नाम दिया। उधर, कांग्रेस प्रायोजित मीडिया राहुल गांधी को फिर से 'चमत्कारिक नेता' साबित करने में जुटा है।
कर्नाटक में राहुल के चुनाव प्रचार की अधिकांश खबरें सकारात्मक मिलेंगी। जब उन्होंने रैलियों में कहा कि मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति के आरक्षण को खत्म कर दिया है, तब भी एक-दो को छोड़ किसी चैनल या अखबार ने यह कहने की हिम्मत नहीं दिखाई कि वे लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जब सोशल मीडिया पर इस ओर लोगों का ध्यान खींचा, तब कुछ चैनलों, अखबारों ने यह कहते हुए खबर प्रकाशित की कि अमित शाह ने राहुल पर आरोप लगाया है। मीडिया राहुल के 2 घंटे के कथित उपवास को भी 'ऐतिहासिक' साबित कर देता, अगर सोशल मीडिया न होता। उपवास से पहले छोले-भठूरे खाते कांग्रेसी नेताओं की जो तस्वीर सामने आई वह सोशल मीडिया का काम था, किसी चैनल का नहीं। 2 अप्रैल के भारत बंद के दौरान राहुल और उनकी पार्टी ने लोगों को उकसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुंबई की जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। शक है कि उन्हें जहर दिया गया। वे खुद भी कह रही हैं कि जेल में उनकी हत्या की कोशिश हो रही है, पर मीडिया ने खबर को दबा दिया। जिसने दिखाया भी तो यह नहीं बताया कि किस नेता को इंद्राणी से खतरा है। बता दें कि इंद्राणी की गवाही के कारण ही कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का बेटा कार्ति जेल गया था।
राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल का प्रदर्शन इस बार बहुत अच्छा है। भारत के अच्छे प्रदर्शन के लिए खिलाडि़यों की मेहनत व केंद्र सरकार के प्रोत्साहन की प्रशंसा हो रही है। किंतु मीडिया के एक वर्ग को आपत्ति है कि केंद्र इसका श्रेय क्यों ले रहा है। कुछ चैनलों ने तो इस पर बहस भी करा डाली। सलमान खान को सजा हुई तो मीडिया ने चुनिंदा तरीके से बयान चलाए, ताकि एक अपराधी के लिए सहानुभूति जगाई जा सके। यहां तक कि सलमान के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले बिश्नोई समाज को भी बदनाम करने की कोशिशें हुईं। कुछ चैनलों ने कहा कि सलमान को अगर जेल भेजा गया तो बिश्नोई लोग उसकी हत्या कर देंगे। स्वनियंत्रण का दम भरने वाली संस्था एनबीए क्या इस बात का संज्ञान लेगी कि चैनलों ने उसके दिशानिर्देशों का क्यों और कैसे हनन किया