बदल रही है भारतीय खेल जगत की तस्वीर
   दिनांक 23-अप्रैल-2018
गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की सफलता एक नई दिशा और दशा की ओर इशारा करती है। यह कामयाबी एक बदलते भारत की, खेल में भारत की बदलती संस्कृति और खिलाड़ियों के बदलते रवैये की तस्वीर पेश करती हैं। विश्व खेल जगत में अपनी एक पहचान बनाने की राह पर अग्रसर भारत के लिए यह एक सुनहरी शुरुआत है, जो योजनाबद्ध तरीके से की गई तैयारियों और खिलाड़ियों की बदलती मानसिकता का नतीजा है। यह मानना है केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का। प्रस्तुत हैं राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से प्रवीण सिन्हा की बातचीत के प्रमुख अंश


राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को मिली सफलताओं पर आपकी क्या राय है?
वाकई यह शानदार प्रदर्शन कहा जाएगा। हमारे खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। खेल एक ऐसा जरिया है जिससे खिलाड़ियों की महत्वाकांक्षाएं और देश की उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। हमारे खिलाड़ी इस लिहाज से उम्मीदों पर खरे उतरे। कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों ने आशातीत सफलता हासिल की, लेकिन यह देखकर अच्छा लगा कि कई युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। दुनियाभर में देश का झंडा लहराने का जो मौका हमारे खिलाड़ियों को मिला, उसका उन्होंने पूरा फायदा उठाया। अब युद्ध के मैदान में जीत हासिल कर अपना झंडा लहराने का दौर नहीं रहा। उसकी जगह खेल के मैदान पर जीत हासिल कर देश का नाम रोशन करने और देश को गौरव प्रदान करने का दौर है। ठीक वैसा ही काम हमारे युवा खिलाड़ियों ने गोल्ड कोस्ट में सफलताएं हासिल कर किया है। उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने से खेलों में जो जीत मिलती है, उसकी तरंगें हर क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
ये सफलताएं क्या संकेत देती हैं?
यह एक बदलते भारत और बदलती खेल संस्कृति का द्योतक है। युवा खिलाड़ी आज देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि खिलाड़ियों की मानसिकता काफी बदल चुकी है। अब वे महज भागीदारी के लिए किसी प्रतियोगिता में नहीं उतरते। अब भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना होता है। भारतीय खिलाड़ी कौशल और तकनीक के मामले में दुनिया के खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इसके पीछे कई कारक काम कर रहे हैं जिसके नतीजे सामने आने लगे हैं। यह सकारात्मक सोच भारतीय खेल जगत को सही दिशा में अग्रसर कर रही है। हमारे खिलाड़ियों का यह रवैया और जीत हासिल करने के लिए आवश्यक आक्रामकता नए भारत की तस्वीर पेश करती है।
कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना दबदबा बना लिया है। इन सफलताओं के पीछे आप क्या कारण मानते हैं?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलताएं हासिल करने के पीछे एक लंबी प्रक्रिया होती है। इसके लिए योजनाबद्ध ढंग से तैयारियां की जाती हैं और खासी मेहनत से खिलाड़ियों का जत्था तैयार किया जाता है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए खेल से पूरी तरह से जुड़े और जानकार पेशेवर लोगों की एक टास्क फोर्स बनाई जिसने देश भर से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस क्रम में टारगेट ओलंपिक पोडियम (टप) योजना की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई। इसके तहत जिन खिलाड़ियों से पदक की सबसे ज्यादा उम्मीद की जाती है, उन्हें एलीट प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की जाती है जो सामान्य प्रशिक्षण से एकदम अलग होता है। एथलीट प्रशिक्षण में कड़ी मेहनत ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने की व्यवस्था होती है, जबकि उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम की निरंतर निगरानी की जाती है। इसके लिए खेल मंत्रालय और खेल से जुड़े अधिकारी सतत प्रयास में जुटे रहते हैं। इसके अलावा देश के शीर्षस्थ खिलाड़ियों को पेशेवर मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स मेडिसिन के विशेषज्ञों की सेवाएं प्रदान की जाती हैं। हमें खुशी है कि उसके सकारात्मक परिणाम आने शुरू हो चुके हैं।
कुछ राज्य विशेष के खिलाड़ियों ने गोल्ड कोस्ट में शानदार प्रदर्शन किया। क्या खेल मंत्रालय अन्य क्षेत्रों में खेल को बढ़ावा देने या प्रतिभा तलाशने का काम कर रहा है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए देश के अंदर खिलाड़ियों और विभिन्न राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता एक अच्छी बात है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार करने में हर राज्य सरकार की भूमिका होती है। केंद्र सरकार की भूमिका उन्हें समर्थन देना और आर्थिक मदद प्रदान करना होती है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों को हर तरह की सुविधाएं और मदद देने को तत्पर रहती है। इस क्रम में किसी क्षेत्र विशेष पर नहीं, बल्कि प्रतिभा तलाशने और उन्हें तराशने पर विशेष जोर दिया जाता है।
क्या युवा खिलाड़ियों के तेजी से उभरने के पीछे जमीनी स्तर पर उन्हें तलाशने और तराशने की योजना की भूमिका रही?
