पाकिस्तान जाने वाले हमारे पानी को रोककर करेंगे राज्यों का जलसंकट दूर
   दिनांक 21-मई-2018
केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी, जलसंसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी नरेन्द्र मोदी सरकार के उन मंत्रियों में से एक हैं, जिनके पास महत्वपूर्ण मंत्रालय होने के बावजूद प्रत्येक विभाग में उनका कार्य स्पष्ट तौर पर बोलता है। उनके कार्य करने की पद्धति ही है कि विरोधी भी उनके कामों की खुलेआम प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाते। नई दिल्ली के परिवहन भवन में नरेन्द्र मोदी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र एवं नागार्जुन ने मंत्रालय से जुड़े कार्यों पर विस्तृत बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश



नरेन्द्र मोदी सरकार ने 4 वर्ष पूरे किए हैं। इस दौरान आपके मंत्रालय के कार्यों की सबसे ज्यादा चर्चा है। 4 साल की बड़ी उपलब्धियां आप किन्हें मानते हैं?
मेरे मंत्रालय ने ढेरों काम किए हैं। सड़क परिवहन से लेकर बंदरगाहों के विकास तक। आज देश के कोने-कोने में सड़कें बन रही हैं। लंबे राजमार्ग व सेतु बन रहे हैं। रही बात उपलब्धियों कि तो मुलायम सिंह यादव से लेकर ममता बनर्जी और सीपीएम के मुख्यमंत्री जनता के सामने मेरे मंत्रालय के कार्य की प्रशंसा करते हैं। मेरी सोच है कि देश हम सबका है। इसलिए विकास के मामले में कोई राजनीति नहीं। अभी हम दिल्ली से मुंबई तक एक लाख करोड़ की लागत से राजमार्ग बना रहे हैं, जो दिल्ली से जयपुर, अलवर, सवाई माधोपुर से मध्य प्रदेश होते हुए गुजरात के वडोदरा से मुंबई जाएगा। यह हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र के पिछड़े क्षेत्रों से गुजरेगा। इसमें हमने भूमि अधिग्रहण कर एक परियोजना पर 16,000 करोड़ रुपये की लागत बचाई। अभी जो सड़क मार्ग है वह मुंबई से अमदाबाद और फिर दिल्ली। इसके मुकाबले नए राजमार्ग की दूरी 125 किमी. कम है।
 
सबसे बड़ी बात यह है कि जिन राज्यों के पिछड़े क्षेत्रों से यह मार्ग गुजर रहा है, वहां उद्योग-धंधे लगेंगे, रोजगार बढ़ेगा और विकास होगा। इस योजना के तहत वडोदरा से मुंबई पहले पड़ाव का काम दो सप्ताह में शुरू हो रहा है। दूसरा, जलमार्ग बना रहा हूं, जिससे सात हजार करोड़ रुपये का लाभ हुआ। यह लाभ हर साल बढ़ रहा है। तीसरी बात मैंने कही थी कि दो करोड़ युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दूंगा। जब एक हजार करोड़ का निवेश होता है तो एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।
अब मैं दस लाख करोड़ पार कर चुका हूं। इससे नए रोजगार सृजित होंगे। इसी तरह, जम्मू-कश्मीर में जोजिला सुरंग, जहां तापमान -45 डिग्री रहता है, वहां 6,500 करोड़ रुपये का निर्माण कार्य कर रहे हैं। इसमें भी 1600 करोड़ रुपये बचाए हैं। इसके बन जाने से लेह-लद्दाख के लोगों को जीवनरेखा मिल जाएगी

