‘वैदिक परंपराओं का संरक्षक है जनजातीय समाज’
   दिनांक 24-अप्रैल-2018
 
 
इन दिनों मुंबई के निकट डहाणू क्षेत्र के तलासरी में जनजातीय छात्रों के लिए संचालित छात्रावास की स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। इसके तहत 15 अप्रैल को हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें 60,000 से अधिक लोग उपस्थित थे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि जनजातीय समाज कभी दुष्ट शक्तियों की शरण में नहीं गया, बल्कि उनसे लड़ता रहा। सनातन हिंदुत्व और वैदिक परंपराओं को संरक्षित करने का काम इसी समाज ने किया। हमने जिन्हें उपेक्षित रखा, वे जनजाति हमारे बंधु हैं। इन जनजातियों के बारे में समाज को बताना हमारा कर्तव्य है। जनजातियों को प्रगति का अवसर मिलना जरूरी है। अगर हम अपनी आयु का तीन तिहाई समय इस समाज की उन्नति में देते हैं, तो बहुत जल्दी अनेक लोगों के स्वार्थ की दुकानें बंद हो जाएंगी। ये दो बिल्लियों का झगड़ा सुलझाने के बहाने मक्खन खाने वाले बंदर के वारिस हैं। इस बाबत समाज को सजग रहना जरूरी है। श्री भागवत ने हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था द्वारा प्रकाशित ‘वन जन गाथा’ पुस्तक का लोकार्पण भी किया। इसके पश्चाात् उन्होंने तलासरी जाकर प्रकल्प का अवलोकन भी किया। इस प्रकल्प की स्थापना माधवराव काणे ने की थी। इसका संचालन विश्व हिंदू परिषद् कर रही है।