हमारे प्रधानमंत्री की सोच रही है कि युवा खिलाड़ियों को पढ़ाई-लिखाई के साथ ज्यादा से ज्यादा खेलों से जोड़कर उन्हें स्वस्थ रखने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए। इस लिहाज से खेल मंत्रालय सबसे ज्यादा ध्यान निचले स्तर पर दे रहा है। इसके तहत हमने कैच देम यंग योजना बनाई और स्कूली स्तर के बच्चों को खेल से जोड़ने का प्रयास किया। खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में खासी सफलता मिली। युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त स्टेडियम में प्रदर्शन करने का मौका मिला और उनके लिए ऐसा माहौल तैयार किया गया ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन करने के लिए खुद को तैयार कर सकें। खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में पहली बार शिक्षा और खेल विभाग को एक साथ जोड़ा गया। अब तक जो अभिभावक अपने बच्चों को वार्षिक खेल-कूद तक ही सीमित रखते थे, वे अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा खेलों से जोड़ने के इच्छुक दिख रहे हैं। खेलो इंडिया को सफल बनाने के लिए 100 घंटे का एच.डी. (हाई डेफिनेशन) प्रसारण किया गया, जबकि बच्चों को आभास कराया गया कि खेलकूद के जरिए उन्हें तमाम सुविधाएं मिल सकती हैं। यही नहीं, युवा खिलाड़ियों को तलाशने और तराशने के क्रम में देश के हर जिले में ऐसे स्कूल खोले जाएंगे जहां विश्व स्तरीय खेल सुविधाएं होंगी और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले साल 50 जिलों में ऐसे स्कूल ढूंढे जा रहे हैं जहां अच्छी पढ़ाई के साथ बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं भी प्रदान की जा सकें। इसके लिए सरकार पहले साल 10 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस योजना के तहत आठ से 16 वर्ष के खिलाड़ियों को तलाशा और तराशा जाएगा, उन्हें मदद भी दी जाएगी। इस तरह से अगले आठ-दस वर्ष में हमारे पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की एक लंबी फौज तैयार हो जाएगी जो 17-18 वर्ष की आयु में देश का नाम रोशन करने को तैयार होगी।
स्कूल गेम्स की सफलता के बाद सरकार कॉलेज गेम्स कराने की भी तैयारी कर रही है, जबकि मणिपुर में 500 करोड़ रुपए की लागत से राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इसके तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों के तमाम खिलाड़ियों को जोड़ा जाएगा। यह देश में नई खेल संस्कृति के पनपने में कारगर साबित होगी। इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम (टप) के खिलाड़ी लिए एक ऐसे मोबाइल ऐप से जोड़े जाएंगे जो दैनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम व तैयारियों से संबंधित मसलों पर सीधे खेल मंत्री और शीर्षस्थ अधिकारियों के साथ संवाद कर सकेंगे।