आप विकास कार्यों में बुनियादी ढांचे के साथ ही संस्कृति को साथ लेकर चल रहे हैं। इसके पीछे सोच क्या है?
देखिए, जब हम विकास की बात करते हैं तो शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति-परंपरा का विकास, खेल से जुड़ी गतिविधियां और बुनियादी ढांचा इसमेें आता है। बुनियादी ढांचे में सड़क से लेकर रेलवे, घर से लेकर पीने के पानी तक, जहां कम पैसों में लोगों को जीवन यापन करने में आसानी हो। जब हम इस सबको जोड़ देंगे तो इसे एकीकृत विकास कहेंगे। यही एकीकृत विकास देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारा लक्ष्य गांव, गरीब, मजदूर और किसानों का कल्याण करना है। हमने प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत 109 परियोजनाओं पर काम शुरू किया है। इसमें बहुत सी परियोजनाएं वर्षों से बंद थीं। केंद्र और नाबार्ड के सहयोग से इन पर काम शुरू किया है। इसके अलावा, आने वाले समय में 1.88 करोड़ हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने वाले हैं। यह पहली बार हुआ है कि राज्यों को केंद्र सरकार ने पैसा दिया। इससे किसानों की आत्महत्या रुकेगी और कृषि उत्पादन बढ़ेगा। गांव से शहर की ओर पलायन पर लगाम लगेगी। कृषि से संबंधित उद्योग-धंधे गांव-देहात में आएंगे। इससे आम जन का जीवन आसान बनेगा। यानी शोषित-पीडि़त समाज का उद्धार करना हमारी नीति है।
 
2014 के पहले तक प्रतिदिन औसतन दो किलोमीटर सड़क बनती थी। आज 28 किलोमीटर बनती है। पहले और अब के काम में क्या ऐसा अंतर आ गया जो सड़क निर्माण औसत बढ़ गया?
 
मैं बड़ा लक्ष्य लेकर चलता हूं। यह बिल्कुल सही है कि पहले देश में प्रतिदिन औसतन 2 किलोमीटर सड़कें बनती थीं, अब 28 किलोमीटर। अगले वर्ष यह 40-45 किलोमीटर बनेंगी। इसके अलावा मैं 12 'एक्सपे्रस हाइवे' बना रहा हूं। दिल्ली से मुंबई 12 घंटे में सड़क से पहुंचा जा सके, इस पर काम कर रहा हूं। हवा में चलने वाली बस शुरू कर रहा हूं। 10 जलमार्ग बना रहा हूं। बंदरगाहों पर बड़ा काम हो रहा है।
 
दिल्ली से सटे राज्यों में जल संकट बना रहता है, जबकि देश की नदियों का पानी पाकिस्तान जाता है। इस दिशा में भी आप कुछ कर रहे हैं?
 
यह सही बात है कि हमारे अधिकार का पानी पाकिस्तान में जाता है और हम पानी के लिए लड़ते हैं। पंजाब, हरियाणा इसी पानी के लिए आए दिन विवाद करते हैं। यह कठिन कार्य जरूर है, पर मेरी कोशिश है कि वह पानी मैं पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली ले आऊं। यह सत्य है कि देश में गरीबी भुखमरी, बेरोजगारी व किसानों की आत्महत्या का कारण पानी है। लेकिन जब मैंने इसका अध्ययन किया तो पाया कि हिमालय की कंदराओं से जो नदियां निकलती हैं, उसमें बहुत पानी है जिसके कारण कई हिस्सों में बाढ़ आती है और हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। अन्य नदियों का पानी समुद्र में बह जाता है। उदाहरण के लिए, गोदावरी का 3,000 टीएमसी पानी समुद्र में जा रहा है। लेकिन इसकी चर्चा कोई नहीं करता। यह तय है कि देश में पानी की कमी नहीं है। इसलिए हमने तय किया है कि समुद्र में जाने वाले पानी को पहले रोकेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ने का जो प्रकल्प किया था, उसकी पांच-सात परियोजनाएं हम ले रहे हैं। इनमें पंचेश्वर, केन-वेतवा, ताप्ती, नर्मदा हैं। फिर गोदावरी से दो परियोजना ले रहे हैं। गोदावरी का पानी महाराष्ट्र में एकत्रित किया जाए तो कम से कम 40 डैम भर देंगे जिससे मराठवाड़ा, नाशिक, मालेगांव में पानी की समस्या ही नहीं रहेगी।
 
देश में सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिदिन करीब 400 लोगों की मौत होती है। इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
 
यह दुखद स्थिति है। मेरे मंत्रालय का यही एक विभाग है जिससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। एक साल में लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इसमें 3 लाख लोगों के हाथ-पैर टूटते हैं और डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है। हमने 12 हजार करोड़ खर्च कर 786 दुर्घटना केंद्र खोले। रोड इंजीनियरिंग में सुधार किया। सड़क सुरक्षा के लिए भी कुछ जरूरी चीजों पर काम किया। विभाग में भ्रष्टाचार खत्म करके पारदर्शिता लाए और वाहन चालक के लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण केंद्र से लेकर कड़े नियम बनाए। लेकिन मेरा मानना है कि इस बारे में समाज को भी जागरूक होना पड़ेगा।
 
पिछली सरकारों में पूर्वोत्तर का क्षेत्र ऐसा लगता था जैसे वह दिल्ली से बहुत दूर हो। सड़कें जर्जर थीं, लेकिन अब बुनियादी तौर पर चीजें बदली हैं। क्या उनकी मंशा कार्य करने की नहीं थी?
 
