चुनौतियां हैं, पर उनसे पार पाने का संकल्प भी है: विजय रूपाणी
   दिनांक 01-मई-2018

 
इसमें संदेह नहीं कि नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में विकास को जिस तेजी से आगे बढ़ाया था, आज उसकी मिसाल हर क्षेत्र में देखने को मिल रही है। तमाम तरह की जातिवादी राजनीति के बाद भी इस बार के विधानसभा चुनाव में 1.3 प्रतिशत ज्यादा मतों से सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री विजय रूपाणी बिजली, पानी, शासन-प्रशासन सहित आम जनजीवन में सतत सुधार के लिए प्रतिबद्ध दिखते हैं, किन्तु उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। गत 24 अप्रैल को पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर और सहयोगी संपादक आलोक गोस्वामी ने उनसे राजधानी गांधीनगर में इन्हीं मुद्दों पर लंबी बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश यहां प्रस्तुत हैं 
 
 आप प्रचार से दूर रहते हुए काम करते हैं, तो भी चुनाव में सरकार विरोधी भावना को परास्त ही नहीं किया बल्कि 1.3 प्रतिशत मतों की बढ़त भी हासिल की। यह कैसे संभव हुआ?
गुजरात की जनता में पिछले करीब 22 साल से भारतीय जनता पार्टी के प्रति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अपनी आस्था, श्रद्धा, विश्वास कायम है। यहां भाजपा की सरकार पहले मोदी जी के नेतृत्व में चली, फिर आनंदी बेन मुख्यमंत्री रहीं, बाद में मुझे जिम्मेदारी मिली। हमारी सरकार जनता की आकांक्षा के अनुरूप कार्य करती रही है। जब मैं मुख्यमंत्री बना था तब मैंने 4 सूत्र बताए थे, कि सरकार पारदर्शी रहेगी, ईमानदारी के साथ काम करेगी। हमारी सरकार निर्णय लेने वाली सरकार होगी। हमारा मानना है कि जो काम कल करना है, वह आज ही क्यों न करें। हमने 362 दिन में 400 से ज्यादा निर्णय लिये और गुजरात को फास्ट ट्रैक पर चलाया। तीसरी बात है सरकार का संवेदनशील होना। हमने कहा था कि सरकार संवेदनशील होनी चाहिए, जिसमें सभी के प्रति दया, प्रेम, आदर का भाव होना चाहिए। जनता को ऐसा लगना चाहिए कि यह हमारी सरकार है। उसी पद्धति से हमने एक संवेदनशील सरकार के नाते काम किया है। और चौथी बात है, विकासशील सरकार-आज विकास और गुजरात एक दूसरे के पर्याय बन गये हैं। स्वाभाविक ही है कि 22 साल लगातार भाजपा की सरकार चली, तो भी इन चुनावों में जनता ने हमारे प्रति विश्वास व्यक्त किया। 
निवेश के मानकों पर, सुशासन की कसौटियों पर गुजरात अपने आप में एक मॉडल है। मगर भाजपा की राजनीतिक विचारधारा, एकात्म मानववाद के मापदंडों पर आप इस सरकार को कैसे देखते हैं? पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानवजीवनदर्शन दिया, उसी संस्कार के आधार पर गुजरात में सरकार चल रही है, क्योंकि हम जो भी योजना बनाते हैं, उसके केन्द्र में मानवीय अभिगण को रखते हैं। आखिरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर ही काफी नहीं है। इसलिए हम खुशहाली के मानकों को देखते हुए सामाजिक अधिष्ठान पर, सामाजिक समरसता के आधार पर ‘सबका साथ सबका विकास’ की बात करते हैं। 
 
