कांग्रेस ने संसद में कुनबे के चित्र लगाए बाबा साहेब की तस्वीर नहीं
   दिनांक 14-मई-2018

 
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान कहते हैं,‘‘केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार देश की अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजातियों के उद्धार के लिए प्रतिबद्ध है। अपने चार साल केकार्यकाल में सरकार ने इस समाज के लिए क्रांतिकारी काम किए हैं, लेकिन कुछ लोग हैं, जिन्हें यह चीज अखर रही है। वे सरकार के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।’’ पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र ने उनसे विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:-
एससी-एसटी कानून मामले में फैसला अदालत का था लेकिन दोष सरकार के सिर पर मढ़ा गया। इस पूरे प्रकरण को आप किस तरह देखते हैं?
 
यह सत्य है कि कुछ लोगों द्वारा अदालत के फैसले की आड़ लेकर केन्द्र सरकार को न केवल बदनाम किया गया बल्कि देश में विभिन्न स्थानों पर हिंसा भी की गई। जो लोग स्वार्थ के चलते हिंसा भड़का रहे हैं, उन्होंने कभी इस वर्ग के हितों की सुध नहीं ली। कांग्रेस ने दशकों तक सत्ता-शासन संभाला और इस दौरान अपने खास कुनबे से जुड़े लोगों की ही तस्वीर संसद में लगाई। लेकिन उसने कभी बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीरें नहीं लगार्इं। जब हम बाबासाहेब की तस्वीर संसद में लगाने की मांग करते थे तो वे कहते थे कि यहां स्थान नहीं है। लेकिन 14 अप्रैल,1990 को वी.पी. सिंह के शासन में डॉ. भीमराव आंबेडकर का ससम्मान चित्र लगाया गया। इस दौरान हमने ऐसे लोगों से कहा था कि अगर दिल में जगह हो तो दीवार पर अपने आप स्थान निकल आता है। उसी दिन उनको भारत रत्न दिया गया। उनके जन्मदिन पर अवकाश की घोषणा हुई। रही बात संविधान की धारा 15(4) की, जो कहती है कि केन्द्र सरकार को अधिकार है कि वह एससी-एसटी के लिए कानून बना सके, तो इस धारा को श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार और हम लोगों ने 2015 में और मजबूत किया। पहले 22 बिन्दु थे जो अब बढ़ाकर 47 कर दिए गए। तो यह कहना गलत होगा कि केन्द्र सरकार इस मामले में कोई छेड़छाड़ कर रही है। दरअसल हकीकत यह है कि 2007 में उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार ने 20 मई और 29 अक्तूबर को दो आदेश निकाले थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि एससी-एसटी कानून का दुरुपयोग हो रहा है। उस आदेश में था कि बलात्कार मामले में जब तक वरिष्ठ चिकित्सक आदेश न दे तब तक पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं करेगी। इसके अलावा उसमें यहां तक प्रावधान था कि यदि किसी वंचित समाज की महिला के साथ बलात्कार होता है तो पहले उसका चिकित्सकीय परीक्षण हो जाए, तब उसकी प्राथमिकी दर्ज हो। तो आप ही बताएं कानून से छेड़छाड़ करने का काम कौन रहा है? देखिए, कोई भी आंदोलन गलत नहीं होता। और हम तो छात्र आंदोलन से ही निकले हैं। लेकिन इसमें गड़बड़ी तब हो गई जब युवाओं के आंदोलन को स्वार्थपूर्ति में लगे राजनीतिक दलों ने हथिया लिया। जिसका परिणाम हुआ कि जगह-जगह हिंसा हुई। जबकि सभी को पता था कि प्रधानमंत्री जी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एससी-एसटी सांसदों को बातचीत के लिए भोज पर बुलाया था। हम सभी लोग उनसे मिले और उन्होंने भी कहा था कि सरकार न्यायालय के इस आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। लेकिन फिर भी समाज में भ्रामक माहौल तैयार किया गया।
 
कांग्रेस ने दशकों तक सत्ता-शासन संभाला और इस दौरान अपने खास कुनबे से जुड़े लोगों की ही तस्वीर संसद में लगाई। लेकिन उसने कभी बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीरें नहीं लगार्इं। जब हम बाबासाहेब की तस्वीर संसद में लगाने की मांग करते थे तो वे कहते थे कि यहां स्थान नहीं है।
रोहित वेमुला से लेकर ऊना तक और भीमा कोरेगांव से लेकर भारत बंद तक एक धारणा बनाई गई कि भाजपा सरकार अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति विरोधी है, जिसने समाज में खाई पैदा करने का काम किया। इस पर आप क्या कहेंगे?
यह पूरी तरह से गलत बात है कि मोदी सरकार अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति विरोधी है। मोदी सरकार अभी 48 महीने की हुई। लेकिन कांग्रेस तो दशकों से देश पर राज कर रही है। उनके शासन में अनुसूचित जाति के लोगों पर जो अत्याचार हुए उसे वे क्यों भूल जाते हैं? हरियाणा के कई स्थानों पर वंचित समाज के लोगों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं घटीं। राज्य में तब हुड्डा की सरकार थी। यहां तक कि कुछ लोगों को प्रताड़ित होकर घर तक छोड़ना पड़ा। राज्य में जब भाजपा की सरकार बनी तो हम लोगों ने राज्य के मुख्यमंत्री मनोहरलाल जी से बात करके उन परिवारों को मकान देने की घोषणा की। दरअसल इसे हम सबको समझना होगा कि यह सामाजिक कुरीति है। इसका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ लोग उच्च जाति के लोगों को लक्षित करते रहते हैं तो उन्हें वीपी सिंह, दयानंद सरस्वती, भगवान बुद्ध, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों का ध्यान कर लेना चाहिए, जिन्होंने सदैव कुरीतियों पर वार किया है।
कांग्रेस एवं अन्य दलों के नेता जगह-जगह प्रचार कर रहे हैं कि केन्द्र सरकार आरक्षण खत्म करा देगी। सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका को भी उन्होंने कुछ इसी तरह से पेश किया। कितनी इसमें सचाई है?
 