विकास करने की मंशा होती है तो वह मंशा विकास के रूप में दिखाई देती है। पिछली सरकारों
की यह मंशा ही नहीं थी। पूर्वोत्तर का विकास हमारी प्राथमिकताओं में है। हमने पूर्वोत्तर के लिए नेशनल हाइवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्पोरेशन लि. की स्थापना की, जो केंद्र सरकार की ओर से पहली बार किया गया। इसके तहत पहली बार हम डेढ़ लाख करोड़ रुपये के काम कर रहे हैं। अगर मैं कहूं कि 50 साल में जितने काम नहीं हुए उतने 5 साल में होंगे, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इसके अलावा, अरुणाचल में 40 हजार करोड़ और असम में 55 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम कर रहे हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के सीमावर्ती देशों (म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल) में 24-25 हजार करोड़ की सड़क सहित अन्य परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। साथ ही ब्रह्मपुत्र पर काम काम रहे हैं। कुछ दिन बाद हमारा माल वाराणसी, हल्दिया से बांग्लादेश जाएगा। हमने चाबहार में बंदरगाह बनाया। यह कूटनीतिक रूप से बड़ा महत्वपूर्ण है।
 
सागरमाला और भारतमाला बड़ी परियोजनाएं हैं। लक्ष्य बड़ा है। कहां तक पहुंचा है इनका काम?
 
भारतमाला साढे़ सात लाख करोड़ की परियोजना है, जिसके पहले चरण का काम हम शुरू कर रहे हैं। हम सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें बना रहे हैं। जिला मुख्यालयों को गांवों से जोड़ रहे हैं। बड़े-बड़े शहरों में 'रिंग रोड' बना रहे हैं। दूसरी परियोजना है सागरमाला। इसमें हम 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद कर रहे हैं। इसमें 4 लाख करोड़ रुपये से बंदरगाहों का विकास कर उन्हें सड़क से जोड़ा जाएगा। इसी तरह रेल को भी जोड़ेंगे। 12 लाख करोड़ रुपये में स्मार्ट सिटी, उद्योग-धंधों का विकास, विशेष आर्थिक जोन बना रहे हैं। इसमें आठ लाख करोड़ का काम चल रहा है। इसके अलावा आठ लाख करोड़ की पूंजी निजी क्षेत्र से आएगी। इन योजनाओं से महाराष्ट्र के सवा लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा।
 
आपने स्मार्ट सिटी की बात की। लेकिन कुछ शहरों को छोड़ दें तो इस योजना के ज्यादा सुखद परिणाम सामने नहीं आए हैं। इस काम में कहां चूक हो रही है?
 
ऐसा नहीं है। हमें एक बात समझनी चाहिए कि सरकार की भी क्षमताएं होती हैं, उसी के अनुरूप कार्य होते हैं। यह 'पायलट प्रोजेक्ट' है। इसी तरह की कई परियोजनाओं पर हम काम कर रहे हैं। इनके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं।
 
आपके पास गंगा का मंत्रालय भी है। हरिद्वार से बंगाल तक गंगा की दशा किसी से भी छिपी नहीं है। आपके आने के बाद गंगा कितनी निखरी है?
मैं मार्च 2019 तक गंगा को 70-80 प्रतिशत तक शुद्ध कर दूंगा। गंगा को लेकर पटना में 11, कानपुर में 7, वाराणसी में 3 परियोजनाएं हैं। साथ ही, छोटे-छोटे शहरों से निकलने वाले छोटे नालों को चिह्नित किया जा रहा है, जिनका गंदा पानी गंगा में जाता है। इस गंदे पानी से मिथेन निकाला जाएगा। मीथेन से कार्बन डाइऑक्साइड अलग कर पांच हजार बसें चलाई जाएंगी, जो प्रदूषण मुक्त होंगी। इसके अलावा गंगा को लेकर इंडियन ऑयल से भी एक समझौता करने जा रहे हैं।