आपने बताया, विकास का मापदंड है ‘सबका साथ सबका विकास’। लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियां हैं जिनमें से एक है कुपोषण। आंकड़ों को देखें तो प्रदेश कुपोषण की समस्या झेल रहा है। पोषण के मापदंड पर प्रदेश सरकार कहां तक पहुंची है? फिर शिक्षा क्षेत्र में चुनौतियां हैं, उन्हें दूर करने में आप कितने सफल हुए हैं?
वैसे तो हर सरकार के सामने कुछ न कुछ चुनौतियां रहती हैं। आज किसी क्षेत्र में काम ठीक हो गया, तो किसी दूसरे की चुनौती सामने आ जाती है। जैसा आपने बताया, इनमें एक है कुपोषण और दूसरी है शिक्षा। कुपोषण और शिक्षा पर हमारी सरकार ने ध्यान दिया है। हमने 25 हजार करोड़ रुपए सिर्फ शिक्षा में जारी किये हैं। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और उसके बाद नवाचार शोध के क्षेत्र को हम काफी बढ़ावा दे रहे हैं। आज से 15-20 साल पहले गुजरात में सिर्फ 7 विश्वविद्यालय थे, आज 60 विश्वविद्यालय हैं। हमारा आईआईएम, आईआईटी और एनआईआईटी देश के नामी संस्थान हैं। हमारी पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी, फोरेनसिक साइंस यूनिवर्सिटी खासी मशहूर हैं। रक्षा विश्वविद्यालय का विचार सबसे पहले गुजरात में साकार हुआ है। हमने योग यूनिवर्सिटी, खेलकूद विश्वविद्यालय खोले हैं। तो इस क्षेत्र में हम काफी जोर दे रहे हैं। 
 
राज्य के भूगोल को देखते हुए एक बड़े हिस्से में पानी की समस्या रहती है जो गर्मियों में बहुत बढ़ जाती है। इसके निदान के लिए आपकी क्या योजना है?
पेयजल के लिए पिछले दस साल में काफी काम हुआ है। हमने सवा लाख किलोमीटर पाइप लाइन बिछाकर कच्छ की सीमा तक और उधर सौराष्ट के समंदर तक नर्मदा की नहरों का संजाल बनाया है। नर्मदा नहर एशिया की सबसे बड़ी नहर है। हमने करीब 500 किलोमीटर लंबी नहर बनायी है। इसके अलावा सुरेन्द्रनगर जिले के गांव डाकी में एशिया का सबसे बड़ा पंपिंग स्टेशन बनाकर हम वहां लोगों को पानी उपलब्ध करा रहे हैं। हम पूरी नर्मदा से पानी 80 मीटर से ज्यादा ऊंचाई तक ले जा रहे हैं। इस तरह हम करीब 3,500 गांवों और 100 से ज्यादा शहरों को नर्मदा का पानी दे रहे हैं। तो दिक्कत पीने के पानी की नहीं है। हां, बहुत सालों के बाद इस साल मध्य प्रदेश में नर्मदा के जल भराव क्षेत्र में बारिश कम होने से नर्मदा से मिलने वाले पानी में 50 प्रतिशत की कटौती हो गई। वैसे, अब हम ‘डीसेलिनेशन’ (खारे पानी को मीठा बनाना) की प्रक्रिया पर जा रहे हैं। भारत में चेन्नै में यह प्रक्रिया पहले से चल रही है। हम अपने यहां आधुनिक इस्रायली तकनीक के साथ आगे बढ़ने की सोच रहे हैं। यह प्रक्रिया महंगी नहीं है। इसके लिए इस बार हमने टेंडर जारी किया आज इस्रायल, दुबई, कुवैत, कैलिफोर्निया और लास एंजिल्स में भी ‘डीसेलिनेशन’ प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हमने भी उस दिशा में एक टेंडर चुना है। उस कंपनी के साथ समझौता हो गया है। अगले महीने से काम चालू हो जाएगा। हम ऐसे 10 ‘डीसेलिनेशन प्लांट’ लगाएंगे। हमारे पास 1600 किलोमीटर का समंदर है। तो हम उस अथाह जलराशि का सदुपयोग करने वाले हैं।
 
