देश-काल के अनुकूल हो अर्थनीति’
   दिनांक 24-अप्रैल-2018
 
 
गत 16 अप्रैल को मुंबई में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि हमें भारतीय दृष्टिकोण, मूल्य और अपनी राष्ट्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी आर्थिक नीति बनाने की आवश्यकता है। दुनियाभर में अलग-अलग अर्थ विचारों की निर्मिति हुई है। उनमें से जो कुछ अच्छा और हितकारक है, उसे हमें लेना चाहिए, पर हमें अपने देश की अर्थनीति स्व-आधार पर ही निर्धारित करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि देशभर में पिछले कुछ दशकों से ‘इज्म’ के बारे में बड़े पैमाने पर बोला जा रहा है, लेकिन उसका दायरा सीमित है। ‘इज्म’ में हमें कुछ सवालों के उत्तर मिलेंगे, कुछ के नहीं। इसलिए हमारी नीति किसी ‘इज्म’ के दायरे में सीमित नहीं होनी चाहिए। जिस नीति से समाज के अंतिम व्यक्ति को लाभ हो, अंत्योदय का विचार हो, वही नीति हमारे लिए उचित रहेगी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है। फिलहाल अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.3 प्रतिशत है। आगामी साल इसके 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है और 2018-22 के काल में इस 8.5-9 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है।
 
 
 
इस अवसर पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष एस. रवि, सदर ग्रंथ प्रकल्प के समन्वयक डॉ. संजय पानसे, विवेक समूह के प्रबंध संपादक दिलीप करंबेलकर सहित अनेक लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री भागवत ने ऐतिहासिक दृष्टिकोण से प्राचीन भारत के आर्थिक चिंतन के पहलुओं पर रोशनी डालने वाली अंग्रेजी पुस्तक ‘सोशियो-इकोनॉमिक डायनेमिक आॅफ इंडियन सोसायटी : हिस्टॉरिकल ओवरव्यू’ और ‘उद्योग विवेक’ वेबसाइट का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम का आयोजन विवेक समूह, गोखले इंस्टीट्यूट आॅफ इकॉनॉमिक्स तथा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने किया था।
(विसंकें,मुंबई)