देखिए, ये लोग समाज में गलत बात फैला रहे हैं। आरक्षण तो संविधान की धारा में है। इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता। स्वयं नरेन्द्र मोदी जी ने कई बार कहा कि आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा। फिर भी कुछ दलों द्वारा विरोधी माहौल तैयार किया जाता है। जबकि हकीकत है कि प्रधानमंत्री ने इस वर्ग के लिए बहुत काम किए हैं। लेकिन गलती यह है कि हम उनका प्रचार नहीं करते। राजग सरकार के कार्यकाल में चाहे महू में राष्टÑीय स्मारक बनाने की बात हो, दिल्ली के 26 अलीपुर रोड पर स्मारक की बात या मुंबई में 12 एकड़ जमीन पर बन रहे अन्तरराष्ट्रीय स्मारक या फिर लंदन में स्मारक बनाने की बात हो, केन्द्र सरकार ने बड़े काम किए हैं। यह सरकार सबका साथ, सबका विकास का ध्येय रखती है। लेकिन इसी जगह पर अगर कांग्रेस सरकार होती तो ढोल पीटती कि हमने यह कर दिया।
हाल ही में भारत बंद के नाम पर जो हिंसा हुई उसके लिए सीधे तौर पर आप किसे जिम्मेदार मानते हैं?
 
इस हिंसा के लिए विरोधी दल पूरी तरीके से जिम्मेदार हैं। उत्तर प्रदेश में जो हिंसा हुई उसमें बसपा-सपा के कार्यकर्ता और नेता थे। आंदोलन में जो पिस्तौल से गोली चला रहे थे वे छात्र तो नहीं हो सकते, क्योंकि छात्रों का तो कोई नेतृत्वकर्ता था ही नहीं। वे उस दिन विरोध प्रदर्शन में अपना विरोध दर्ज करा कर आंदोलन खत्म कर देते। लेकिन विरोधी दलों ने माहौल खराब करवाया। आज मुलायम सिंह यादव वंचित समाज की बात करके राजनीति करते हैं, जबकि इन्होंने पदोन्नति में आरक्षण नहीं होने दिया और संसद को बाधित किया था। यही सबसे ज्यादा कहते थे कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति कानून का दुरुपयोग हो रहा है।
हिंसा के लिए विरोधी दल पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। उत्तर प्रदेश में जो हिंसा हुई उसमें बसपा-सपा के कार्यकर्ता और नेता थे। आन्दोलन में जो पिस्तौल से गोली चला रहे थे, वे छात्र तो नहीं हो सकते।
केन्द्र सरकार ने अपने कार्यकाल में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के हितों के लिए क्या-क्या प्रमुख कार्य किये हैं?
 
