‘‘सभी छत्रसाल जैसे बनें, यह प्रयास करना होगा’’
   दिनांक ०२-अप्रैल-२०१८

 

 

मध्य प्रदेश के छत्तरपुर स्थित महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान की तीन वर्ष की मेहनत बुन्देलखण्ड केसरी महाराज छत्रसाल की 52 फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण के साथ सार्थक हुई। गत दिनों प्रतिमा का अनावरण राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महापुरुषों ने अपनी प्रभुता स्थापित करने के लिए युद्ध नहीं किए, बल्कि धर्म-संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं। यकीनन जब तक धर्म और संस्कृति सुरक्षित है, तब तक समाज सुरक्षित है। महाराजा छत्रसाल ने जिस तरह नि:स्वार्थ भाव से सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर उद्यम किया, उसी से हमारी संस्कृति सुरक्षित है। हमें इस अवसर पर उनकी राह पर चलने का का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम अनंत और शाश्वत हैं। उनके समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आकर देश और समाज को दिशा देने का काम भारत के अलावा अन्यत्र कहीं नहीं हुआ। समाज को सदैव अपने महापुरुषों की ओर से प्रेरणा मिली है। इसलिए बुन्देलखण्ड की इस पावन भूमि में महाराजा छत्रसाल के आदर्श को जीवित रखने का यह प्रयास किया जा रहा है, जिसे हम सभी को मिलकर सार्थक करना है। श्री भागवत ने कहा कि सत्य अनुकूल होता है, वही जीता है और उसके लिए ही तपस्या करनी पड़ती है। इसी कारण हम छत्रसाल का स्मरण कर एक गौरव गाथा को स्थापित कर रहे हैं, लेकिन हम भी छत्रसाल जैसे बनें, यह प्रयास करना होगा। आज भी यह सब हो सकता है, जो उन्होंने किया। सत्य रहे, असत्य जाए, धर्म रहे, अधर्म जाए, जब हम उस सत्य के योग्य बन जाते हैं तो सब कुछ होता हुआ देखते हैं। महाराजा छत्रसाल ने इतना उद्यम अपने लिए नहीं किया। केवल छत्रसाल ही नहीं महाराणा प्रताप, शिवाजी आदि अन्य महापुरुषों ने यह सब धर्म की स्थापना के लिए किया था, क्योंकि धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहेगी तभी दुनिया रहेगी। महाराजा छत्रसाल ने जितना महान त्याग इस क्षेत्र के लिए किया, उसका थोड़ा सा भी अंश हम अपने जीवन में ग्रहण कर लें तो क्षेत्र का कल्याण हो सकता है और समाज का भी। श्री भागवत ने सभी से आह्वान किया कि विशाल मूर्ति का अनावरण किया गया है, लेकिन यहां आए लाखों लोग यह संकल्प लें कि मूर्ति के पीछे जीवन की जो सुंदरता रही, उसे हम अपनाएंगे। जब तक इस विशाल प्रतिमा के पीछे का जीवन नहीं समझेंगे, तब तक बुन्देलखण्ड की गरिमा आगे नहीं बढ़ेगी। इसलिए हमें महान राष्टÑभक्तों से प्रेरणा लेनी होगी। यदि बुन्देलखण्ड को मजबूत करना है तो छत्रसाल बनना पड़ेगा।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित मलूक पीठाधीश्वर, वृंदावन के प्रसिद्ध संत डॉ़ राजेन्द्र दास देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि मध्य प्रदेश ही नहीं पूरे देश में महाराजा छत्रसाल के चरित्र को पाठ्यक्रम में शामिल कर विद्यार्थियों को पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराजा छत्रसाल एक वीर योद्घा थे, यदि उन्हें बुन्देलखण्ड की धरती के महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। ऐसे महापुरुषों के जीवन द्वारा समाज के किए कार्यों से शिक्षा लेनी होगी। कार्यक्रम के अंत में महाराजा छत्रसाल स्मृति शोध संस्थान के अध्यक्ष भगवतशरण अग्रवाल ने अतिथियों, संतों सहित कार्यक्रम के साक्षी बने लोगों का आभार व्यक्त किया।  (विसंकें, छत्तरपुर)