कठुआ में हुई घटना को कांग्रेस ने ही दिया मजहबी रंग
   दिनांक 23-अप्रैल-2018
कठुआ की ग्राउंड रिपोर्ट करने के दौरान हम रोजाना नए खुलासे कर रहे हैं। क्या कठुआ की घटना को मजहबी रंग देने की कोशिश की गई ? मामले की जांच में जुटी पुलिस टीम क्या किसी दबाव में काम कर रही है ? क्या चार्जशीट पर उठाए जा रहे सवाल सही हैं? ऐसे तमाम बिंदुओं पर हमने जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह से विशेष बातचीत की। उन्होंने माना कि कुछ अराजक तत्व जम्मू को अशांत करने की साजिश रच रहे हैं। रसाना की घटना को मजहबी रंग दिया गया। प्रस्तुत है पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र से हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश:—


कठुआ के रसाना में एक बच्ची का शव बरामद किया गया, यह सत्य है। लेकिन जिस तरह से उसे मजहबी रंग दिया गया, उस पर आप क्या कहेंगे?
यह घटना बेहद दुखद है कि एक आठ साल की बच्ची की हत्या होती है। आरोप यह भी है कि उसके साथ बलात्कार भी हुआ। लेकिन जो परिवार धरने पर बैठे हैं, वे सभी गांव वाले कह रहे हैं कि बच्ची को न्याय मिलना चाहिए। हां, जांच पर वे सवाल जरूर उठा रहे हैं। लेकिन इस पूरी घटना में एक बात स्पष्ट है कि इसे साजिशपूर्वक एक सांप्रदायिक और मजहबी रंग दिया गया। हुर्रियत, जेएनयू गैंग और यहां तक कि पाकिस्तान की ओर से जम्मू के वातावरण को विषाक्त कर दिया गया है। ये वही गुज्जर-बक्करवाल हैं जो हमारे घरों में रहते हैं। मेरे खुद की जमीन में दो डेरे इनके हैं। वे गर्मियों के कारण चले गए लेकिन बच्चे अभी वहीं हैं। ये लोग गरीब हैं लेकिन बड़े मेहनतकश हैं। दूसरी बात, करगिल या फिर अन्य जगहों से होती घुसपैठ के बारे में यही गुज्जर-वक्करवाल बताते हैं। लेकिन यह तय है कि इस घटना को मजहबी रंग देने का काम अराजक तत्वों ने किया है। खासकर जम्मू क्षेत्र की जब हम बात करते हैं तो। कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों, सिखों और यहां तक कि जो कश्मीरी भाषी नहीं थे उन्हें मारा तो वे सभी भाग कर जम्मू ही आए। यहां तक कि कुछ मुस्लिम भी आए। लेकिन कभी जम्मू रेंज में ऐसा नहीं हुआ था। जम्मू के लोग बड़े समझदार हैं। यहां सदियों से भाईचारा रहा है। धीरे-धीरे चीजें संभल जाएंगी।
 
क्या आप मानते हैं कि यह घटना एक साजिश का अंग है?
देखिए ,यह घटना जनवरी में हुई। जो हमारे मंत्रियों के ऊपर आरोप लगे वे मार्च के हैं। यहां के अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष के कांग्रेस से क्या संंबंध हैं, सभी को पता है। कांग्रेस के लोग प्रत्यक्ष रूप से एके47 की बात कर रहे थे। इसे देखकर यही कह सकते हैं कि भेड़ की खाल में भेड़िये हैं। यहां भी जम्मू को अशांत करने के लिए कांग्रेस दुष्प्रचार करती रहती है। जैसे कर्नाटक में लिंगायत को बांटने की बात हो, मक्का मस्जिद में उनकी पार्टी के नेता द्वारा बोला गया झूठ हो, गोमांस को लेकर हल्ला मचाना हो, कश्मीर में सैनिक कॉलोनी बनाने की बात हो या फिर कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को बसाने की बात, तब यही हुर्रियत, उमर अब्दुल्ला और विपक्ष के लोग बोलते हैं कि कश्मीर की भौगोलिक स्थिति परिवर्तित करने का प्रयास किया जा रहा है। यहां माहौल अशांत करना उनका षड्यंत्र है, यहां तक कि पाकिस्तान से भी दिशा-निर्देश अराजक तत्वों को मिल रहे हैं। जिस दिन से राज्य में भारतीय जनता पार्टी और पीडीपी की सरकार बनी है उस दिन से षड्यंत्र शुरू हो गए। जम्मू सीमा की दृष्टि से भी बड़ा संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसी कोशिशें बराबर हो रही हैं, लेकिन जम्मू के लोगों ने शांति से इसका जवाब दिया है।
कठुआ की घटना में मीडिया के एक धड़े द्वारा भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए गए। क्या कहेंगे आप मीडिया के रुख पर ?
मैंने इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया के रुख को देखा है। मीडिया दो हिस्से में बंट गया है। लेकिन मीडिया को चाहिए कि घटना की जो सत्यता है, उसे देश के सामने बिना किसी पूर्वाग्रह के लाए। मैं कहूंगा कि मीडिया यहां आए और सच को दिखाए। हां, मनगढ़ंत खबरों से समाज का माहौल विषाक्त होता है।
 