गुजरात चुनाव में हमने देखा भी कि किस तरह ओबीसी के नाम पर, पाटीदार के नाम पर सबने माहौल खराब करने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद वे परास्त हुए। तो क्या हम मानें कि गुजरात देश में विपक्षमुक्त मॉडल प्रस्तुत कर रहा है?
ऐसा तो नहीं कहेंगे, पर मैं मानता हूं कि गुजरात की जनता ने जिस तरह से अपना मत दिया उससे लगता है कि वह बहुत परिपक्व है। हमारी सीटें भले थोड़ी कम हुई हैं, लेकिन जनता मत ऐसा दिया है कि सरकार भाजपा ही बनाये। जनता ने कांग्रेस को कुछ ज्यादा सीटें देकर भी यही कहा कि उसे तो विपक्ष में ही रहना है, वह सत्ता के लायक नहीं है।
लोकसेवकों के पास जन समस्याओं का एक अंबार लगा ही रहता है। इन समस्याओं को सुलझाने का भी क्या कोई ‘गुजरात मॉडल’ है?हमने अपने यहां दो-तीन मॉडल बनाए हैं। हम एक सेवा सेतु कार्यक्रम बहुत अच्छी तरह चला रहे हैं। इसमें हम आम आदमी की पीड़ा दूर करने की कोशिश करते हैं। राशन कार्ड की समस्या हो, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन हो, आय प्रमाणपत्र आदि चाहिए, उनको थोड़ा-बहुत राजस्व में से लेन-देन करना है, ऐसी सब समस्याओं की सूची बनाकर, 10-10 गांवों के समूह बनाकर पूरी सरकार वहां जाती है। वहां तीन महीने यह कार्यक्रम चलता है। गांव में उनका आवेदन लेकर उसी दिन उनकी उचित मांग पूरी की जाती है। इसी तरह पिछली बार हमने एक करोड़ से ज्यादा आवेदकों के काम किए थे। यह है गुजरात का मॉडल। इसके अलावा अभी हाल ही में हमने एक दौर पूरा किया है। हमारे सभी मंत्री सभी जिलों में गये, वहां के हमारे मुख्य कार्यकर्ता करीब 250 की टोली में अधिकारियों के साथ बैठे, उन्हें वहां की समस्याएं बताईं, चाहे पानी की समस्या हो या कुछ और, सब पर गौर किया गया। अधिकारियों के साथ हमारे मंत्री जिलों में जाते ही हैं। मैं खुद एक जिले में गया था। हम वहीं के वहीं समस्याओं का समाधान करते हैं। फिर पार्टी और सरकार के समन्वय से भी समस्याओं को निपटाया जाता है।
 
आपकी सरकार पढ़ाई, कमाई और दवाई की जरूरत की दिशा में क्या कर रही है?
गुजराती में स्वपोषित स्कूलों में ज्यादा फीस लेने को लेकर लोग नाराज हैं। इस फीस को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने में पूरे देश में गुजरात ने पहल की है। हमने कानून बनाया। ऊंची फीस लेने वाले अदालत में गये। सात-आठ महीने कानूनी लड़ाई चली। उच्च न्यायालय ने हमारे कानून को स्वीकृत किया। निर्णय हमारे पक्ष में आया। अब सर्वोच्च न्यायालय में मामला चल रहा है। आने वाले समय में हम सर्वोच्च न्यायालय में भी जीत जाएंगे।
सस्ती दवाई के लिए गुजरात ने सबसे ज्यादा जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले हैं। तकरीबन 200 से ज्यादा स्टोर शुरू हो गये हैं। इस साल हम 1000 स्टोर और खोलने जा रहे हैं। सस्ती जेनेरिक दवाएं सबको मिलनी चाहिए। कमाई के लिए हमने जो कदम उठाया है वह यह है कि इस बार एक लाख ‘एंप्रैंटिस’ युवकों को एक साल के लिए सरकार की ओर से 3000 रु. और उद्योग की ओर से 7-8,000 रु. का स्टाइपंड प्रति माह मिलेगा। यह 12 महीने के लिए मिलेगा, जब तक उनका प्रशिक्षण रहेगा। जो कौशल के साथ काम करेंगे उनको वहां रोजगार भी मिलेगा। गुजरात में एंप्रैंटिस की यह दर देश में सबसे ऊंची है। पूरे देश में ऐसे एप्रैंटिस की संख्या कुल 2,20,000 है जबकि अकेले गुजरात में यह 1 लाख से ज्यादा है। गुजरात ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर है, चाहे वह सौर ऊर्जा हो या पवन ऊर्जा।

