कठुआ कांड: हमें और उस बच्ची दोनों को इंसाफ चाहिए
   दिनांक 22-अप्रैल-2018

परत दर परत कठुआ कांड से परदा उठता जा रहा है। हमने अपनी पहली किश्त में आपको कठुआ कांड से जुड़े उन साक्ष्यों को बताया जो लोगों से छिपाए गए। इसके बाद हमने चार्जशीट के वो झोल आपको बताए जिन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कठुआ कांड की ग्राउंड रिपोर्ट करने के इसी क्रम में हमने इस पूरे मामले को लेकर 18 दिन से पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित कूटा मोड़ पर आमरण अनशन पर बैठीं मुख्य आरोपी सांझीराम की बेटी मधुबाला से बात की। वह अपने पिता को निर्दोष बताते हुए घटना की सीबीआई जांच की गुहार लगा रही हैं। प्रस्तुत है पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र से हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश:-
 
आप 18 दिन से आमरण अनशन पर बैठी हुई हैं? आपकी मांग क्या है?
 
सबसे पहले तो मैं यही कहना चाहूंगी कि अपराध, अपराध होता है। वह कोई भी क्यों न करे। एक छोटी बच्ची की हत्या कर दी गई। इसमें जो भी अपराधी शामिल हों उनको कड़ी से कड़ी सजा मिले,लेकिन किसी निर्दोष को क्यों फंसाया जा रहा है? क्यों किसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है? पुलिस को जब बच्ची का शव मिलता है तब कुछ लोगों द्वारा गांव के लोगों के नाम लेकर खुलेआम कहा जाता है कि फलां लोगों को घरों से उठाओ। इसके बाद उन्हीं लोगों ने जो कहा, जांच वैसी ही चली। फिर सबको हिरासत में लिया गया। कुछ दूसरे समुदाय के लोगों को हिरासत में लिया जाता है लेकिन उन्हें छोड़ दिया जाता है। न उनकी ठीक ढंग से जांच हुई और न ही अधिकारियों ने दबाव डाला। सब कुछ हमारे परिवार को ही लक्षित करके किया गया। इसका सबसे बड़ा सुबूत पुलिस की बनाई गई चार्जशीट है, जिसे देखकर पता लग जाता है कि जांच कितनी निष्पक्ष हुई है। मेरी सिर्फ एक ही मांग है कि घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिए ताकि जो सच है वह सामने आए। हमें और उस बच्ची दोनों को इंसाफ चाहिए। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती हम ऐसे ही धरने पर बैठे रहने वाले हैं।
 
आपको क्या लगता है कि पुलिस किसी के दवाब में गांव के लोगों को फंसा रही है?
 
बिल्कुल, ऐसा ही है, पुलिस किसी न किसी दबाव में काम कर रही है। रही साजिश की बात तो जब घटना की जांच चल रही थी तभी विधानसभा में नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस ने जांच के समय जो रवैया अपनाया वह हैवानों जैसा था। अपराध नहीं किया, फिर भी अपराध कुबूल करो। यह दबाव नहीं तो क्या है? जब किसी को निर्मम तरीके से प्रताड़ित करोगे तो कोई भी व्यक्ति पुलिस के आगे झुक ही जाएगा।
 
मीडिया का रुख कैसा रहा?

इस मामले में पूरी तैयारी के साथ सोशल मीडिया, टीवी चैनल और अखबारों ने जो मन में आया वह लिखा। झूठी बातें फैलाई गईं, खबरें चलाई गईं। पूरे देश में नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की गई। जब मीडिया ने दिल्ली से बैठकर ही आरोपी-अपराधी सब घोषित कर दिए तो फिर ऐसे मीडिया का क्या करना। यदि वे लोग घटनास्थल पर आए होते, जमीनी हकीकत देखी होती और जो सच होता उसे दिखाते तब हमें भी लगता कि उन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। मैं अभी भी मीडिया के लोगों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूं कि आप कुछ मत करो सिर्फ चार्जशीट ले लीजिए और मौके की पड़ताल कीजिए। फिर जो सच हो वह दिखाइये। हकीकत देश के सामने होगी। लेकिन हमारी कौन सुनेगा, हिन्दू हैं उसी का फल भुगत रहे हैं।

गांव से हिन्दू परिवारों की पलायन में कितनी सचाई है?
 
इसमें सौ फीसदी सचाई है। पहले पुलिस ने रसाना के अलावा कई गांव के लड़कों को उठाना शुरू किया, इसके अलावा घर में जितने पुरुष थे उन सब लोगों को मारना-पीटना और उन पर दबाव बनाना शुरू किया। ऐसे में डर के चलते पूरा का पूरा गांव खाली हो गया। आज भी कुछ लोग धरने पर बैठे हैं तो कुछ बाहर हैं। ऐसे डर के माहौल में कैसे कोई अपने घर में रह सकता है। पुलिस ने हमारे साथ ज्यादती की है। हम तीन महीने से हाथ जोड़कर एक ही मांग कर रहे हैं कि घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिए ताकि सच सबके सामने आए और बच्ची को इंसाफ मिले। प्रधानमंत्री से मेरा एक ही निवेदन है कि हम भी आपके बच्चे हैं। आप नारी शक्ति की बात करते हैं तो हमें विश्वास होता है कि हमारे ऊपर जो जुल्म हुआ और हो रहा है, उसे आप सुनेंगे और घटना की सीबीआई जांच कराएंगे।