जेएनयू में जिहादी और तालिबानी मानसिकता के लोग सक्रिय हैं
   दिनांक 11-मई-2018
 
आपकी फिल्म के प्रदर्शन को लेकर जेएनयू में जो हंगामा हुआ उसके लिए आप किसको जिम्मेदार समझते हैं?
 
मेरी फिल्म ‘इन द नेम आॅफ लव’ में केरल में चल रहे लव जिहाद और कन्वर्जन के बारे में दिखाया गया है। फिल्म पूरे तथ्यों और शोध के साथ बनाई गई हैै। फिल्म में कहीं भी इस्लाम के बारे में कोई बुरी बात नहीं बोली गई। हां तालिबानी मानसिकता और इस्लामिक स्टेट की कट्टरता के विषय को जरूर उठाया गया है। मुझे इस तरह की कतई उम्मीद नहीं थी कि जेएनयू में ऐसा हंगामा किया जाएगा। यदि वहां पर ऐसा हुआ तो स्पष्ट है वहां पर तालिबानी और जिहादी मानसिकता वाले लोग सक्रिय हैं। वे नहीं चाहते कि खुले मंच पर उनकी विचारधारा के खिलाफ बात उठाई जाए।
 
आपकी फिल्म में सभी चरित्र वास्तविक हैं या कुछ काल्पनिक भी हैं?
 
इस फिल्म में हमने कोई भी काल्पनिक चरित्र नहीं लिया है। फिल्म को बनाने से पहले पूरा शोध किया गया। मेरी फिल्म की सह पटकथा लेखक अंबिका जेके हैं। वह केरल की रहने वाली हैं। उन्होंने ही फिल्म को लेकर सारे शोध किए। इसके बाद हमने काम शुरू किया। जब हमारे सामने शोध आया तो पता चला कि केरल में योजनाबद्ध तरीके से कन्वर्जन का खेल खेला जा रहा हैै। हिंदू लड़कियों का ‘ब्रेनवॉश ’ कर, उनसे शादियां कर उन्हें मुसलमान बनाया जा रहा है। उनके दिमाग में कट्टरपंथी अपनी विचाराधारा को इस कदर भर देते हैं कि वे फिर किसी की भी बात को मानने के लिए तैयार नहीं होती हैं।
 
इस तरह की फिल्म बनाने का विचार कैसे आया?
 
केरल मेरी पंसदीदा जगहों में से एक है। मैं पिछले 30 सालों से लगातार केरल जा रहा हूं। वहां मेरे बहुत से परिचित हैं, अच्छे मित्र हैं। पिछले कुछ सालों में केरल में हिंसात्मक घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। लवजिहाद जैसे मामलों को मैं अक्सर अखबारों में पढ़ता था। हमने इस विषय पर काम करने का सोचा। इसके लिए पूरा शोध किया गया। जब हमारे सामने आंकड़े आए तो हम चौंक गए। हमने फिल्म में इस बात को बताने की कोशिश की है कि पिछले आठ सालों में केरल में विभिन्न हिस्सों में लगभग 33 हजार लड़कियों का कन्वर्जन किया गया। इसमें ज्यादातर हिंदू लड़कियां हैं। कुछ मामले ईसाइयों के भी हैं।
 
क्या इस संबंध में कुछ सरकारी आंकड़े भी हैं?
 
बिल्कुल, वर्ष 2008 में केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि आने वाले 20 सालों में केरल मुस्लिम स्टेट बन जाएगा। उन्होंने तब कन्वर्जन की बात भी कही थी। इस तरह जब केरल में कांग्रेस के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने 2012 में विधानसभा में यह कहा था कि 2006 से 2011 तक लगभग छह से सात हजार हिंदू लड़कियों का कन्वर्जन हुआ। अब दो मुख्यमंत्री एक वामपंथी और दूसरे कांग्रेसी ऐसा बयान दे चुके हैं तो कोई न कोई सत्यता तो इस मामले में होगी ही। केरल पुलिस द्वारा जांचे गए मामलों में भी इस बात का खुलासा हुआ कि वहां कन्वर्जन का खेल चल रहा है। न्यायमूर्ति केटी शंकरन ने भी 2009 में लव जिहाद शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने केरल में हो रही घटनाओं के संदर्भ में कहा था।
 
क्या आपकी फिल्म साबित करती है कि केरल में कन्वर्जन के लिए लव जिहाद हो रहा है?
 
जी, बिल्कुल साबित करती है। शोध के लिए हमें केरल में विभिन्न जगहों पर गए थे। केरल पुलिस ने जिन मामलों में जांच की उनको भी खंगाला। हमने कई लड़कियों से बात की जिन्होंने पिछले आठ वर्षों में कन्वर्जन किया। उन्होंने बताया कि वे पहले हिंदू थीं और बाद में उन्होंने इस्लाम स्वीकार किया। केरल में योजनाबद्ध तरीके से यह सब हो रहा है। यह केरल को इस्लामिक स्टेट बनाने साजिश के तहत हो रहा है। हमने फिल्म में सही साबित करने की कोशिश की है। फिल्म बनाने के दौरान जब हमने उन लड़कियों के अनुभव सुने तो दिल दहल गया कि किसी का इतना ब्रेनवॉश कैसे किया जा सकता है।
 
क्या इस फिल्म में उसी सचाई को दिखाया गया है?
 
देखिए, मेरा काम फिल्म बनाना है। सिनेमा की कुछ जिम्मेदारियां भी होती हैं। मैंने वही पूरा करने का प्रयास किया। मैं किसी मजहब या पंथ के खिलाफ नहीं हूं। फिल्म में भी हमने किसी मजहब के बारे में बात नहीं की, लेकिन शोध के दौरान कई ऐसी बातें पता लगीं जो नहीं होनी चाहिए। जैसे, केरल में छोटी-छोटी पुस्तकें कॉलेजों में बांटी जाती हैं जिनमें नरक की आग में जलने की बात कही जाती है। यदि नरक से बचना है तो उन्हें इस्लाम स्वीकारने की बात कही जाती है। इस तरह कई तरीकों से वहां लड़कियों को बरगलाया जाता है। इस मामले की तह तक जाकर हमले फिल्म बनाई ताकि केरल में जो हो रहा है उसकी सचाई लोगों तक पहुंच सके।
 
आपने फिल्म में किन-किन लोगों का साक्षात्कार लिया है?
 
हमने फिल्म में माकपा नेता वृंदा करात और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन और ओमान चांडी से बात की है। इसके अलावा जमात ए इस्लामी के नेता ओ. अब्दुल्ला से भी बात की है। हमने उन्हें फिल्म के बारे में पूरा विषय बताकर उनसे बातचीत की है। हमारा उद्देश्य वास्तविकता को सामने लाना है, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना। हमने फिल्म में इस बात का पूरा ध्यान भी रखा है।