गांव के लोग जांच पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस निष्पक्ष रूप से जांच नहीं कर रही है। आपका इस पर क्या मत है?
देखिए, अपराध शाखा की जांच हुई है। जब मामला हुआ तो विधानसभा चल रही थी। तब पुलिस ने इस पर तत्काल कार्रवाई शुरू की। विधान सभा में कांग्रेस, एनसी की ओर से मजिस्ट्रेट जांच की मांग की गई तो उसको भी मान लिया गया। इसके बाद अपराध शाखा की बात हुई तो अपराध शाखा को जांच की जिम्मेदारी दी। हां, एक अधिकारी इसमें ऐसा था जिस पर बलात्कार का आरोप रहा है। हमने इसका विरोध किया और अधिकारियों से जवाब-तलब किया। तब बताया गया कि वरिष्ठता के क्रम के अधिकारियों में जो आया,उसे इस टीम में लिया गया। रही बात निष्पक्ष जांच की तो मेरे पास जो जानकारी है, उसके मुताबिक उन अधिकारियों का कहना है कि हमने बड़ी ही निष्पक्षता से इस मामले की जांच की है। हां, इसके बावजूद भी अरोपियों के परिवारवालों को लगता है कि सीबीआई जांच होनी चाहिए। तो मामला न्यायालय में है। अगर न्यायालय सीबीआई या जो भी जांच कराने का आदेश देती है तो वह हम कराएंगे।
 
रसाना सहित कई गांव के लोगों का आरोप है कि अपराध शाखा के अधिकारियों ने लोगों से जबरदस्ती बयान लिए, जिसके बाद कई परिवार पलायन करने पर मजबूर हुए। कितनी सचाई है इस बात में?
शुरू-शुरू में ऐसी शिकायतें मेरे पास आई थीं। मैंने तत्काल इस पर कार्रवाई की और पुलिस को सख्ती से कहा कि निर्दोष लोगों पर ऐसी प्रताड़ना बिल्कुल भी न करें। फिर ऐसा नहीं हुआ। दूसरी बात पलायन भी शुरू-शुरू में हुआ है।
राज्य में 6 हजार से अधिक रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये रह रहे हैं। धारा 370 के तहत यहां कोई भी नहीं बस सकता है।
 
क्या इन लोगों पर कोई कार्रवाई करेंगे?
देखिए, रोहिंग्या-बांग्लादेशी विदेशी हैं और यह कांग्रेस के समय में यहां आकर बसे हैं। कांग्रेस के विधायक और मंत्रियों ने इन्हें बसाया है। उन्हें सुविधाएं दी गर्इं। हां, मैं मानता हूं कि यह सरकारी जमीन पर भी बसे हुए हैं। आर्थिक अभाव के चलते इनका समाज विरोधी तत्वों द्वारा किसी भी गलत काम में उपयोग किया जा सकता है। मेरा मानना है कि पाकिस्तान ऐसे लोगों का प्रयोग कर सकता है। ऐसे में केन्द्र सरकार से मेरी बात चल रही है कि इनको जम्मू से हटाकर देश के किसी अन्य कोने में ले जाएं। यहां इनका रहना खतरे से कम नहीं है।
 
कश्मीरी पंडितों की घर वापसी कब होगी?
देखिए, इस विषय पर एक तो व्यावहारिक बात है तो दूसरी भावनात्मक बात है। मैंने जो कोशिश की वह यह है कि 6 हजार यूनिट तीन जगह बन रही हैं। कुछ नौकरियां पहले भी निकलीं और आज के समय काफी मुलाजिम वहां काम भी कर रहे हैं। अब व्यावहारिक दिक्कत है कि जो लोग वहां नौकरी कर रहे हैं उनके परिवार जम्मू में हैं। दूसरी बात कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा करना भी एक विषय है। हमारी मंशा में कोई कमी नहीं है। लेकिन सरकार की ओर से प्रयास चल रहे हैं कि उन्हें वहां बसाया जाए।