 
आपने गांव-गांव में बिजली पहुंचाने का वायदा काफी हद तक पूरा भी किया है। लेकिन अभी भी इन क्षेत्रों में और संभावनाएं हैं। क्या इस तरफ आगे कोई योजना है?
अभी पिछले सप्ताह हमने घोषणा की है कि दुनिया में सबसे बड़ा 5,000 मेगावाट का सौर पार्क धोलेरा में बन रहा है। उसमें से 1000 मेगावाट का टेंडर अगले 15 दिन में आ जाएगा। 5,000 मेगावाट उत्पादन पर 25,000 करोड़ रुपए की लागत लगेगी। यह दुनिया का सबसे बड़ा सौर पार्क होगा जो हम समंदर के किनारे बनाने जा रहे हैं। यह अगले तीन साल में पूरा हो जाएगा। हमारे पास इसका अनुभव भी है। हमारा एक बड़ा सौर पार्क उत्तर गुजरात में चल रहा है। सौर ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा में गुजरात सबसे आगे है। हम और भी आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले दिनों में हम धीरे-धीरे हरित ऊर्जा पर काम बढ़ेगा। तो पर्यावरण की दृष्टि से भी गुजरात काफी काम कर रहा है।
 
श्री विजय रूपाणी का एक अलग व्यक्तित्व भी है एक राजनेता से इतर, जो सामाजिक सारोकारों से जुड़ा हुआ है। भीतर एक भावनात्मक संवेदनशील व्यक्तित्व समाया है। आप निजी स्तर पर जनसेवा का काम करते हैं। इस पर थोड़ा प्रकाश डालें?
देखिए, मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता रहा हूं। सामाजिक उत्तरदायित्व विद्यार्थी परिषद और रा. स्व. संघ में एक विषय रहता ही है। हम पिछले 22 साल से राजकोट में कचरा बीनने वाले 400 बच्चों को गोद लेकर स्ट्रीट चिल्ड्रन प्रोजेक्ट चला रहे हैं। हर बच्चे को पूरी स्कूली पढ़ाई कराकर लायक बनाया जाता है, फिर अगले 400 बच्चे गोद लेते हैं। ये बच्चे अच्छे पदों तक पहुंचे हैं। वे आज भी कहते हैं कि आपने हमारे जीवन को नई दिशा दी। दूसरी योजना है ज्ञान प्रबोधिनी, जिसमें झुग्गी बस्तियों में रहने वाले गरीब लेकिन होशियार बच्चों में से सातवीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले 500 से अधिक बच्चों की परीक्षा लेते हैं। इसमें शीर्ष के 20 बच्चों को हम पूरी तरह से गोद ले लेते हैं। आठवीं से बारहवीं तक हर कक्षा के 20-20 और पांच साल के सौ बच्चे। इन बच्चों की अच्छी से अच्छी पढ़ाई के लिए हर विषय के अच्छे शिक्षक रखते हैं। बारहवीं के बाद बहुत-से बच्चों ने मेडिकल, इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 200 से अधिक बच्चे इंजीनियर, डाक्टर बने हैं। इस योजना से अनेक गरीब बच्चों का जीवन बदला है। हमारे पहले बैच का लड़का अभी इंफोसिस में काम कर रहा है। वह पहला वेतन लेकर आया तो बोला, ‘साहब, मेरे सिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद दीजिए।’ इस तरह के हम सात-आठ प्रोजेक्ट चला रहे हैं। 
 
दक्षिणी गुजरात में कन्वर्जन अभी भी चिंता का विषय है। इसे आप कैसे देखते हैं?
कन्वर्जन के विरुद्ध हमने कड़े कानून बनाए हैं। यह अभी बहुत कम हो गया है। कन्वर्जन दक्षिण गुजरात के वनवासी क्षेत्रों में हुआ था लेकिन अब धीरे-धीरे लोग वापस आ रहे हैं। सरकार की दृष्टि से, समाज की दृष्टि से हम लोग उनकी चिंता कर रहे हैं, इसलिए अब वहां कन्वर्जन बंद हो गया है।
 
(यहां साक्षात्कार के संपादित अंश दिए गए हैं पूरा साक्षात्कार पढ़ने के देखें पाञ्चजन्य का आगामी अंक )