बाबासाहेब आंबेडकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के एकमात्र नेता थे। इसके बाद वी.पी. सिंह के समय इस समाज और बाबासाहेब के लिए थोड़ा-बहुत काम हुआ। लेकिन इससे कई गुना अधिक काम नरेन्द्र मोदी जी कर रहे हैं। सरकार देश के 81 करोड़ लोगों को खाद्यान्न दे रही है। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति परिवार के 95 प्रतिशत लोग हैं। हम उन्हें 2-3 रुपए किलो. की दर से गेंहू और चावल दे रहे हैं। अगर वे बाजार से लें तो यही चीज उन्हें 20-30 रुपये किलो की दर से मिलेगी। लेकिन हम इसका प्रचार नहीं कर रहे। हर राज्य सरकार अपनी तस्वीर लगाकर प्रचार करती है कि यह हम दे रहे हैं, जबकि राज्य सरकार एक भी पैसा नहीं देती है। 2-3 रुपये गरीब देता है लेकिन फिर भी राज्य सरकार वाहवाही लूट रही है। मैंने कई बार कैबिनेट में कहा कि इसका नाम प्रधानमंत्री खाद्य सुरक्षा योजना रख दीजिए, नहीं तो इसका प्रचार सही ढंग से होना चाहिए। कम से कम देश के लोगों को पता तो चले कि हमारा हित कौन चाह रहा है और कौन नहीं। अब उज्ज्वला योजना को देख लीजिए। सरकार जिनको ‘गैस कनेक्शन’ मुफ्त में देती है वे कौन लोग हैं? वे सौ प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोग हैं। जनधन योजना की तरफ देखें तो बैंक में लाखों लोगों के खाते मुफ्त में खुले हैं। स्टार्टअप योजना है। केन्द्र सरकार ने बैंकों को कहा कि वे वंचित समाज से महिला और पुरुष उद्यमी तैयार करें और उनको व्यवसायी बनाएं, जो नौकरी मांगेंगे नहीं बल्कि नौकरी देंगे। ये सब केन्द्र की मोदी सरकार में क्रांतिकारी काम हुए हैं। बस कमी यह है कि जो हमारा ‘गरीब के राज’ का सपना है वह हम समाज को बता नहीं पाते। जबकि विरोधी थोड़ा सा करते हैं और माहौल ऐसा बना देते हैं कि उन्होंने सब कुछ कर दिया है।
वंचित समाज के लोगों को समझने की आश्यकता है कि वह कौन सी ताकतें हैं जो समाज का माहौल खराब करने में लगी हुई हैं। आज ही क्यों स्थान-स्थान पर अराजकता फैलाने की कोशिश हो रही है
उत्तर प्रदेश सरकार ने बाबासाहेब का पूरा नाम लिखना शुरू किया तो सियासी दलों ने शोर मचाया। यह बेवजह का इस प्रकरण को आप कैसे देखते है?
 
एक होता है ‘एक्ट’, दूसरा ‘फैक्ट’ और तीसरा ‘टैक्ट’। इसमें ‘एक्ट’ अलग होता है, ‘फैक्ट’ अलग होता है और ‘टैक्ट’ अलग होता है। एक्ट के अनुसार उन्होंने ठीक किया। देश के कुछ भागों में नाम के साथ अपने पिता का नाम लिखा जाता है। इसी तरह बाबासाहेब का नाम भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा हुआ था। तो नियमत: इसमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन भाजपा के खिलाफ एक धारणा समाज में बना दी गई कि वह हरेक चीज में राम का नाम शामिल कर देगी। लेकिन यह सत्य है कि बाबासाहेब के पिता का नाम रामजी है। तो पिता का नाम जोड़ने में क्या समस्या है? जैसे मेरे नाम में अगर मेरे पिता जी का नाम जुड़े तो मुझे बहुत खुशी होगी और मन में भाव आएगा कि यह सदैव बना रहे। पिता-माता का स्थान तो भगवान से भी ऊपर होता है। इसलिए धारणा कुछ भी हो, लेकिन कानूनी और संवैधानिक तरीके से इसे कोई गलत नहीं कह सकता।
वर्तमान में जब कुछ राजनीतिक दल देश को जात-पात के नाम पर तोड़ने पर आमादा हैं, ऐसे में आप अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति को क्या संदेश देंगे?
 
आज इस समाज के लोगों को समझने की आश्यकता है कि वे कौन सी ताकतें हैं जो समाज का माहौल खराब करने की जुगत में लगी हुई हैं। आज ही क्यों स्थान-स्थान पर अराजकता फैलाने की कोशिश हो रही है? हम लोग जानते भी हैं कि इसके भी पीछे कौन लोग हैं। जैसे, मैं अपने गृह राज्य बिहार की बात बताऊं तो हमारे यहां लालू प्रसाद यादव अगर सत्ता से बाहर रहते हैं तो कुछ भी कर सकते हैं। ऐसे और भी लोग हैं देश में। इसे ही हमें समझना है बस।
आप कहते हैं कि केन्द्र की मोदी सरकार में काम भी अच्छा हो रहा है। सबका साथ, सबका विकास उसका ध्येय है। तो फिर क्यों नरेन्द्र मोदी के खिलाफ ऐसा माहौल बनाया जाता है कि यह सरकार एससी/एसटी विरोधी है?
 
देखिए, जो विकास हो रहा है, समाज उसे अपना अधिकार मानता है। अगर आप सस्ता अनाज दे रहे हैं तो उसका मानना है कि यह हमें अकेले नहीं दे रहे, सबको दे रहे हैं। यह सब ठीक है लेकिन कुछ लोग जानबूझकर हरेक चीज में विवाद खड़ा करते रहते हैं, क्योंकि विवाद से सभी का ध्यान उस पर जाता है। अभी सरकार ने कहा है कि जिस गांव में वंचित समाज की आबादी 50 प्रतिशत होगी उस गांव को ‘मॉडल’ गांव बनाएंगे। वहां विद्यालय से जुड़ी सभी सुविधाएं देंगे। लेकिन न तो इसका कहीं कोई प्रचार हो रहा है और न ही इस पर कोई बात कर रहा है। इसके पीछे कारण है कि विरोधी अच्छी बातों को समाज तक नहीं पहुंचाएंगे। लेकिन बात विवाद बढ़ाने की होगी तो कुछ भी कर गुजरेंगे।