पाकिस्तान/हिन्दू उत्पीड़न-जाएं तो जाएं कहां?

द हिंदू अमेरिका फाउंडेशन’ की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, वहां उन्हें हिंसा, सामाजिक उत्पीड़न और हाशिए पर डाल दिए जाने के हालात का सामना करना पड़ रहा है

  पाकिस्तान जब बनाया गया था तो कहा गया था कि हिंदू और मुसलमान एक नहीं, दो अलग मुल्कों में ही रह सकते हैं। किंतु, भारत में मुसलमान न केवल सुख से हैं, बल्कि तरक्की भी कर रहे हैं। उनकी आबादी भी बड़ी है। भारत में उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता है। वे अपने हक के लिए आवाज भी बुलंद कर लेते हैं। पर पाकिस्तान में स्थिति ठीक उलट है। इस्लाम के नाम पर बने ‘पाकिस्तान’ में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई सम्मान एवं स्थान नहीं है। विभाजन के बाद से वहां हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ने की बजाय लगातार कम होती गई है। अपने अधिकारों की बात करना तो दूर, हिंदू वहां अपने अस्तित्व के लिए ही संघर्ष कर रहे हंै। उनके सामने तीन ही विकल्प हैं- एक, पाकिस्तान में रहना है तो अपना धर्म छोड़ कर इस्लाम कबूलो। दो, मुस्लिम नहीं बने तब जबरन कन्वर्जन के लिए तैयार रहो या मरो। तीन, अपने स्वाभिमान को बचाना है तो पाकिस्तान छोड़ दो।

इसलिए होते हैं कन्वर्ट

 सरकार के सराहनीय प्रयास