'सेवा हो पत्रकारिता का लक्ष्य'
   दिनांक 14-मई-2018
''महात्मा गांधी ने अपने समाचार पत्र में लिखा था कि पत्रकारिता का लक्ष्य सेवा होना चाहिए। पत्रकारिता समाज को दिशा देने वाली और सृजन करने वाली शक्ति है। महात्मा गांधी, महर्षि अरविन्द और डॉ़ भीमराव आम्बेडकर ने पत्रकारिता के जिन मूल्यों को स्थापित किया है, आज की पत्रकारिता को उन मूल्यों को लेकर आगे चलना चाहिए।'' उक्त बात प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक व केसरी समाचार पत्र के पूर्व संपादक श्री जे़ नंदकुमार ने कही। वे गत दिनों भोपाल में देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

 
 
'सामाजिक एवं राष्ट्रीय सरोकार और मीडिया' विषय पर उन्होंने कहा कि आज मीडिया में बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा है। समाचार सबसे पहले दिखाने का दबाव है। इस कारण कई बार भ्रामक या झूठे समाचार जारी हो जाते हैं। ये झूठे समाचार समाज को बहुत हानि पहुंचाते हैं। आवश्यकता है कि हम समाचारों को अच्छे से जांच कर ही जारी करें। समाचार बनाते समय गहन शोध की आवश्यकता है। प्रत्येक पत्रकार को कुछ भी लिखने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसके लिखे गए शब्दों का भविष्य में समाज पर क्या असर पड़ेगा? यदि इतना भी विचार कर हम अपनी कलम चलाएंगे तो वह समाजहित में होगा। उन्होंने कहा कि नारद जी के विचारों को पुन:प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है। देवर्षि नारद पत्रकारों के लिए अनुकरणीय हैं। वह परमात्मा के विषय में लोगों को ज्ञान देते थे। लोग उन्हें आदि पत्रकार मानें या न मानें, परन्तु उन्होंने अपने आचार-विचार से पत्रकारिता के आदर्श मूल्यों की स्थापना की है। हम गहराई से देखेंगे तो पाएंगे कि उनका प्रत्येक संवाद लोकहित में है। समारोह के मुख्य अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने कहा कि देवर्षि नारद पत्रकारिता के कुल देवता जैसे हैं। उन्होंने कोई आडंबर नहीं किया, बल्कि सत्य की रक्षा के लिए सूचना प्रेषित करने का कार्य किया। वह सत्य की विजय के उद्देश्य को लेकर कार्य करते थे। हमें भी राष्ट्रहित में एकात्म भाव से पत्रकारिता करने की आवश्यकता है। 'देवर्षि नारद सम्मान' से सम्मानित गिरीश उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म होता है कि वह समाज के संबंध में लिखे, समाज के लिए लिखे। आज मीडिया कहीं न कहीं समाज में अपना सम्मान खोता जा रहा है। कई लोग विचारों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। पत्रकारिता में सहमति के साथ समान रूप से असहमति का भी स्थान होना चाहिए। इस अवसर पर कई पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।