सुरेश चिपलूनकर के वाल से साभार
   दिनांक 24-मई-2018


तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता कम्पनी के मुद्दे पर हुई पुलिस फायरिंग में बारह लोगों की मृत्यु के मामले में "भारत के सबसे भ्रष्ट" वित्तमंत्री पी.चिदंबरम ने मोदी सरकार पर हमला बोला है... इस सम्बन्ध में पप्पू एंड कम्पनी को कुछ याद दिलाना चाहता हूँ...

वित्तमंत्री बनने से पहले पी.चिदंबरम मई 2004 तक स्टारलाईट इंडस्ट्रीज़ (यानी वेदांता समूह) के निदेशक मंडल के सदस्य थे. UPA सरकार के सत्ता में आने के बाद जब उन्हें वित्तमंत्री बनाया गया, उस समय वेदांता के चेयरमैन ब्रायन गिलबर्ट्स ने सरेआम कहा कि "यह हमारा सौभाग्य है कि अब हमें पी. चिदंबरम के अनुभवों और ज्ञान का भरपूर फायदा मिलेगा", क्योंकि अब हम लन्दन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होने जा रहे हैं.
जब चिदंबरम वित्तमंत्री बने, तो 2007 के बजट में उन्होंने कच्चे लोहे पर एक्सपोर्ट शुल्क बढ़ाकर 300 रूपए प्रति टन कर दिया. उस समय वेदांता कंपनी भारत की सबसे प्रमुख लौह अयस्क कम्पनी "सेसा-गोवा" को खरीदने की बातचीत कर रही थी. उधर चिदंबरम ने एक्सपोर्ट शुल्क बढ़ाया और इधर सेसा गोवा कम्पनी के शेयरों में 20% गिरावट आ गई. इस कारण वेदांता कंपनी ने केवल 4070 करोड़ रूपए में सेसा-गोवा कंपनी को खरीद लिया. टेक-ओवर की यह प्रक्रिया दो माह में पूरी हुई और मई 2007 में शातिर चिदंबरम ने फिर से एक्सपोर्ट शुल्क को 300 रूपए से घटाकर 50 रूपए प्रति टन कर दिया. ज़ाहिर है कि वेदांता कंपनी को भारी मुनाफ़ा हुआ.

इससे पहले यानी UPA के सत्ता में आने से पहले वाजपेयी सरकार के दौरान, 2003 में जब प्रवर्तन निदेशालय ने वेदांता कम्पनी के खिलाफ Money Laundering का केस लगाया था उस समय मुम्बई हाईकोर्ट में वेदांता कंपनी की तरफ से वकील कौन था?? जी हाँ!! चिदंबरम... और आज से कांग्रेसी अपना मुंह फाड़कर तूतीकोरिन गोलीकांड पर RSS और मोदी को गाली दे रहे हैं?? जबकि पुलिस और क़ानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार के हाथों में होता है.
मोदी सरकार के कुछ निर्णयों (बल्कि कई अनिर्णयों) के कारण सरकार से हमारी अपनी कुछ शिकायतें हैं, इसलिए फिलहाल अधिक लिख नहीं रहे हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि चिदंबरम और शरद पवार जैसे महा-भ्रष्टों के काले कारनामे हम भूल गए हैं...